बंगाल में चुनाव बाद हिंसा मामले में बड़ा ऐक्शन, दोबारा खोलीं गईं 2021 की 59 फाइलें; 181 नई FIR
एक CID अधिकारी ने कहा कि एजेंसी उन केसों पर भी दोबारा विचार कर रही है जो पहले बंद कर दिए गए थे। अधिकारी ने आगे कहा कि अब तक 59 केस जिनमें फाइनल रिपोर्ट जमा हो चुकी थी, आगे की जांच के लिए फिर से खोल दिया गया है।

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद, राज्य सरकार ने 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद हुई हिंसा के मामलों की नए सिरे से समीक्षा करने का फैसला लिया है। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल CID ने 2021 में चुनाव बाद हिंसा से जुड़ी शिकायतों के संबंध में नई कार्रवाई शुरू कर दी है। एक अधिकारी ने सोमवार (18 मई, 2026) को बताया कि अब तक इस मामले में 458 नई जांच शुरू की गई हैं और 181 नई FIR दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने 59 ऐसे केस फिर से खोले हैं, जिनमें पहले फाइनल रिपोर्ट जमा की जा चुकी थी।
एक सीनियर CID अधिकारी ने कहा, "2021 में चुनाव बाद हिंसा से जुड़ी मिली शिकायतों को देखते हुए, प्रक्रिया के अनुसार जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।" CID अधिकारी ने कहा कि एजेंसी उन केसों पर भी दोबारा विचार कर रही है जो पहले बंद कर दिए गए थे। अधिकारी ने आगे कहा, "अब तक, 59 केस जिनमें फ़ाइनल रिपोर्ट जमा हो चुकी थी, उन्हें आगे की जांच के लिए फिर से खोल दिया गया है और मामले में अभी कार्रवाई जारी है।" अधिकारी ने बताया कि इनके अलावा महिलाओं के खिलाफ हिंसा और POCSO से जुड़े करीब 300 मामलों की भी समीक्षा की जा रही है।
चुनाव बाद हिंसा से खड़ा हुआ था राजनीतिक विवाद
राज्य में 2021 में चुनाव के बाद हुई हिंसा ने बड़े पैमाने पर राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था और विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कई ज़िलों में लोगों पर हमले, डराने-धमकाने और उन्हें दूसरी जगह भेजने के आरोपों के बाद कई जांचें हुईं। बता दें कि कुछ दिनों पहले ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) अजय रानडे ने यह आदेश जारी किए। पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे 2021 की हिंसा से संबंधित उन "अंतिम रिपोर्टों" की सूक्ष्मता से जांच करें जो उस समय दाखिल की गई थीं। यदि किसी मामले की जांच में खामियाँ पाई जाती हैं, तो उन्हें फिर से खोला जाएगा और उनकी नए सिरे से जांच की जाएगी।
जनरल डायरी की पड़ताल के भी निर्देश
इसके अतिरिक्त, पुलिस उन पुराने जनरल डायरी (GD) प्रविष्टियों और आवेदनों की भी पड़ताल करेगी जिनके आधार पर उस समय कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई थी। अगर प्रारंभिक पूछताछ में कोई संज्ञेय अपराध पाया जाता है, तो तुरंत नया मामला दर्ज किया जाएगा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इन मामलों की सुनवाई (ट्रायल स्टेज) तक निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अवैध हथियारों पर नकेल राज्यव्यापी सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए 16 मई से अवैध हथियारों की जब्ती का अभियान शुरू किया जा रहा है।
हथियारों की जब्ती के दैनिक रिपोर्ट तलब
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे हथियारों की जब्ती से संबंधित दैनिक रिपोर्ट एडीजी, सीआईडी को भेजें, जो इस डेटा को संकलित कर राज्य सरकार को सौंपेंगे। सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष नजर इस अभियान के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को प्राथमिकता दी गई है। पुलिस अधीक्षकों (SPs) को सक्रिय अपराधियों और "सीमावर्ती दलालों" की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अब पुलिस थानों के स्तर पर हर महीने और उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (SDPO) के स्तर पर हर तिमाही में समन्वय बैठकें आयोजित की जाएंगी।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


