बंगाल से ब्रिक्स तक आ गई खाने की बहस, राहुल गांंधी बोले- अपनी संस्कृति छिपाई जा रही
बंगाल से शुरू हुई शाकाहार और मांसाहार की बहस अब ब्रिक्स तक भी आ गई है। राहुल गांधी ने कहा कि केवल शाकाहारी भोजन परोसकर अपनी संस्कृति को छिपाने की कोशिश की गई है जबकि 80 फीसदी भारतीय मांसाहारी हैं।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान शनिवार को आयोजित आधिकारिक रात्रिभोज में सिर्फ शाकाहारी व्यंजन परोसे जाने को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच तीखी सियासी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस ने केंद्र पर अपनी भोजन संबंधी पसंद विदेशी राजनयिकों व राष्ट्राध्यक्षों पर थोपने और भारत की बहु-व्यंजन संस्कृति को छिपाने का आरोप लगाया। वहीं, पलटवार करते हुए भाजपा ने कहा, सम्मेलन की भारी सफलता से हताश विपक्ष के पास अब आलोचना करने के लिए खाने की थाली के सिवा कुछ नहीं बचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधियों के सम्मान में भव्य रात्रिभोज का आयोजन किया था, जिसमें केवल पारंपरिक शाकाहारी भारतीय व्यंजन परोसे गए।
राहुल गांधी ने छोले-भटूरे की तस्वीर साझा कर कसा तंज
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए पोस्ट में लिखा कि 80% भारतीय मांसाहारी हैं और भारतीय मांसाहारी खाना स्वादिष्ट होता है। उन्होंने लिखा कि मेरी बहन के बनाए छोले भटूरे भी स्वादिष्ट होते हैं। राहुल ने मेज पर रखी छोले-भटूरे की प्लेट की एक तस्वीर भी साझा की। उधर, कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि भारतीयों पर अपने खान-पान की पसंद थोपना भाजपा की पुरानी आदत है, जिसे अब उसने दुनियाभर से आए दिग्गज नेताओं तक पहुंचा दिया है।
रिजिजू बोले, कांग्रेस इस पर भी राजनतीति कर रही
कांग्रेस के इन हमलों पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘मुझे यकीन नहीं हो रहा कि कांग्रेस ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेन्यू पर राजनीति कर रही है। हमारे मेहमानों ने स्वाद व पोषण से भरपूर भारतीय शाकाहारी भोजन का आनंद लिया। इस मेन्यू में देश के अलग-अलग क्षेत्रों की समृद्ध परंपराएं शामिल थीं।’ वहीं, पार्टी प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कहा कि राहुल शादियों में मिलने वाले ‘नाराज फूफा’ वाली अपनी मानसिकता को अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले गए हैं। सवाल किया कि क्या कांग्रेस शासित राज्यों के सीएम रात्रिभोज में इसलिए शामिल नहीं हुए क्योंकि वहां उनकी पसंद का खाना नहीं परोसा गया था?
क्या था ब्रिक्स का मेनू, शुरुआत में...
खांडवी मिले-फ्यूईल : सरसों, नारियल और करी पत्ते से तड़का लगा स्टीम्ड बेसन रोल। इसे केसर आम, माइक्रो-ग्रीन्स और योगर्ट ड्रेसिंग के साथ तैयार किया गया।
खुंब गलौटी: पुदीने की मोतियों के साथ पैन-ग्रिल्ड नरम मशरूम कबाब। इसे पारंपरिक शीरमल ब्रेड पर परोसा गया।
खांडवी, खुंब गलौटी, ग्रिल्ड मशरूम कबाब
मुख्य भोजन में...
पनीर लबाबदार: टमाटर व मसालों की ग्रेवी में पकाया गया पनीर।
गुच्ची मरमीक: केसर, किशमिश और ममरा बादाम के साथ पकाया गया हिमालयन मोरेल मशरूम और कोमल शतावरी।
कैरट-बीन्स पोरियाल: दक्षिण भारतीय मसालों, ताजे नारियल तेल में गाजर तथा बीन्स का मिश्रण।
थक्काली बेल्ले सारू: टमाटर-करी पत्ते से बना तुअर दाल का ब्रॉथ
मिलेट पुलाव एवं रायता: बासमती चावल, पर्ल मिलेट (बाजरा) और भारतीय मसालों से तैयार पुलाव के साथ बीटरूट रायता।
मिठाई में: पुरानी दिल्ली की फ्रूट क्रीम विद जलेबी, शहतूत फिरनी
बंगाल से शुरू हुई बहस
आपको बता दें कि शाकाहारी-मांसाहारी की यह बहस हाल ही में बंगाल से शुरू हुई है। हिंदू धर्मगुरु और बागेश्वर पीठ के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हावड़ा में कथा के दौरान कहा कि दुर्गा पूजा पांडाल के आसपास मांसाहार वर्जित है और ऐसा करने वाले हिंदू नहीं पाखंडी हैं। इसके बाद बंगाल की परंपरा में मछली खाने को लेकर बवाल शुरू हो गया। कांग्रेस ने बागेश्वर बाबा के पोस्टर भी जलाए।


