बंगाल पुलिस ने नहीं मानी हाईकोर्ट की बात, TMC नेता जहांगीर खान को हाफ पैंट में पैदल घुमाया

लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता।
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Jahangir Khan: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सुर्खियों में रहे टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। हाल ही में गिरफ्तार किए गए टीएमसी नेता को खुलेआम पुलिस ने पैदल सड़कों पर घुमाया।

Jahangir Khan: कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में पुलिस हिरासत में आरोपियों को सार्वजनिक रूप से सड़कों पर घुमाने की प्रथा पर कड़ी आपत्ति जताई थी। कोर्ट में बंगाल पुलिस से रिपोर्ट भी तलब किया था। हालांकि इसके कुछ ही दिनों के बाद पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फालता में एक बार फिर ऐसा ही नजारा देखने को मिला। गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता जहांगीर खान को पुलिस ने फालता के विभिन्न इलाकों में पैदल घुमाया।

जहांगीर खान कभी खुद की तुलना फिल्मी किरदार पुष्पा से करते थे और खुद को बॉलीवुड के मशहूर विलेन गब्बर सिंह से प्रेरित बताते थे। उन्हें सोमवार को भारत-नेपाल सीमा पर उत्तर बंगाल के पानीटंकी से गिरफ्तार किया गया था। जबरन वसूली और अन्य गंभीर आरोपों के तहत जहांगीर के खिलाफ सात एफआईआर दर्ज हैं। मंगलवार को अदालत ने उन्हें पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। गुरुवार को सामने आए वीडियो और तस्वीरों में पुलिस जहांगीर खान को इलाके की सड़कों पर पैदल ले जाती हुई दिखाई दे रही है।

अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते हैं जहांगीर

जहांगीर खान को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता है। उन्होंने फालता विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में खुद को अलग कर लिया था। 21 मई को वहां हुए दोबारा मतदान से ठीक पहले से ही वे इस क्षेत्र से गायब थे। गौरतलब है कि पिछले महीने पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद से हिंसा, जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामलों में कई टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारियां हुई हैं, जिनमें से कई को उनके ही इलाकों में सार्वजनिक रूप से घुमाया गया है।

गिरफ्तार कर सकते हैं, बदनाम नहीं: HC

इस प्रथा को लेकर कानूनी और मानवाधिकारों का विवाद गहरा गया है। बीते 5 जून को कलकत्ता हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाने के आरोपों पर बंगाल पुलिस से तीन सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी थी। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि पुलिस के पास किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार तो है, लेकिन वे उसे सार्वजनिक रूप से बदनाम या अपमानित नहीं कर सकते।

क्या कहता है कानून?

यह विवाद आरोपियों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने और पुलिस की शक्तियों की कानूनी सीमाओं पर एक बार फिर बहस छेड़ चुका है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 43(3) के तहत पुलिस को केवल कुछ विशिष्ट और गंभीर श्रेणियों जैसे कि संगठित अपराध, आतंकवाद, हत्या, बलात्कार, मानव तस्करी और देश विरोधी अपराध में ही हथकड़ी या कड़े नियंत्रण के इस्तेमाल की अनुमति है। कानून स्पष्ट करता है कि अधिकारी परिस्थितियों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए ही ऐसा निर्णय ले सकते हैं।

कई हाईकोर्ट ने दिए हैं जांच के आदेश

इसी साल अप्रैल में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक आरोपी को पुलिस स्टेशन से अदालत ले जाते समय जानबूझकर पैदल घुमाने के आरोपों पर जांच के आदेश दिए थे। अदालत ने साफ किया था कि किसी भी व्यक्ति को अपमानित करने के इरादे से की गई कार्रवाई संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। जनवरी में राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी कहा था कि गिरफ्तार व्यक्तियों की तस्वीरें खींचना और उन्हें सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना सम्मान के साथ जीने के संवैधानिक अधिकार (Article 21) का संभावित उल्लंघन है।

अदालतों के सख्त रुख के बावजूद बंगाल की राजनीति और कानून व्यवस्था के बदलते दौर में आरोपियों के सार्वजनिक प्रदर्शन का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।

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Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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