बैंक ने खाते से काट लिए सिर्फ 20 रुपये, अब ग्राहक को मिला 15 हजार का मुआवजा; गलती की सजा
पंजाब में बैंक खाते से गलत तरीके से 20 रुपये काटने का मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। बैंक ने रकम बाद में लौटाई, लेकिन आयोग ने ग्राहक को हुई परेशानी और मुकदमेबाजी के लिए 15 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया।

पंजाब में एक ग्राहक के बैंक खाते से उसकी सहमति के बिना 20 रुपये काटना बैंक को भारी पड़ गया। उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए बैंक को ग्राहक को 15 हजार रुपये मुआवजे और मुकदमेबाजी की लागत के तौर पर भुगतान करने का निर्देश दिया। आयोग ने माना कि खाते से गलत तरीके से काटी गई रकम समय पर वापस नहीं की गई और ग्राहक को अपनी शिकायत के समाधान के लिए बैंक का रुख करने के साथ उपभोक्ता आयोग तक जाना पड़ा।
पीएम सुरक्षा बीमा योजना के नाम पर कटे थे 20 रुपये
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसका बैंक में सेविंग्स अकाउंट था। आरोप था कि उसकी लिखित या मौखिक सहमति के बिना प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) के लिए उसके खाते से 20 रुपये काट लिए गए।
उसने कहा कि उसने इस बीमा योजना में नामांकन के लिए कभी मंजूरी नहीं दी थी। उसके मुताबिक, न तो कोई मैंडेट फॉर्म दिया गया था, न हस्ताक्षरित अनुमति और न ही डिजिटल सहमति ली गई थी।
ग्राहक ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार बताते हुए उपभोक्ता आयोग का रुख किया। उसने 20 रुपये वापस करने के साथ 50 हजार रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
बैंक ने माना- रकम काटी गई थी
सुनवाई के दौरान बैंक ने खाते से 20 रुपये काटे जाने की बात स्वीकार की। बैंक ने आयोग को बताया कि बाद में 20 रुपये ब्याज के साथ ग्राहक को वापस कर दिए गए।
बैंक के अनुसार, रकम कटना सिस्टम में हुई अनजाने में हुई गलती थी और इसके पीछे कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था। बैंक ने ग्राहक को लिखित तौर पर रकम वापस किए जाने की जानकारी दी और गलती के लिए माफी भी मांगी।
आयोग ने कहा- सिर्फ बाद में पैसा लौटाना काफी नहीं
उपभोक्ता आयोग ने माना कि बैंक की ओर से सेवा में कमी हुई है। आयोग ने कहा कि गलत तरीके से काटी गई रकम तुरंत वापस नहीं की गई और शिकायतकर्ता को इसे ठीक कराने के लिए बैंक से संपर्क करना पड़ा।
आयोग ने कहा कि बैंकिंग संस्थान से ग्राहकों के खातों को सही तरीके से बनाए रखने और किसी भी गलत डेबिट को तुरंत ठीक करने की उम्मीद की जाती है। आयोग के मुताबिक, बाद में रकम वापस करने और माफी मांगने से बैंक की हुई गलती पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती।
मामले से क्या सामने आया?
- ग्राहक के खाते से बिना सहमति 20 रुपये काटे गए।
- बैंक ने बाद में यह रकम ब्याज के साथ वापस कर दी।
- बैंक ने इसे सिस्टम की अनजाने में हुई गलती बताया।
- ग्राहक को रकम वापस पाने के लिए शिकायत करनी पड़ी।
- उपभोक्ता आयोग ने बैंक की सेवा में कमी मानी।
- बैंक को 15 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमेबाजी की लागत देने का निर्देश दिया।
ग्राहक को मानसिक परेशानी भी हुई
आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बैंक को ग्राहक को कुल 15 हजार रुपये देने का निर्देश दिया। इसमें मुकदमेबाजी की लागत के साथ देरी से भुगतान और ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा शामिल है।


