'उनके कारनामे कैसे रहे हैं', कंगना रनौत पर भड़के रामदेव; बीजेपी को भी दे दी नसीहत
युवाओं को गटरछाप वाली टिप्पणी को लेकर कंगना रनौत पर बाबा रामदेव ने कहा कि मैं ऐसे लोगों की बात नहीं करना चाहता।उन्होंने कहा की पार्टी को ऐसे लोगों के बारे में संज्ञान लेना चाहिए।

गटरछाप बताने वाली बीजेपी सांसद कंगना रनौत पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें अपने कारनामे देखने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी को नसीहत दी और कहा कि ऐसे लोगों पर पार्टी को ऐक्शन लेना चाहिए। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी रामदेव ने आंदोलन की धमकी देते हुए कहा था शिक्षा व्यवस्था की हालत बेहद खराब है और भर्तियों में घाटोले हो रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर अराजकता का वह समर्थन नहीं करते हैं।
कंगना के जीवन पर कर दिया सवाल
एक न्यूज चैनल पर इंटरव्यू के दौरान जब उनसे सवाल किया गया कि आप कहते हैं कि Gen-Z से संवाद होना चाहिए। दूसरी तरफ बीजेपी की सांसद उन्हें गटरछाप जनरेशन कहती हैं। इसपर रामदेव ने कहा, उनका बचपन कैसा रहा है, उनकी जवानी कैसी रही है। उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं। मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के जवान को गटर बोलना, बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। इसपर पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।
गुनाहों पर कोई लीपापोती नहीं
रामदेव ने भड़कते हुए कहा, अगर कोई मेरी प्रशंसा करे या फिर योग की प्रशंसा करे तो उनके गुनाहों पर लीपापोती कर दूं। किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय की बात हो। युवा कोई जाति नहीं हैं।इनमें सबके बालक हैं। युवा अपने आप में बहुत बड़ी ताकत है। इसको कोई नकार नहीं सकता।
आपको बता दें कि सीजेपी के प्रोटेस्ट के दौरान लोकसभा में कंगना रनौत ने प्रदर्शनकारी लड़कियों को गटरछाप कहते हुए उनके चरित्र पर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद विपक्ष ने इसका विरोध भी किया। हालांकि कंगना पीछे नहीं हटीं और उन्होंने फिर कहा कि कॉकरोच तो गटर से ही निकलते हैं।
योग गुरु रामदेव ने धर्मांतरण और धार्मिक भेदभाव से जुड़े मुद्दों पर कहा है कि सनातन संस्कृति और धर्म अत्यंत प्राचीन है और इसमें ऐसी कोई कमी नहीं है, जिसके कारण किसी को मुस्लिम या ईसाई बनने की आवश्यकता पड़े। उन्होंने धार्मिक विवादों से ऊपर उठकर शिक्षा, चिकित्सा, कृषि और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के लिए इन व्यवस्थाओं का उन्नत होना आवश्यक है।
महबूबा मुफ्ती के 'दिमागी नक्सली हूं' वाले बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में बाबा रामदेव ने कहा कि वह राजनीतिक बयानों के पचड़े में नहीं पड़ना चाहते। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बौद्धिक दृष्टि से वितंडा और अराजकता फैलाने का प्रयास करते हैं। लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने की आजादी है, लेकिन इस आजादी का इस्तेमाल देश की बर्बादी के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने बौद्धिक अराजकता को ठीक नहीं बताया।
उन्होंने कहा कि न हिंदू धर्म खतरे में है, न मुस्लिम और न ही ईसाई धर्म। देश को धार्मिक मुद्दों में उलझने के बजाय आर्थिक मजबूती की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। भारत की अर्थव्यवस्था को श्रेष्ठ बनाने पर फोकस होना चाहिए और भारत का रुपया डॉलर के बराबर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अमेरिका, चीन और रूस के बराबर सम्मान और दर्जा मिलना चाहिए।


