हिमालय से लेकर समंदर तक मंडरा रहा बड़ा खतरा, 'खौलने लगा' महासागरों का पानी

हिन्दुस्तान टीम
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पर्यावरण के जानकारों ने हिमालय और समंदर दोनों को लेकर चिंता जाहिर की है। एक तरफ पहाड़ों में गर्मी बढ़ने से ग्लेशियर टूट रहे हैं तो दूसरी ओर समंदर का तापमान भी लगातार बढ़ा ही रहता है।

Ocean
समंदर का लगातार बढ़ रहा है तापमान, समुद्री जीवों पर खतरा

शैलेन्द्र सेमवाल

कुदरत के दो सबसे बड़े रक्षक आज इंसानी दखल और जलवायु परिवर्तन के दोहरे मोर्चे पर जूझ रहे हैं। एक तरफ समुद्र में तापमान के सारे रिकॉर्ड टूट रहे हैं। यह महीनों तक बढ़ा ही रहता है। वहीं दूसरी ओर, अनियंत्रित सैलानियों की भारी भीड़ और कंक्रीट के बेतरतीब जाल ने हिमालय की चोटियों को तबाही के मुहाने पर धकेल दिया है। भारतीय हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पर्यटन से पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों ने हिमालय के मौजूदा आर्थिक विकास मॉडल में बदलाव की जरूरत बताई है। अनियंत्रित पर्यटन पर रोक लगाकर इको-टूरिज्म और पारंपरिक व जैविक खेती को बढ़ावा देने की सलाह दी है।

जीबी पंत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन एनवायरनमेंट (जीबीपीएनआईएचई) और सिस्टेमिक, इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव (आईएमआई) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के हिमालयी क्षेत्रों में हर साल करीब 40 करोड़ पर्यटक पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि भारत की अर्थव्यवस्था में हिमालय का योगदान 21.5 फीसदी तक है। इससे लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी है, लेकिन बढ़ते दबाव से हिमालय का नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद हिमालयी राज्यों को इस आर्थिक मूल्य का करीब पांच फीसदी ही प्राप्त हो रहा है। पर्यावरणीय क्षति और आपदाओं की लागत का बड़ा हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों को उठाना पड़ता है।

इसलिए दिक्कत

● पर्यटन के साथ बढ़ा सॉलिड वेस्ट, पानी और आपदा का दबाव

● पहाड़ी कस्बों में वाहनों और होटलों की बढ़ती संख्या चिंताजनक स्तर पर पहुंची

● सीवेज प्रबंधन की समस्या गंभीर

● अनियंत्रित विकास से ढलानों की स्थिरता प्रभावित भूस्खलन का जोखिम

● उच्च हिमालयी क्षेत्र के घास के मैदानों पर भी खतरा मंडरा रहा है

● पर्यटकों की संख्या सीमित करें, इको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाए

● कैरीइंग कैपेसिटी के आकलन पर निरंतर काम करना होगा

● पर्यटन की आय बड़ा हिस्सा हिमालय के बुनियादी ढांचे पर लग

● सड़कों,जलविद्युत परियोजनाओं में हिमालय के नुकसान का ध्यान रखें

सागर की तपिश का इस बार टूट सकता है रिकॉर्ड

धरती का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी तरह समुद्र के तापमान में भी वृद्धि हो रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि समुद्र के बढ़े हुए तापमान में निरंतरता आने लगी है। यानी वह महीनों तक बढ़ा ही रहता है, जबकि पहले यह कुछ दिनों के लिए बढ़ता था। इस बार समुद्र का तापमान लगातार 100 दिन से ज्यादा बढ़ने का रिकार्ड तोड़ सकता है। ऐसे में समुद्र के अंदर जैव विविधता को खतरा हो सकता है।

क्लाईमेट संट्रेल की एक रिपोर्ट के अनुसार,2026 में दुनिया के महासागर कुछ ऐसी ही असाधारण गर्मी से गुजर रहे हैं। 2 जून से वैश्विक समुद्री सतह का तापमान ध्रुवीय इलाकों को छोड़कर रिकॉर्ड स्तरों पर ऊंचा बना हुआ है। 23 अगस्त को वैश्विक दैनिक समुद्री सतह तापमान 21.24 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का प्रारंभिक आंकड़ा सामने आया। यह मार्च 2024 के 21.17 डिग्री सेल्सियस के पिछले दैनिक रिकॉर्ड से ऊपर है।

समुद्री हीटवेव से है नुकसान

अनुमान है कि मानव गतिविधियों से पैदा हुई अतिरिक्त गर्मी का करीब 93 फीसदी हिस्सा समुद्र ने सोखा है। गर्म होता समुद्र समुद्री जीवों के आवास और उनके व्यवहार को बदल सकता है। मछलियां अपने अनुकूल तापमान वाले पानी की तरफ जाने लगती हैं। कुछ प्रजातियों के प्रजनन और भोजन चक्र प्रभावित होते हैं।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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