हमारे नाविकों को मरने के लिए समुद्र में छोड़ देते हो, भारत ने 366 विदेशी जहाजों पर लगाया बैन

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भारत ने भारतीय नाविकों के साथ दुर्व्यवहार, वेतन न देने और बीच समंदर छोड़ने के आरोप में 366 विदेशी जहाजों पर भर्ती करने से तत्काल रोक लगा दी है। इनमें 88 जहाजों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। जानें पूरी खबर।

हमारे नाविकों को मरने के लिए समुद्र में छोड़ देते हो, भारत ने 366 विदेशी जहाजों पर लगाया बैन

समुद्री मामलों को देखने वाले भारत के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DG Shipping) ने भारतीय नाविकों के हित में एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। गुरुवार को जारी एक आदेश में 366 विदेशी झंडे वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों को काम पर रखने से तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इन जहाजों पर भारतीय क्रू मेंबर्स के साथ दुर्व्यवहार करने और उन्हें उनके हाल पर छोड़ देने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

क्यों लिया गया यह सख्त एक्शन?

डीजी शिपिंग के अनुसार, इन जहाजों द्वारा राष्ट्रीय समुद्री नियमों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का खुला उल्लंघन किया जा रहा था। इन जहाजों पर मुख्य रूप से ये आरोप हैं:

वेतन न देना: नाविकों को उनके काम की मजदूरी (सैलरी) का भुगतान न करना।

मुआवजे से इनकार: किसी नाविक की मृत्यु होने या ड्यूटी के दौरान लापता होने की स्थिति में उनके परिवार को मुआवजा देने से मना करना।

स्वदेश वापसी में मदद न करना: नाविकों को वापस भारत भेजने (रिपैट्रिएशन) में कोई सहायता न करना।

अनावश्यक परेशानी: ड्यूटी के दौरान क्रू मेंबर्स को बिना किसी मदद के अनुचित और कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर करना।

जहाजों को 'रेस्ट्रिक्टेड' और 'ब्लैकलिस्ट' कैटेगरी में डाला गया

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वाले संकट के बाद कई भारतीय नाविकों ने विदेशी जहाजों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ये जहाज कंपनियां उन्हें मरने के लिए समुद्र में अकेले छोड़ देती हैं और संकट के समय कोई मदद नहीं मिलती। अब डीजी शिपिंग की ओर से भर्ती और प्लेसमेंट सेवा लाइसेंस (RPSL) होल्डर्स कंपनियों और सभी भारतीय नाविकों के लिए एक सर्कुलर जारी किया गया है। इसके तहत जहाजों को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:

  • कुल 366 जहाजों पर कार्रवाई की गई है।
  • इनमें से 278 जहाजों को 'रेस्ट्रिक्टेड' यानी प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है।
  • बाकी 88 जहाजों को पूरी तरह से 'ब्लैकलिस्टेड' कर दिया गया है।

भर्ती एजेंसियों (RPSL) को दिया गया अल्टीमेटम

रेगुलेटर ने सभी रिक्रूटमेंट और प्लेसमेंट सर्विस (RPSL) कंपनियों को सख्त चेतावनी दी है कि वे इन 366 जहाजों पर किसी भी भारतीय नाविक की प्लेसमेंट न करवाएं। साथ ही, एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे अगले 14 दिनों के भीतर उन सभी भारतीय नाविकों का पूरा विवरण जमा करें, जो वर्तमान में इन जहाजों पर काम कर रहे हैं।

डीजी शिपिंग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि नाविकों के कल्याण की अनदेखी, उन्हें मझधार में छोड़ने की प्रथाओं और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का पालन न करने जैसी गंभीर कमियों के कारण यह रोक लगाई गई है। जब तक ये जहाज जरूरी नियमों और प्रावधानों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित नहीं करते, तब तक किसी भी डीजी शिपिंग-मान्यता प्राप्त कंपनी के जरिए वे भारतीय नाविकों को काम पर नहीं रख सकेंगे।

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लेखक के बारे में

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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