रूस ने बढ़ा दी भारत की ताकत, अभेद्य हुआ 'सुदर्शन चक्र'; आ गई S-400 की चौथी खेप

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share

भारत को रूस से S-400 सुदर्शन एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी स्क्वाड्रन मिल गई है। 'सुदर्शन चक्र' नेटवर्क के तहत यह बराक-8 और प्रोजेक्ट कुशा के साथ मिलकर भारत को आसमान में एक अभेद्य मिसाइल शील्ड देगा। जानें इसके बारे में सबकुछ।

रूस ने बढ़ा दी भारत की ताकत, अभेद्य हुआ 'सुदर्शन चक्र'; आ गई S-400 की चौथी खेप

भारत की हवाई रक्षा ताकत और भी अभेद्य हो गई है। रूस से भारत को अत्याधुनिक एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी स्क्वाड्रन मिल गई है। इस सिस्टम को भारत में 'सुदर्शन चक्र' कहा जाता है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के चलते इस सिस्टम की डिलीवरी में कुछ देरी हुई थी, लेकिन अब समुद्री रास्ते से यह भारत आ चुका है और जल्द ही इसे एक अहम ऑपरेशनल इलाके में तैनात कर दिया जाएगा।

पांचवीं और आखिरी स्क्वाड्रन का भी है इंतजार

भारत ने अपनी पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए साल 2018 में रूस के साथ पांच S-400 रेजीमेंटल सिस्टम के लिए सौदा किया था। इसकी पहली तीन स्क्वाड्रन भारत को पहले ही मिल चुकी हैं। अधिकारियों ने बताया कि यूक्रेन युद्ध के कारण जो रुकावटें आई थीं, वे अब दूर हो गई हैं और डिलीवरी फिर से तय समय पर होने लगी है। उम्मीद है कि पांचवीं और आखिरी स्क्वाड्रन भी आने वाले कुछ महीनों में भारत पहुंच जाएगी। इसके साथ ही, भारत अपने बेड़े का विस्तार करने के लिए अतिरिक्त S-400 खरीदने की योजना पर भी विचार-विमर्श कर रहा है।

'ऑपरेशन सिंदूर' और रिकॉर्ड-रेंज किल

S-400 सुदर्शन की अहमियत 'ऑपरेशन सिंदूर' से समझी जा सकती है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में S-400 ने पाकिस्तानी वायुसेना के खिलाफ एक अहम रोल निभाया था। इस डिफेंस सिस्टम ने 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी से पाकिस्तान के एक कीमती सर्विलांस एयरक्राफ्ट को मार गिराया था। अधिकारियों ने इसे एक 'रिकॉर्ड-रेंज किल' करार दिया था।

क्या है 'सुदर्शन चक्र' एयर डिफेंस नेटवर्क?

भारत एक बेहद मजबूत मल्टी-लेयर (बहुस्तरीय) रक्षा कवच तैयार कर रहा है, जिसे 'सुदर्शन चक्र' नाम दिया गया है। इसके तहत अलग-अलग तरह के हथियारों को एक यूनिफाइड नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाला S-400, मीडियम रेंज का बराक-8 और डीआरडीओ का 'प्रोजेक्ट कुशा' शामिल है। इन सभी के एक साथ नेटवर्क में जुड़ने से भारत एयरक्राफ्ट, ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलों और यहां तक कि नए हाइपरसोनिक खतरों का भी डटकर मुकाबला कर सकेगा।

'प्रोजेक्ट कुशा' से बढ़ेगी आत्मनिर्भरता

विदेशी एयर डिफेंस के साथ-साथ भारत अपने स्वदेशी 'प्रोजेक्ट कुशा' पर भी तेजी से काम कर रहा है ताकि वैश्विक स्तर की इंटरसेप्शन क्षमता विकसित की जा सके। इस प्रोजेक्ट के निर्माण और विकास में 'सोलर इंडस्ट्रीज' जैसी रक्षा क्षेत्र की कंपनियां भी अपना योगदान दे रही हैं। आयातित और स्वदेशी सिस्टम के इस तालमेल का मुख्य उद्देश्य भारत की हवाई सुरक्षा को आत्मनिर्भर बनाना और भविष्य के किसी भी खतरे से निपटने के लिए एक अभेद्य मिसाइल शील्ड तैयार करना है।

कृपया अपने अनुभव को रेट करें

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar

डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

और पढ़ें