बांग्लादेश में जानबूझकर भड़काई गई हिंसा? भारत विरोधी माहौल बनाने के पीछे कहीं ये वजह तो नहीं
बंगलादेश में गुरुवार देर रात हिंसा भड़क उठी है और शुक्रवार सुबह भीड़ ने ढाका और कई अन्य शहरों में उत्पात मचाया। सिंगापुर इंकलाब मंच आंदोलन के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद लोगों ने भारत विरोधी नारे भी लगाए हैं।
बांग्लादेश में भारतीय मिशनों पर भीड़ के हालिया हमलों के बाद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले साल शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में भारत विरोधी माहौल पनप रहा है। कट्टरपंथी इस्लामिक गुटों ने भारत के खिलाफ लगातार बयानबाजी की है। वहीं मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार माहौल को शांत करने की कोशिश में पूरी तरह विफल रही है। ऐसे में जब देश में एक बार फिर हालात बेकाबू हो गए हैं, तो मु. यूनुस की मंशा पर सवाल उठने लाजमी हैं। सूत्रों ने दावा किया है कि भारत के खिलाफ हालिया प्रदर्शनों के पीछे बड़ा खेल है। जानकारों का कहना है कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई है, बल्कि एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है, ताकि डर और अस्थिरता का माहौल बना कर आने वाले चुनावों को टाला जा सके।
बता दें कि बंगलादेश में गुरुवार देर रात से शुक्रवार सुबह तक जबरदस्त हिंसा देखने को मिली। भीड़ ने ढाका और कई अन्य शहरों में उत्पात मचाया है। यह हिंसा कथित तौर पर बीते साल छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की है। देश के विभिन्न हिस्सों में गुरुवार रात को हमलों और तोड़फोड़ की कई घटनाएं हुईं, जिनमें चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायुक्त के आवास पर पत्थरबाजी भी शामिल है। वहीं प्रमुख अखबारों के दफ्तरों पर भी हमले हुए हैं जहां पत्रकार कई घंटे फंसे रहें।
भारत विरोधी बयानबाजी
बांग्लादेश में हालिया हिंसा तब भड़की है जब बीते दिनों कई नेताओं ने भारत के खिलाफ जमकर बयानबाजी की है। बीते दिनों बांग्लादेश की नेशनल सिटीजन पार्टी के नेता हसनत अब्दुल्ला ने भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्यों को अलग-थलग करने और अलगाववादी समूह को शरण देने की धमकी दी थी। यही नहीं भारत अंतरिम सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार ने भी खुलेआम भारत विरोधी बयान दिया। उन्होंने कहा कि बगैर बांग्लादेशी समर्थन के भारत कभी भी पाकिस्तान को 1971 के युद्ध में नहीं हरा पाता। यह घटनाएं एक सिलसिलेवार क्रम में हुई हैं, जो किसी सुनियोजित साजिश से कम नहीं लगतीं।
चुनाव टालने की कोशिश?
जमीनी हालात पर नजर रखने वाले कुछ सूत्रों ने न्यूज 18 को बताया है कि बांग्लादेश में यह हिंसा अचानक नहीं, बल्कि मैनेज्ड तरीके से फैलाई जा रही है, ताकि डर और अस्थिरता का माहौल बनाया जा सके। सूत्रों के मुताबिक, इसका मकसद चुनाव को असुरक्षित दिखाना और उसे टालने की जमीन तैयार करना हो सकता है। इससे ग्राउंड पर मौजूद कट्टरपंथी ताकतों को अपना असर बढ़ाने का मौका मिल रहा है। सूत्रों ने कहा कि मौजूदा हालात का इस्तेमाल यह नैरेटिव बनाने में किया जा रहा है कि ऐसे समय मत चुनाव कराना सुरक्षित नहीं है। इससे चुनाव में देरी की गुंजाइश बनाई जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि पुतले जलाना, नारेबाजी और भारत की कूटनीतिक इमारतों को निशाना बनाना इस अशांति को अंतरराष्ट्रीय रूप देने की कोशिश का हिस्सा है। सूत्रों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हिंसा केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी प्लानिंग हो सकती है।


लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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