Explainer: भबानीपुर में क्या होगा? SIR में कट गए 25 फीसदी वोटर, ममता के लिए कितनी टेंशन
भबानीपुर विधानसभा सीट में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या ही करीब 25 फीसदी कम हो गई है। SIR से पहले यहां कुल 2 लाख 6 हजार मतदाता थे। इनमें से 51 हजार नाम हट गए हैं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार SIR में जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनमें से 23 फीसदी मुसलमान हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भबानीपुर सीट से लड़ रही हैं। कोलकाता की यह सीट बाहरी वोटरों और गैर-बांग्ला भाषी लोगों की भी अच्छी खासी संख्या होने के चलते जानी जाती है। यहां से भाजपा के शुभेंदु अधिकारी भी उतर गए हैं, जिन्होंने 2021 के चुनाव में ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ नंदीग्राम से हरा दिया था। इस बार वह भबानीपुर ही आ गए हैं ताकि सीएम ममता को सीधी चुनौती दी जा सके। इस बीच भबानीपुर विधानसभा सीट में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या ही करीब 25 फीसदी कम हो गई है। SIR से पहले यहां कुल 2 लाख 6 हजार मतदाता थे। इनमें से 51 हजार नाम हट गए हैं। इसके चलते चर्चा है कि आखिर SIR का फायदा इस बार किसे मिलेगा?
अब तक मिली जानकारी के अनुसार SIR में जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनमें से 23 फीसदी मुसलमान हैं। इसके अलावा 76 फीसदी गैर-मुसलमान हैं। ऐसे में यह कयास लग रहे हैं कि आखिर SIR में एक चौथाई नाम कटने का असर क्या होगा। सामाजिक समीकरणों को देखते हुए लगता है कि ममता बनर्जी को ज्यादा नुकसान नहीं होगा, लेकिन चर्चाएं जोरों पर हैं। कहा जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर वोटर ऐसे हैं, जो इलाके में पाए नहीं गए अथवा रोजगार आदि के लिए कहीं और पलायन कर गए। अंत में चुनाव आयोग के समक्ष जब कोई दावेदारी नहीं हुई तो इन नामों को काटना ही पड़ा।
एक सवाल यह भी है कि आखिर इस सीट से भाजपा को इतनी ज्यादा उम्मीदें क्यों हैं? इसकी वजह यह बताई जा रही है कि यहां करीब 35 से 40 फीसदी गैर-बांग्ला लोग हैं। इन लोगों में गुजराती, मारवाड़ी, पंजाबी और सिख शामिल हैं। इन लोगों के यहां कारोबार हैं और अरसे से इस इलाके के बाशिंदे हैं। ममता बनर्जी बांग्ला प्राइड की बात करती रही हैं। कई बार उनके आरोप रहे हैं कि बंगाल में भाजपा बाहरी लोगों को ला रही है। ऐसे में यदि वह बांग्ला कार्ड ज्यादा चलती हैं तो फिर उनकी ही भबानीपुर सीट पर इसका नुकसान हो सकता है।
क्यों भबानीपुर को कहते हैं मिनी इंडिया, इसी में भाजपा को उम्मीद
भबानीपुर सीट के सामाजिक समीकरणों को समझने वाले लोग इसे मिनी इंडिया कहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कई राज्यों के लोग यहां बहुतायत में मिलते हैं। इसी को देखते हुए होम मिनिस्टर अमित शाह खुद यहां फोकस कर रहे हैं। यहां तक नारा दिया जा रहा है कि यदि भबानीपुर जीत लिया तो फिर बंगाल जीता जा सकता है। यहां की आबादी 42 फीसदी तो बंगाली हिंदू हैं, जबकि 34 फीसदी गैर-बांग्ला हिंदू हैं। इस तरह यहां पोलराइजेशन का भी असर दिख सकता है। भाजपा को यही उम्मीद है। उसे लगता है कि यहां मामला टाइट हुआ तो ममता बनर्जी दूसरे इलाकें में समय कम ही देंगी।
लेखक के बारे में
Surya Prakashदुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले सूर्यप्रकाश को पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। 10 वर्षों से ज्यादा समय से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यों से संबंधित खबरों का संपादन करते हैं एवं डेस्क इंचार्ज के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। समाचारों के त्वरित प्रकाशन से लेकर विस्तृत अध्ययन के साथ एक्सप्लेनर आदि में भी रुचि रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज प्रकाशित करने और खबरों के अंदर की खबर को विस्तार से समझाने में रुचि रखते हैं। हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को समझते हैं और उसके अनुसार ही पाठकों को खबरें देने के लिए तत्परता रखते हैं।
अकादमिक योग्यता: एक तरफ डेढ़ दशक का सक्रिय पत्रकारिता करियर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ सूर्यप्रकाश अकादमिक अध्ययन में भी गहरी दिलचस्पी रखते रहे हैं। पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन और मास्टर्स की पढ़ाई के साथ ही 'हाइब्रिड वारफेयर में मीडिया के इस्तेमाल' जैसे महत्वपूर्ण एवं उभरते विषय पर पीएचडी शोध कार्य भी किया है। पत्रकारिता, समाज, साहित्य में रुचि के अलावा वारफेयर में मीडिया के प्रयोग पर भी गहरा अध्ययन किया है। इसी कारण डिफेंस स्टडीज जैसे गूढ़ विषय में भी वह रुचि रखते हैं। इस प्रकार सूर्यप्रकाश का एक लंबा पेशेवर अनुभव रहा है तो वहीं गहरी अकादमिक समझ भी रही है।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय महत्व के समाचारों में गहरी दिलचस्पी रखते हैं तो वहीं नैरेटिव वारफेयर के बारे में भी गहरा अध्ययन है। खबरों के अंदर की खबर क्या है और किसी भी समाचार के मायने क्या हैं? ऐसी जरूरी चीजों को पाठकों तक पहुंचाने में भी रुचि रखते हैं। लाइव हिन्दुस्तान में बीते 5 सालों से जुड़े हैं और गुणवत्तापूर्ण समाचार देने की मुहिम को बल प्रदान किया है। सूर्यप्रकाश को पाठकों की पसंद को समझने और उसके अनुसार समाचारों के प्रस्तुतिकरण में भी महारत हासिल है। कठिन विषयों को सरल शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने की रुचि है और इसी कारण एक्सप्लेनर आदि भी लिखते हैं।
और पढ़ें

