भारत हस्तक्षेप नहीं कर सकता लेकिन... बांग्लादेश हिंसा पर शशि थरूर की केंद्र सरकार को राय
बांग्लादेश में जारी हिंसा और हिंदू युवा दीपू चंद्र की नृशंस हत्या को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मोदी सरकार को सलाह दी है। उन्होंने कहा कि भारत पड़ोसी देश के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, लेकिन बांग्लादेश निर्माण में मदद करने वाले देश के रूप में कूटनीति का प्रयोग कर सकता है।

बांग्लादेश में एक हिंदू युवक की नृशंस हत्या के बाद पूरे भारत में इसके खिलाफ एक रोष की लहर है। इसी बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बांग्लादेश में जारी इस हिंसा पर भारत की भूमिका की चर्चा की। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह बांग्लादेश सरकार को अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा पर लगाम लगाने के लिए रचनात्मक कदम उठाने के लिए मनाने की कोशिश करे।
केरल से कांग्रेस सांसद थरूर से बांग्लादेश की जनता के बीच बढ़ रही भारत विरोधी बयानबाजी और हिंदूओं के खिलाफ अत्याचारों पर भारत सरकार के विकल्पों के बारे में पूछा गया। इसके जवाब में थरूर ने तर्क दिया कि एक पड़ोसी देश होने के नाते भारत बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है, लेकिन एक ऐसे देश के नाते, जिसने बांग्लादेश के राष्ट्र निर्माण के लिए कई तरह से मदद की हो, वह ढाका को कूटनीतिक प्रभाव के जरिए कुछ करने के लिए प्रभावित कर सकता है।
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए थरूर ने कहा, "भारत किसी भी पड़ोसी देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं दे सकता। लेकिन एक ऐसे देश के रूप में जिसने बांग्लादेशी राष्ट्र और वहां के लोगों के लिए कई तरह से योगदान दिया हो, उनकी मदद की हो, हम निश्चित रूप से ढाका में अपने कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि यूनुस सरकार को रचनात्मक कदम उठाने के लिए राजी किया जा सके।"
कांग्रेस सांसद ने कहा कि शेख हसीना के सत्ता से जाने के बाद भारत सरकार ने बांग्लादेश की स्थिति से निपटने के लिए बेहतर काम किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार को पूर्वी पड़ोसी देश में एक समावेशी लोकतंत्र को स्थापित करने की दिशा में काम कर रही ताकतों का भी समर्थन करना चाहिए।
आपको बता दें, बांग्लादेश में हिंसा का यह दौर एक स्टूडेंट लीडर हादी की मौत के बाद शुरू हुआ। इस्लामिक कट्टरपंथियों की गुस्साई भीड़ में किसी ने यह अफवाह फैला दी कि कपड़ा फैक्ट्री में काम करने वाले एक हिंदू युवा ने ईश निंदा की है। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला और फिर उसके शव के एक पेड़ से लटकाकर जला दिया। इस घटना के समय वहां पर सैकड़ों लोग मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी उसे बचाने की कोशिश नहीं की।
सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होते ही भारत में भी आक्रोश फैल गया। बड़े पैमाने पर इसका विरोध देखने को मिला। नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ।

लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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