मां की अंतिम यात्रा के लिए सिर्फ 5 घंटे की परोल, रोते हुए मंदिर पहुंचे बांग्लादेश के हिंदू संत चिन्मय दास

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बांग्लादेश की अदालत ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को उनकी मां के निधन पर अंतिम संस्कार के लिए भी केवल पांच घंटे का वक्त दिया। उनका वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह मंदिर में बिलखते हुए देखे जा सकते हैं।

बांग्लादेश में बेबुनियाद आरोपों में जेल में बंद हिंदू अधिकार कार्यकर्ता और इस्कोन के संत चिन्मय कृष्ण दास को मां के अंतिम संस्कार के लिए केवल पांच घंटे की परोल दी गई। जिस मां की लोरियां सुनकर चिन्मय दास को कभी नींद आया करती रही होगी, अंतिम समय में वह उनके पास भी नहीं रह पाए। उन्होंने कई बार मां से मिलने के लिए परोल की कोशिश की लेकिन क्रूर अदालत ने अंतिम समय में भी उन्हें मां से मिलने नहीं दिया। जानकारी के मुताबिक चिन्मय दास की मां को कैंसर था। वह अंतिम दिनों में अस्पताल में नहीं रहना चाहती थीं। उनकी इच्छा थी कि वह अंतिम समय में अपने बेटे के आश्रम में रहें।

क्रूरता की हदें तो तब पार हो गईं जब चिन्मय दास को मां की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए भी केवल पांच घंटे का वक्त दिया गया। इस दौरान वह इस्कोन मंदिर में दर्शन करने भी पहुंचे। मंदिर में वह बेहद भावुक हो गए और रो पड़े। वहीं मां के अंतिम संस्कार के लिए पूरे दिन की भी परोल ना देकर बांग्लादेशी कोर्ट ने भी हिंदू विरोधी मानसिकता का प्रदर्शन कर दिया।

रोते हुए मंदिर पहुंचे चिन्मय दास

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि चिन्मय कृष्ण दास फूट-फूटकर रो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक उनकी मां लंबे समय से बीमार थीं। चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश में हिंदुओं के अधिकारों के लिए काम करते हैं। वहीं बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार हटने और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनने के बाद खुलकर हिंदुओं पर हमले किए गए। इसी बीच एक वकील ने उनके खिलाफ देश द्रोह का झूठा केस दर्ज करवा दिया। चिन्मय दास को जेल भेज दिया गया।

मां से मिलने को नहीं मिली परोल

चिन्मय दास ने कई बार जमानत याचिका दायर करवाई लेकिन हर बार इसे खारिज कर दिया गया। नवंबर 2024में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उन पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन देखने को मिले और सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था।

'द डेली स्टार' अखबार की खबर के अनुसार, चटगांव के जिला उपायुक्त मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने दास के परिवार की ओर से दिए गए आवेदन के बाद गुरुवार दोपहर हिंदू संत को पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया गया था। दास की 70 वर्षीय मां संध्या रानी धर का हथजारी स्थित एक अस्पताल में इलाज चल रहा था और गुरुवार सुबह उनका निधन हो गया।

Ankit Ojha

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विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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