बारुईपुर रेप: एक गोली फेफड़े में, दूसरी किडनी में लगी; प्रभाष मंडल एनकाउंटर की जांच करेगी CID
सुर्जापुर के दलदली इलाके में प्रभाष ने अचानक कैनिंग पुलिस सर्कल के प्रभारी रोनी सरकार की कमर से रिवॉल्वर छीन ली और भागने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों ने जब उसका पीछा किया तो प्रभाष ने कथित तौर पर पुलिस टीम पर एक राउंड गोली चलाई।

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में मंगलवार रात पुलिस मुठभेड़ में मारे गए दुष्कर्म और हत्या के मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल केस की जांच अब बंगाल पुलिस की सीआईडी (CID) को सौंप दी गई है। इस मामले में न्यायिक जांच पहले ही शुरू हो चुकी है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार रात करीब 12:45 बजे की है। जांच अधिकारी आरोपी प्रभाष मंडल को लेकर वारदात वाली जगह पर पहुंचे थे।
इसी दौरान कैनिंग थाना पुलिस सर्किल के इनचार्ज रनी सरकार आरोपी के बिल्कुल पास खड़े थे। पुलिस का दावा है कि प्रभाष ने अचानक रनी सरकार की कमर से सर्विस रिवॉल्वर छीन ली और भागने की कोशिश की। जब पुलिस अधिकारियों ने उसका पीछा किया तो प्रभाष ने पुलिस को निशाना बनाकर एक राउंड गोली चला दी। इसके बाद आत्मरक्षा और अपने सहयोगियों की जान बचाने के लिए बारुईपुर थाने के पीसी इनचार्ज अर्घ्य मंडल ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से प्रभाष पर जवाबी गोलीबारी की।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई खुलासे
आरोपी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी बड़े खुलासे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि भागने के प्रयास के दौरान प्रभाष को बेहद करीब से दो गोलियां मारी गई थीं। ये दोनों गोलियां उसकी पीठ की तरफ से शरीर के भीतर घुसीं और सामने से बाहर निकल गईं। एक जांच अधिकारी का कहना है कि प्रभाष के शरीर के भीतर कोई भी गोली या उसका टुकड़ा फंसा हुआ नहीं मिला है। एक गोली प्रभाष के दाहिने फेफड़े को चीरती हुई बाहर निकल गई, जबकि दूसरी गोली दाहिनी किडनी के पास से शरीर को पार कर गई।
सीआईडी के एक अधिकारी ने बताया, "सीआईडी की जांच मुख्य रूप से यह स्थापित करेगी कि क्या पुलिस द्वारा चलाई गई गोली वास्तव में आत्मरक्षा के लिए जरूरी थी या नहीं। बुधवार तड़के 12 साल की स्कूली छात्रा के साथ हुए जघन्य बलात्कार और हत्या के मामले में क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए प्रभाष को सुर्जापुर ले जाने वाले सभी छह पुलिसकर्मी सीआईडी टीम के सामने अपने बयान दर्ज कराएंगे।"
पश्चिम बंगाल पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि एनकाउंटर टीम में शामिल किसी भी पुलिसकर्मी को फिलहाल सस्पेंड नहीं किया जा रहा है। विभागीय पूछताछ और ब्रीफिंग के दौरान सब-इंस्पेक्टर अर्घ्य मंडल ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इस घटना की पूरी जानकारी दी थी।
रात के समय सीन रीक्रिएशन पर सफाई देते हुए पुलिसकर्मियों ने कहा कि वे आरोपी को दिन के उजाले में सुर्जापुर नहीं ले जाना चाहते थे क्योंकि वहां पहले ही भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या की एक घटना हो चुकी थी। स्थानीय लोगों का गुस्सा अभी थमा नहीं था। चूंकि अपराध भी रात के समय ही हुआ था इसलिए वे आरोपी की गतिविधियों के रास्ते को सटीक ढंग से समझना चाहते थे।
सीआईडी ने शुरू की फॉरेंसिक मैपिंग
गुरुवार सुबह सीआईडी की एक टीम ने सुर्जापुर में एनकाउंटर वाली जगह का दौरा किया। अधिकारी ने बताया, "हमने घटनास्थल की पूरी मैपिंग पूरी कर ली है। मौके से मिले खाली कारतूसों और पुलिस के हथियारों को बैलिस्टिक जांच के लिए भेज दिया गया है। हम अब अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह देखा जा सके कि मेडिकल निष्कर्ष हमारे फील्ड इन्वेस्टिगेशन से मेल खाते हैं या नहीं।"
चौथा आरोपी कबीर मोल्ला
इस जघन्य कांड के चौथे आरोपी कबीर मोल्ला को गुरुवार को बारुईपुर की स्थानीय अदालत में पेश किया गया। विशेष लोक अभियोजक बिभास चटर्जी ने अदालत के सामने दावा किया कि कबीर मोल्ला भी इस अपराध में उतना ही सीधे तौर पर शामिल था, जितने कि पहले से हिरासत में लिए गए अन्य दो आरोपी आनंद सरदार और दिवाकर सरदार थे। अदालत ने दलीलें सुनने के बाद कबीर मोल्ला को 20 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
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Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
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