Hindi NewsIndia NewsBig achievement of ISRO identifies site on Moon for Chandrayaan-4 lander two years ahead
चंद्रयान-4 मिशन में ISRO की बड़ी उपलब्धि, तकनीक ऐसी कि दो साल पहले ही हासिल कर लिया ये मुकाम

चंद्रयान-4 मिशन में ISRO की बड़ी उपलब्धि, तकनीक ऐसी कि दो साल पहले ही हासिल कर लिया ये मुकाम

संक्षेप:

अधिकारियों ने बताया कि इन सभी स्थलों की जांच ऑर्बिटर हाई रेज़ॉल्यूशन कैमरा (OHRC) और विभिन्न सैटेलाइट चित्रों की मदद से की गई। अध्ययन में सामने आया कि MM-4 के आसपास लगभग एक किलोमीटर × एक किलोमीटर का क्षेत्र लैंडिंग के लिए सबसे सुरक्षित है।

Feb 09, 2026 08:22 pm ISTPramod Praveen भाषा, बेंगलुरु
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-4 मिशन के लिए एक अहम उपलब्धि हासिल करते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में लैंडर के उतरने का स्थान तय कर लिया है। बड़ी बात यह है कि मिशन की लॉन्चिंग से कम से कम दो साल पहले ही लैंडिंग साइट की पहचान कर ली गई है, जिसे इसरो की तकनीकी तैयारी में बड़ा कदम माना जा रहा है। केंद्र सरकार पहले ही चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दे चुकी है। इस मिशन के तहत चंद्रमा की सतह से नमूने पृथ्वी पर लाए जाएंगे, जिससे यह भारत का अब तक का सबसे जटिल और महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन बन जाएगा।

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष वी. नारायणन ने पहले कहा था, "हम चंद्रयान-4 के लिए 2028 का लक्ष्य रख रहे हैं।" इसरो के अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने मोंस माउटन (एमएम) क्षेत्र के चार स्थलों का चयन किया और उनमें से एक को चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए उपयुक्त पाया। मोंस माउटन चंद्रमा का एक क्षेत्र है। अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने एमएम-1, एमएम-3, एमएम-4 और एमएम-5 स्थानों की पहचान की, जिनमें से एमएम-4 को लैंडिंग के लिए चुना गया।

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एमएम-4 को उपयुक्त जगह माना

उन्होंने कहा, "मोंस माउंटेन क्षेत्र के चारों स्थलों को उनकी ऊंचाई और जमीन की आकृति के आधार पर ऑर्बिटर हाई रिजॉल्यूशन कैमरा (ओएचआरसी) और विभिन्न तस्वीरों की मदद से पूरी तरह से जांचा गया।" अधिकारियों ने कहा, “इस दौरान पता चला कि एमएम-4 के आसपास एक किलोमीटर लंबा और एक किलोमीटर चौड़ा क्षेत्र सबसे सुरक्षित है। यहां की औसत ढलान पांच डिग्री, औसत ऊंचाई 5334 मीटर है, और 24 मीटर लंबे व 24 मीटर चौड़े सबसे ज्यादा सुरक्षित ग्रिड हैं। इसलिए, चंद्रयान-4 मिशन के लिए एमएम-4 को उपयुक्त जगह माना जा सकता है।”

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कुल पांच प्रमुख मॉड्यूल शामिल

चंद्रयान-4 में पांच मुख्य हिस्से प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम), डिसेंडर मॉड्यूल (डीएम), एसेंडर मॉड्यूल (एएम), ट्रांसफर मॉड्यूल (टीएम) और री-एंट्री मॉड्यूल (आरएम) हैं। डीएम और एएम से मिलकर एक स्टैक बनेगा, जो चंद्रमा की निर्धारित सतह पर धीरे-धीरे उतरेगा। एएम और डीएम के सही मार्ग और नेविगेशन, गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम की मदद से मुख्य लैंडिंग होगी। साथ ही, सुरक्षित लैंडिंग के लिए ऐसा लैंडिंग स्थल चुना जाएगा जो लैंडर की सभी जरूरतों के अनुरूप हो।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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