आग से ना खेलें शुभेंदु अधिकारी, मुस्लिम नेता ने दी चेतावनी; कुरान का किया जिक्र

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पश्चिम बंगाल में कुर्बानी को लेकर बवाल: विधायक हुमायूं कबीर ने भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को दी 'आग से न खेलने' की चेतावनी। कुरान का हवाला देते हुए गोहत्या प्रतिबंध का किया कड़ा विरोध। जानें राज्य सरकार और हाईकोर्ट का क्या है रुख।

आग से ना खेलें शुभेंदु अधिकारी, मुस्लिम नेता ने दी चेतावनी; कुरान का किया जिक्र

पश्चिम बंगाल में ईद से पहले पशुओं की कुर्बानी और गोहत्या को लेकर एक नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और पश्चिम बंगाल के विधायक हुमायूं कबीर ने राज्य सरकार के हालिया प्रतिबंधों को खुली चुनौती दी है। कबीर ने दावा किया कि 'कुरान में कुर्बानी का आदेश है' और कहा कि प्रशासन धार्मिक प्रथाओं में दखलंदाजी कर रहा है।

'शुभेंदु अधिकारी को सीधी चेतावनी'

हुमायूं कबीर ने कुर्बानी के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को चेतावनी दी। कबीर ने कहा, "हम कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन कुर्बानी होकर रहेगी। कुरान में जो लिखा है, उसका पालन किया जाएगा। मैं शुभेंदु अधिकारी को सीधे तौर पर कहना चाहता हूं कि वह आग से न खेलें। यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। मुस्लिम समुदाय कुर्बानी के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा।"

'गाय, बकरी और ऊंट की कुर्बानी जारी रहेगी'

विधायक हुमायूं कबीर ने बंगाल सरकार द्वारा 1950 के पशु वध नियंत्रण अधिनियम के तहत जारी किए गए प्रतिबंधों को खारिज करते हुए कई बड़ी बातें कहीं। उन्होंने कहा, "सरकार मुसलमानों को बीफ न खाने का नियम बना सकती है, लेकिन अनुष्ठानिक कुर्बानी जारी रहेगी। हम किसी भी आपत्ति को नहीं सुनेंगे।"

कबीर ने इसे 1400 साल पुरानी परंपरा बताते हुए कहा कि जब तक दुनिया कायम है, गाय, बकरी और ऊंटों की कुर्बानी जारी रहेगी। सड़क पर नमाज अदा करने पर लगी पाबंदियों पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने मांग की कि ईद के लिए पर्याप्त जगह दी जाए। कबीर ने कहा, "अगर व्यवस्था नहीं की जाती है, तो सड़कों पर पूजा की भी अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।"

क्या है बंगाल सरकार का नियम और कोर्ट का रुख?

कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी गुरुवार को राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसमें बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के गाय या भैंस की हत्या पर रोक लगाई गई है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की पुरानी टिप्पणियों का हवाला देते हुए साफ कहा कि "गाय की कुर्बानी ईद-उल-जुहा के त्योहार का हिस्सा नहीं है और इस्लाम में यह कोई धार्मिक आवश्यकता नहीं है।" बता दें कि राज्य सरकार की 13 मई की अधिसूचना में खुले सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध को सख्त रूप से प्रतिबंधित किया गया है। नियम तोड़ने पर 6 महीने तक की जेल या 1,000 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

बीजेपी और अन्य नेताओं ने किया पलटवार

बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कबीर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला कानून लागू करने और अवैध बूचड़खानों को रोकने का है। वहीं, बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने दावा किया कि गोहत्या का इस्लाम से कोई संबंध नहीं है और यह केवल हिंदू समुदाय को ठेस पहुंचाने के लिए की जाती है।

फुरफुरा शरीफ के पीरजादा तोहा सिद्दीकी ने नीतियों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब भारत से बीफ एक्सपोर्ट को अनुमति है, तो एक आम आदमी को देश के भीतर कुर्बानी से क्यों रोका जा रहा है? उन्होंने इसे दोहरा मापदंड करार दिया।

बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने एक अलग राय रखते हुए मुसलमानों से गाय का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि गाय हिंदू धर्म में पूजनीय है, इसलिए इसकी कुर्बानी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की भी मांग की।

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Amit Kumar

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