भारत को बड़ी कामयाबी! पनडुब्बियों को मिलेगा 'सीक्रेट' सिस्टम, हफ्तों तक पानी में छिपकर करेंगी वार
DRDO ने भारतीय नौसेना के लिए खास AIP सिस्टम तैयार किया है। इससे पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी में छिप सकेंगी। जानिए 400 KM रेंज वाले टॉरपीडो और अन्य हथियारों की डिटेल।

भारतीय नौसेना की ताकत में जल्द ही एक बड़ा इजाफा होने जा रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पनडुब्बियों के लिए एक क्रांतिकारी 'एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम' तैयार किया है। इस नए सिस्टम की मदद से भारतीय पनडुब्बियां पानी के अंदर पहले से कहीं ज्यादा समय तक रह सकेंगी। DRDO के अध्यक्ष समीर वी कामत ने आईआईटी बॉम्बे के दीक्षांत समारोह के दौरान यह अहम जानकारी साझा की।
- नए सिस्टम से डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
- गुजरात के एलएंडटी (L&T) हजीरा प्लांट में इसका फाइनल काम चल रहा है।
- DRDO की 'नेवल मटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी' ने इसे तैयार किया है।
कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?
DRDO चीफ समीर वी कामत ने बताया कि इस प्रोपल्शन सिस्टम का लैंड-बेस्ड प्रोटोटाइप 2021 में टेस्ट किया गया था। अब इसका फुल वर्जन गुजरात के हजीरा स्थित L&T प्लांट में तैयारी के अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया- जल्द ही इसे मुंबई के मझगांव डॉक को सौंप दिया जाएगा, जहां इसे 14वीं पनडुब्बी में इंस्टॉल (स्थापित) किया जाएगा।
इस नए सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की 'सबमर्ज्ड एंड्योरेंस' यानी पानी के भीतर रहने की क्षमता को काफी बढ़ा देगा। आसान भाषा में समझें तो पनडुब्बियां अब बिना सतह पर आए लंबे समय तक पानी के भीतर छिपी रह सकेंगी, जिससे दुश्मन के खिलाफ उनकी मारक क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।
400 किमी दूर दुश्मन की पनडुब्बी होगी नेस्तनाबूद
पनडुब्बियों की तकनीक के अलावा DRDO कई अन्य घातक हथियारों पर भी तेजी से काम कर रहा है। समीर वी कामत ने बताया कि DRDO एक ऐसा मिसाइल-माउंटेड टॉरपीडो (मिसाइल पर लगा टॉरपीडो) विकसित कर रहा है, जो 400 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन की पनडुब्बी को तबाह कर सकता है। इसके साथ ही, DRDO में एक 'हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल' और 'लेजर-डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' (लेजर हथियार) पर भी काम चल रहा है।
'ऑपरेशन सिंदूर' और अग्नि-पृथ्वी मिसाइलों का दम
इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के बारे में बात करते हुए DRDO प्रमुख ने अग्नि और पृथ्वी मिसाइलों की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये मिसाइलें दुश्मन के मन में खौफ पैदा करने (डिटरेंस) का काम करती हैं। कामत ने कहा- इन्हीं मिसाइलों की वजह से अब तक हमें किसी बड़े हमले का सामना नहीं करना पड़ा है।
इसके अलावा, उन्होंने पिछले साल हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में DRDO द्वारा विकसित की गई आकाश मिसाइल और 'एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट' (हवाई चेतावनी विमान) ने बेहद निर्णायक और बड़ी भूमिका निभाई थी।
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लेखक के बारे में
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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