दक्षिण कोरिया के इस द्वीप पर जाने वालों सावधान! भारतीय दूतावास ने क्यों जारी की ट्रैवल एडवायजरी
अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों को यह साबित करने में सक्षम होना चाहिए कि उनके पास पूरे प्रवास के दौरान खर्च उठाने के लिए पर्याप्त धन है। इमिग्रेशन जांच के दौरान पूछे गए सवालों का शांत और सुसंगत तरीके से जवाब देना भी जरूरी बताया गया है।

दक्षिण कोरिया का राजधानी सियोल स्थित भारतीय दूतावास ने मंगलवार को भारतीय नागरिकों के लिए एक अहम एडवायजरी जारी करते हुए दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप की यात्रा के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह चेतावनी कंटेंट क्रिएटर सचिन अवस्थी को हाल ही में हिरासत में लिए जाने की घटना के बाद जारी की गई है, जिसने यात्रियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। दूतावास ने अपने बयान में कहा कि समय-समय पर भारतीय यात्रियों को जेजू द्वीप पर प्रवेश से इनकार या वापस भेजे जाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, खासकर वीज़ा-फ्री सुविधा के तहत यात्रा करने वालों के साथ।
एडवायजरी में स्पष्ट किया गया है कि जेजू का वीज़ा-मुक्त प्रवेश केवल अल्पकालिक पर्यटन के लिए मान्य है और अंतिम निर्णय वहां के इमिग्रेशन अधिकारियों के हाथ में होता है। यानी, वीज़ा-फ्री सुविधा होने के बावजूद प्रवेश की गारंटी नहीं होती। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज अपने साथ रखें, जिनमें कन्फर्म रिटर्न टिकट, पूरे प्रवास की होटल बुकिंग, दिन-वार यात्रा योजना, पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का प्रमाण, कम से कम छह महीने का वैध पासपोर्ट, ट्रैवल इंश्योरेंस और ठहरने के स्थान की संपर्क जानकारी शामिल हैं।
वित्तीय तैयारी पर विशेष जोर
दूतावास ने यह भी चेतावनी दी कि यदि यात्री अपनी यात्रा योजना स्पष्ट रूप से नहीं बता पाते, तो उन्हें प्रवेश से रोका जा सकता है। एडवायजरी में वित्तीय तैयारी पर भी विशेष जोर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों को यह साबित करने में सक्षम होना चाहिए कि उनके पास पूरे प्रवास के दौरान खर्च उठाने के लिए पर्याप्त धन है। इमिग्रेशन जांच के दौरान पूछे गए सवालों का शांत और सुसंगत तरीके से जवाब देना भी जरूरी बताया गया है।
जेजू वीजा-फ्री योजना का हिस्सा नहीं
दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि जेजू वीज़ा-फ्री योजना के तहत मुख्य भूमि दक्षिण कोरिया की यात्रा की अनुमति नहीं है। यदि कोई यात्री बिना वीज़ा के वहां जाने की कोशिश करता है या निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रुकता है, तो उस पर भविष्य में यात्रा प्रतिबंध लगाया जा सकता है। प्रवेश से इनकार की स्थिति में यात्रियों को अगले उपलब्ध विमान से वापस भेज दिया जाता है और तब तक उन्हें अस्थायी हिरासत केंद्र में रखा जा सकता है।
सचिन अवस्थी को 38 घंटे हिरासत में रखा गया
यह एडवायजरी उस घटना के बाद आई है, जिसमें सचिन अवस्थी और उनकी पत्नी को जेजू पहुंचने पर करीब 38 घंटे तक हिरासत में रखा गया और अंततः उन्हें महंगा वापसी टिकट लेकर लौटना पड़ा। अवस्थी ने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा कि इमिग्रेशन का निर्णय उनका अधिकार है, लेकिन उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए था। बता दें कि जेजू द्वीप दक्षिण कोरिया का एक विशेष स्वायत्त प्रांत है, जहां विदेशी पर्यटकों के लिए सीमित वीज़ा-फ्री प्रवेश की व्यवस्था है। हालांकि, इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए यात्रियों को सीधे किसी विदेशी देश से जेजू पहुंचना आवश्यक होता है; मुख्य भूमि दक्षिण कोरिया के रास्ते जाने पर वीज़ा अनिवार्य है।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


