VIDEO: पहलगाम हमले की कीमत चुका रहा पाकिस्तान, एक साल बाद भी बंद हैं बगलीहार डैम के सभी गेट

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, रामबन
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पहलगाम हमले के बाद एक साल से बंद बगलिहार डैम के गेट भारी बारिश और चिनाब नदी के उफान के चलते खोलने पड़े हैं। जानिए सिंधु जल समझौते और इस खबर की पूरी सच्चाई

VIDEO: पहलगाम हमले की कीमत चुका रहा पाकिस्तान, एक साल बाद भी बंद हैं बगलीहार डैम के सभी गेट

जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में चिनाब नदी पर स्थित बगलीहार बांध के सभी गेट अभी भी पूरी तरह से बंद हैं। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 'सिंधु जल संधि' को निलंबित कर दिया था। इस निलंबन को लागू हुए अब एक साल बीत चुका है। सिंधु जल संधि को लेकर भारत सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद स्थगित की गई यह अहम जल-बंटवारा संधि अभी भी ठंडे बस्ते में है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत ही दोनों देशों के बीच सिंधु, चिनाब, झेलम आदि नदियों के पानी का बंटवारा होता है।

बांध के गेटों का लगातार बंद रहना इस बात को साफ तौर पर दर्शाता है कि संधि के निलंबन का इस क्षेत्र के जल प्रबंधन और पनबिजली संचालन पर कितना गहरा और निरंतर प्रभाव पड़ा है। चिनाब नदी पर बनी यह महत्वपूर्ण 'बगलीहार पनबिजली परियोजना' आतंकी हमले के बाद लिए गए इस कड़े फैसले के बाद से ही लगातार कड़ी निगरानी में रखी गई है।

बगलिहार डैम के गेट क्यों बंद रखे गए हैं?

समझौता निलंबित करने के बाद, भारत ने पाकिस्तान की तरफ जाने वाले पानी के बहाव को रोकने और कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए चिनाब नदी पर बने बगलिहार डैम के सभी मुख्य गेट बंद कर दिए थे। खबर के मुताबिक, इस बात को एक साल बीत चुका है, लेकिन भारत का रुख अब भी सख्त है। सिंधु जल समझौता अभी भी निलंबित है और बगलिहार डैम के गेट आधिकारिक तौर पर बंद ही रखे गए हैं।

बारिश के कारण गेट खोले थे

भले ही डैम के गेट पिछले एक साल से बंद हैं, लेकिन हाल ही में रामबन और आसपास के इलाकों में बहुत भारी बारिश हुई है। इस मूसलाधार बारिश के कारण चिनाब नदी का जलस्तर अचानक खतरे के निशान की तरफ बढ़ने लगा। डैम की सुरक्षा को बनाए रखने और अतिरिक्त पानी के दबाव को कम करने के लिए, प्रबंधन को डैम के गेट कुछ समय के लिए खोले थे। फिर बंद कर दिए गए।

क्या है सिंधु जल प्रणाली और 1960 की संधि?

सिंधु जल प्रणाली में मुख्य रूप से छह नदियां शामिल हैं: सिंधु (Indus), झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलज। इस बेसिन के पानी का मुख्य रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारा होता है, जबकि इसका एक बहुत छोटा हिस्सा चीन और अफगानिस्तान से भी जुड़ा है।

1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे को लेकर 'सिंधु जल संधि' पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

पूर्वी नदियां (भारत का पूर्ण अधिकार): संधि के तहत तीन पूर्वी नदियों - रावी, सतलज और ब्यास का पूरा पानी भारत को विशेष रूप से उपयोग करने के लिए आवंटित किया गया था। इन नदियों में औसतन लगभग 33 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी रहता है।

पश्चिमी नदियां (पाकिस्तान का मुख्य अधिकार और भारत के सीमित अधिकार): पश्चिमी नदियों - सिंधु, झेलम और चिनाब - जिनका औसत जलप्रवाह लगभग 135 MAF है, का पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था। हालांकि, भारत को इन नदियों के पानी का घरेलू, गैर-उपभोगी और कृषि कार्यों के लिए सीमित उपयोग करने का अधिकार मिला हुआ है।

पनबिजली उत्पादन का अधिकार

संधि के तहत भारत को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) पर 'रन-ऑफ-द-रिवर' (RoR) परियोजनाओं के माध्यम से पनबिजली उत्पन्न करने का अधिकार भी दिया गया है। ये परियोजनाएं डिजाइन और संचालन के विशिष्ट नियमों और मानदंडों के अधीन होती हैं।

भारत की प्रमुख जल उपयोग परियोजनाएं

भारत को पूर्वी नदियों (रावी, सतलज, ब्यास) का जो पानी आवंटित किया गया है, उसका शत-प्रतिशत और प्रभावी उपयोग करने के लिए भारत सरकार ने कई बड़े और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे विकसित किए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • सतलज नदी पर भाखड़ा बांध
  • ब्यास नदी पर पोंग और पंडोह बांध
  • रावी नदी पर थीन (रणजीत सागर) बांध

इन विशाल जल-भंडारण परियोजनाओं के अलावा 'ब्यास-सतलज लिंक', 'माधोपुर-ब्यास लिंक' और 'इंदिरा गांधी नहर परियोजना' जैसी अहम नहर प्रणालियों ने भारत को अपनी पूर्वी नदियों के पानी का अधिकतम और सुचारू उपयोग करने में मदद की है।

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लेखक के बारे में

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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