लो हो गया ऐलान! भारत ने एडवांस्ड 'अग्नि' मिसाइल का सफल परीक्षण किया, MIRV तकनीक से लैस
भारत ने MIRV तकनीक से लैस एडवांस्ड 'अग्नि' मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। ओडिशा तट से टेस्ट की गई यह मिसाइल एक ही समय में कई अलग-अलग टारगेट्स को भेदने में सक्षम है। जानें मिसाइल की खूबियों के बारे में विस्तार से।

भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और शानदार खबर है। भारत ने शनिवार को 'मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल' (MIRV) तकनीक से लैस एडवांस्ड 'अग्नि' मिसाइल के सफल परीक्षण का ऐलान किया है। यह कामयाबी देश की रणनीतिक रक्षा क्षमताओं को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। बता दें कि यह वही मिसाइल है जिसका परीक्षण एक दिन पहले हुआ था और इसका अद्भुत नताजा बांग्लादेश तक दिखाई दिया था। इसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि भारत ने क्या लॉन्च कर दिया है!
हिंद महासागर में साधे गए अलग-अलग निशाने
इस मिसाइल का परीक्षण शुक्रवार को ओडिशा तट के पास स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल के कई पेलोड्स ने हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के एक बड़े भौगोलिक इलाके में फैले अलग-अलग टारगेट्स पर सटीक निशाना साधा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रणनीतिक बल कमान (SFC) के संयुक्त प्रयास से यह फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा हुआ। मिसाइल में कई पेलोड्स लगाए गए थे, जो हिंद महासागर क्षेत्र में बड़े भौगोलिक इलाके में अलग-अलग लक्ष्यों को स्वतंत्र रूप से निशाना बनाने में सक्षम थे। टेलीमेट्री, रडार और जहाज-आधारित स्टेशनों ने सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा होने की पुष्टि की। यह एडवांस अग्नि-5 या उसकी नई पीढ़ी (जैसे Mk2) का परीक्षण माना जा रहा है, जिसमें MIRV क्षमता के साथ संभावित हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) जैसी तकनीक भी शामिल हो सकती है।
सरकार की ओर से बताया गया कि मिसाइल के लॉन्च से लेकर सभी पेलोड्स के टारगेट से टकराने तक की पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखी गई। इसके लिए कई जमीनी और समुद्री (शिप-बेस्ड) ट्रैकिंग स्टेशनों का इस्तेमाल किया गया। फ्लाइट डेटा ने इस बात की भी पुष्टि कर दी है कि इस ट्रायल के सभी लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिए गए हैं।
क्या है MIRV तकनीक की खासियत?
इस सफल टेस्ट ने भारत की उस ताकत को साबित कर दिया है, जिसमें एक ही मिसाइल सिस्टम के जरिए कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।
एक मिसाइल, कई वार: MIRV तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें एक ही मिसाइल के जरिए कई वॉरहेड (हथियार) ले जाए जा सकते हैं।
सटीक प्रहार: इसके जरिए एक ही समय में अलग-अलग जगहों पर मौजूद टारगेट्स पर सटीकता के साथ हमला किया जा सकता है और उन्हें तबाह किया जा सकता है।
यानी प्रत्येक वारहेड अपनी अलग ट्रैजेक्टरी पर यात्रा कर सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों को सटीकता से भेद सकता है। यह क्षमता मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में बेहद प्रभावी है और भारत को परमाणु निरोधक क्षमता को मजबूत करती है। भारत इससे पहले मार्च 2024 में 'मिशन दिव्यास्त्र' के तहत अग्नि-5 का MIRV परीक्षण कर चुका है, लेकिन यह नया टेस्ट और अधिक एडवांस सिस्टम की पुष्टि करता है।
डीआरडीओ और स्वदेशी उद्योगों की मेहनत का नतीजा
इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की अलग-अलग प्रयोगशालाओं ने देश भर के उद्योगों की मदद से विकसित किया है। शुक्रवार को हुए इस ऐतिहासिक परीक्षण के दौरान डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय सेना के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई
इस बड़ी उपलब्धि पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय सेना और इस प्रोजेक्ट से जुड़े इंडस्ट्री पार्टनर्स को बधाई दी है। रक्षा मंत्री ने कहा कि उभरती हुई सुरक्षा चुनौतियों और लगातार बढ़ते खतरों के बीच यह सफलता भारत की रक्षा तैयारियों में एक "अविश्वसनीय क्षमता" जोड़ेगी।
यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी सैन्य ताकत के आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है और स्वदेशी रक्षा तकनीकों के जरिए अपनी रणनीतिक मारक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।
बांग्लादेश तक दिखा अद्भुत दृश्य
परीक्षण के दौरान आकाश में चमकदार प्लूम (ग्लोइंग ट्रेल) पूर्वी भारत (ओडिशा, पश्चिम बंगाल) के साथ-साथ बांग्लादेश के तटीय इलाकों (जैसे सिताकुंडा, कॉक्स बाजार) से साफ दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोगों ने इसे 'आग की लकीर' या 'अज्ञात उड़ान वस्तु' बताया, जिससे विभिन्न कयास लगाए जाने लगे। कुछ ने इसे अग्नि-6 ICBM का परीक्षण माना।
यह परीक्षण भारत की रणनीतिक क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अग्नि सीरीज की मिसाइलें मुख्य रूप से चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के संदर्भ में निरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। MIRV और संभावित लंबी रेंज (5,000+ किमी या अधिक) के साथ यह मिसाइल एक साथ कई हमले की क्षमता प्रदान करती है। DRDO के अध्यक्ष ने पहले ही अग्नि-6 कार्यक्रम की तकनीकी तैयारी की घोषणा की थी, जिसकी रेंज 10,000-12,000 किमी तक बताई जाती है।
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लेखक के बारे में
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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