बांग्लादेश की इस सीट पर 25 साल से था हिंदुओं का कब्जा, हार गए जमात के एक मात्र हिंदू प्रत्याशी
बांग्लादेश की खुलना-1 सीट पर पिछले 25 सालों से हिंदू प्रत्याशी ही जीतते थे। इस बार जमात ने हिंदू चेहरे को अपना प्रत्याशी बनाया था। हालांकि बीएपी के एजाज खान ने उन्हें हराया था।

बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव में बांग्लादेश राष्ट्रवादी नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) दो तिहाई बहुमत से जीत के करीब है। पार्टी ने जीत का ऐलान करते हुए तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनाने का दावा कर दिया है। तारिक रहमान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं और वह 17 साल के निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे हैं। दूसरी तरफ कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के अगुआई वाले गठबंधन की हालत खराब है। उसके खाते में 50 सीटें जाती हुई भी नहीं दिख रही हैं। जमात ने केवल एक हिंदू प्रत्याशी को टिकट दिया था जो कि हार गए हैं।
कृष्ण नंदी खुलना-1 सीट से उतरे ते। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी अमीर एजाज खान बीएनपी के उम्मीदवार थे। एजाज खान ने कुल 121,352 वोट हासिल करके जीत दर्ज कर ली है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक इस क्षेत्र के कुल 120 केंद्रों पर चुनाव करवाए गए थे। जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार को केवल 70346 वोट मिले हैं। इससे पहले इस सीट पर नोनी गोपाल मंडल सांसद थे।
खुलना -1 सीट का इतिहास
2001 में इस सीट पर पंचानन विश्वास ने जीत दर्ज की थी जो कि आवामी लीग के उम्मीदवार थे। इसके बाद 2008 में शेख हसीना की पार्टी के नोनी गोपाल मंडल जीते। 2014 और 2018 में पंचानन विश्वास की फिर वापसी हुई। 2024 के बाद सारे समीकरण बदल गए। अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया गया और कट्टरपंथी ताकतों को बल मिला।
36 साल में पहली बार होंगे पुरुष प्रधानमंत्री
बीएनपी की जीत के बाद तारिक रहमान बांग्लादेश के 36 साल में पहले पुरुष प्रधानमंत्री होंगे। बीएनपी की केंद्रीय चुनाव संचालन समिति के प्रवक्ता महदी अमीन ने शुक्रवार तड़के संवाददाताओं से कहा, ''हम दो-तिहाई से अधिक सीट जीतकर सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त हैं।'' करीब 17 वर्ष के आत्मनिर्वासन के बाद पिछले साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटे रहमान ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से विजय रैलियां निकालने के बजाय दोपहर में 'जुमे' की नमाज के बाद पूरे देश में विशेष दुआएं करने को कहा।
निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रतिशत का आंकड़ा अभी घोषित नहीं किया है। उसने मतदान केंद्रों में मतदाताओं की मौजूदगी को लेकर हेरफेर के आरोपों को खारिज किया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ए एम एम नासिरुद्दीन ने बृहस्पतिवार शाम एक संवाददाता से कहा, ''पिछले चुनावों में भी मतदान प्रतिशत को लेकर बहस होती रही है। कृपया अब इसे लेकर सवाल न उठाएं।'' उन्होंने कहा कि रुझान में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है क्योंकि कई हजार मतदान केंद्रों से नतीजे अलग-अलग समय पर आते हैं।
निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने पहले कहा था कि बृहस्पतिवार को 42,651 मतदान केंद्रों में से 36,031 पर अपराह्न दो बजे तक 47.91 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। देश भर में 300 में से 299 संसदीय सीट पर मतदान बृहस्पतिवार सुबह साढ़े सात बजे (स्थानीय समयानुसार) शुरू हुआ और शाम साढ़े चार बजे तक जारी रहा। एक निर्वाचन क्षेत्र में एक उम्मीदवार की मृत्यु होने के कारण मतदान रद्द कर दिया गया था। मतदान 4:30 बजे (स्थानीय समय) समाप्त होने के तुरंत बाद मतों की गिनती शुरू हो गई। निर्वाचन आयोग ने चुनाव के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे और लगभग 10 लाख सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था जो देश के चुनावी इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी तैनाती है।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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