BRICS में हिस्सा ना लेकर पछता रहे तारिक रहमान? भारत से संबंध सुधारने को छटपटाने लगा बांग्लादेश

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ब्रिक्स में ना आने को लेकर बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान ने तरह-तरह के बहाने बताए। यहां तक कहा गया कि प्रधानमंत्री के तौर पर उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया है। वहीं अब भारत की हनक देखकर वह संबंध सुधारने के लिए छटपटाने लगा है।

Tarique Rahman
BRICS में शामिल ना होकर पछता रहे बांग्लादेशी पीएम?

बांग्लादेश ने रविवार को कहा कि वह भारत के साथ अपने रिश्तों को फिर से सुधारना चाहता है और आपसी हितों के आधार पर नए द्विपक्षीय संबंध बनाना चाहता है। विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर का यह बयान बांग्लादेश के उस ऐलान के दो दिन बाद आया है, जिसमें गुरुवार को कहा गया था कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे, क्योंकि उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था।

निमंत्रण पाकर भी नहीं आए तारिक रहमान

इसके बजाय निमंत्रण बिम्सटेक के अध्यक्ष को भेजा गया था। दो दिन तक चला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ। भारत ने रहमान को ‘बहुक्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल’ (बिम्सटेक) के अध्यक्ष के तौर पर शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था, जबकि फरवरी से ही उन्हें एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण भी भेजा जा चुका था। कबीर ने यहां पत्रकारों से कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से शुरू करना चाहता है। उन्होंने कहा कि हम एक नए रिश्ते की ओर बढ़ना चाहते हैं, और यह काम द्विपक्षीय बातचीत के जरिए होना चाहिए, न कि किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए।

दो दिन तक चला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ। भारत ने रहमान को 'बहुक्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल' (बिम्सटेक) के अध्यक्ष के तौर पर शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था, जबकि फरवरी से ही उन्हें एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण भी भेजा जा चुका था।

कबीर ने यहां पत्रकारों से कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को "नए सिरे से शुरू" करना चाहता है। उन्होंने कहा, "हम एक नए रिश्ते की ओर बढ़ना चाहते हैं, और यह काम द्विपक्षीय बातचीत के जरिए होना चाहिए, न कि किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए।" अगस्त 2024 में युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन में सत्ता से हटाए जाने के बाद हसीना भारत चली आई थीं। नई दिल्ली द्वारा उन्हें शरण दिए जाने के कारण भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव आ गया है।

कबीर ने कहा कि बांग्लादेश को भारत के साथ अपने "अत्यधिक पूर्वाग्रह" से आगे बढ़कर नई दिल्ली के साथ अपने रिश्तों को संतुलित तरीके से देखना चाहिए। उन्हें आपसी हितों पर ध्यान देना चाहिए और इसे दूसरे देशों के साथ अपने व्यापक संबंधों का ही एक हिस्सा मानना ​​चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें भारत पर अधिक ध्यान केंद्रित करने से बाहर निकलना होगा। भारत भी एक सामान्य देश है और बांग्लादेश उसके साथ अच्छे द्विपक्षीय संबंध चाहता है।"

एक सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा, "भारत में नाश्ता, भारत में लंच, भारत में डिनर -- तो फिर आप अपना खाना कब खाएंगे?" उनका इशारा इस बात पर था कि हर वक्त भारत के बारे में सोचेंगे तो बांग्लादेश अपने मुद्दों पर कब ध्यान देगा। कबीर ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री रहमान 21 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क रवाना होंगे और 26 सितंबर तक वहीं रहेंगे। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान रहमान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बैठक की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ऐसी बैठकें अक्सर बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान आखिरी समय में तय की जाती हैं।

Ankit Ojha

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Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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