Hindi NewsIndia NewsBig News as US extends Chabahar port waiver for India till April 2026
चाबहार पर भारत की बड़ी जीत, US ने बढ़ाई छूट; अप्रैल 2026 तक नहीं लगेंगे प्रतिबंध

चाबहार पर भारत की बड़ी जीत, US ने बढ़ाई छूट; अप्रैल 2026 तक नहीं लगेंगे प्रतिबंध

संक्षेप:

चाबहार परियोजना भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीति का केंद्रबिंदु है। पाकिस्तान के माध्यम से अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच सीमित होने के कारण यह बंदरगाह वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है।

Thu, 30 Oct 2025 12:51 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भारत को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। अमेरिका ने ईरान स्थित चाबहार पोर्ट परियोजना के लिए प्रतिबंधों से छूट की अवधि को अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया है, जिससे भारत को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक अपनी कनेक्टिविटी योजनाओं को जारी रखने में बड़ी राहत मिली है।

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यह छूट पहली बार 2018 में ईरान फ्रीडम एंड काउंटर-प्रोलिफरेशन एक्ट (IFCA) के तहत दी गई थी। हाल ही में जब अमेरिका ने इस छूट को रद्द करने के संकेत दिए थे, तो नई दिल्ली में चिंता बढ़ गई थी। लेकिन अब ताजा विस्तार के साथ भारत पोर्ट के संचालन को बिना किसी तत्काल अमेरिकी प्रतिबंध के डर के जारी रख सकेगा।

भारत के लिए रणनीतिक महत्व

चाबहार पोर्ट ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर गल्फ ऑफ ओमान के किनारे स्थित है और यह ईरान का एकमात्र महासागर से जुड़ा बंदरगाह है। यह भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच एक रणनीतिक गलियारा बन गया है। यह बंदरगाह पाकिस्तान को बायपास करते हुए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जोड़ता है। भारत ने अब तक अफगानिस्तान को गेहूं और यूरिया की कई खेपें चाबहार के रास्ते भेजी हैं, जो मानवीय सहायता के तौर पर वहां पहुंचाई गईं।

निवेश और नई साझेदारी

मई 2024 में भारत और ईरान के बीच 10 साल का समझौता हुआ था, जिसके तहत भारत ने चाबहार के शहीद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास में अब तक 120 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इस निवेश में आधुनिक उपकरणों की आपूर्ति, टर्मिनल अपग्रेड और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से कनेक्टिविटी जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

‘गोल्डन गेट’ के रूप में उभरता चाबहार

चाबहार पोर्ट अफगान सीमा से लगभग 950 किलोमीटर दूर है और इसे भारत द्वारा “गोल्डन गेट” के रूप में देखा जाता है- ऐसा प्रवेशद्वार जो स्थल-रुद्ध देशों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भारतीय महासागर से जोड़ता है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर प्रभाव

यह निर्णय भारत-अमेरिका संबंधों में संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। अमेरिका, जहां ईरान पर अपने प्रतिबंधों को लेकर सख्त नीति अपनाता है, वहीं भारत की रणनीतिक और मानवीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को छूट देता रहा है। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि यह छूट भारत के क्षेत्रीय संपर्क और ऊर्जा सुरक्षा प्रयासों के लिए बेहद अहम है, और इससे नई दिल्ली-तेहरान साझेदारी को भी मजबूती मिलेगी।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar
अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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