अंडमान सागर में बड़ा हादसा, बांग्लादेशियों-रोहिंग्याओं से भरी नाव पलटी; 250 के डूबने की आशंका
म्यांमार के सताए हुए मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय, रोहिंग्या के हज़ारों लोग हर साल अपने देश में हो रहे दमन और गृहयुद्ध से बचने के लिए समुद्र के रास्ते अपनी जान जोखिम में डालकर भागते हैं। अक्सर वे कामचलाऊ नावों का इस्तेमाल करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को बताया कि अंडमान सागर में बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या शरणार्थियों को ले जा रही एक नाव पलटने से बच्चों समेत करीब 250 लोगों के लापता होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) ने एक बयान में कहा, "यह नाव (ट्रॉलर) दक्षिणी बांग्लादेश के टेकनाफ से रवाना हुई थी और मलेशिया जा रही थी। बताया जा रहा है कि तेज़ हवाओं, समुद्र में उफान और नाव में क्षमता से ज़्यादा लोगों के होने के कारण यह डूब गई।" नाव पर सवार लोगों के डूबने की आशंका जताई जा रही है।
म्यांमार के सताए हुए मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय, रोहिंग्या के हज़ारों लोग हर साल अपने देश में हो रहे दमन और गृहयुद्ध से बचने के लिए समुद्र के रास्ते अपनी जान जोखिम में डालकर भागते हैं। अक्सर वे कामचलाऊ नावों का इस्तेमाल करते हैं। नाव पर सवार रोहिंग्या लोग संभवतः बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार में बने विशाल शिविरों से निकल रहे थे। इन शिविरों में दस लाख से ज़्यादा ऐसे शरणार्थी रहते हैं, जिन्हें म्यांमार के पश्चिमी राज्य रखाइन से भागने पर मजबूर होना पड़ा था। ये लोग यहाँ बेहद खराब हालात में गुज़ारा करते हैं।
नाव में 280 लोग सवार थे
रखाइन राज्य में सेना और 'अराकान आर्मी' (एक जातीय अल्पसंख्यक विद्रोही समूह) के बीच इलाके पर कब्ज़े को लेकर ज़बरदस्त लड़ाई होती रही है। इस ताज़ा घटना के पीछे की सही वजहें अभी साफ नहीं हैं, लेकिन शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस नाव में 280 लोग सवार थे और यह 4 अप्रैल को बांग्लादेश से रवाना हुई थी। UNHCR के बयान में कहा गया, “यह दुखद घटना लंबे समय से चले आ रहे विस्थापन के गंभीर नतीजों और रोहिंग्या लोगों के लिए किसी स्थायी समाधान के न होने को दर्शाती है।”
पिछले साल भी दो नाव डूबी थी
बयान में यह भी कहा गया कि यह घटना "म्यांमार में विस्थापन की मूल वजहों को दूर करने और ऐसे हालात बनाने के लिए तुरंत ज़रूरी प्रयासों की याद दिलाती है, ताकि रोहिंग्या शरणार्थी अपनी मर्ज़ी से, सुरक्षित और सम्मान के साथ अपने घर लौट सकें।" अंडमान सागर म्यांमार, थाईलैंड और मलय प्रायद्वीप के पश्चिमी तटों के साथ-साथ फैला हुआ है। पिछले साल UNHCR ने बताया था कि मई महीने में म्यांमार के तट के पास दो नाव दुर्घटनाओं में समुद्र में 427 रोहिंग्या लोगों के मारे जाने की आशंका थी।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


