मोदी दुनिया के सबसे ताकतवर नेता, तानाशाही की बातें बकवास; पूर्व AUS पीएम ने बताया भारत का सच
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम टोनी एबॉट ने 'रायसीना डायलॉग' की सराहना करते हुए पीएम मोदी के नेतृत्व को सराहा है। उन्होंने भारत को 'तानाशाह' देश बताने वाले पश्चिमी दावों को 'पूरी तरह से बकवास' करार दिया।

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर तारीफ की है और उन दावों को सिरे से खारिज किया है जिनमें कहा जाता है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शासन में भारत एक 'तानाशाही' या सत्तावादी देश बनता जा रहा है। एबॉट ने इन दावों को पूरी तरह से बकवास करार दिया है।
रायसीना डायलॉग: दावोस और चीन के फोरम से कहीं बेहतर
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित 'रायसीना डायलॉग' में हिस्सा लेने के बाद, टोनी एबॉट ने अपने अनुभव शेयर करते हुए एक लेख लिखा है, जिसका शीर्षक 'What Davos Should Be' यानी 'दावोस को कैसा होना चाहिए' है। इस लेख में उन्होंने रायसीना डायलॉग को विश्व आर्थिक मंच (दावोस) से बेहतर बताया है और भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की सराहना की है। एबॉट का मानना है कि यह स्विट्जरलैंड के 'दावोस' सम्मेलन से बेहतर है क्योंकि यह केवल राजनीतिक रूप से सही दिखने वाले धनकुबेरों का जमावड़ा नहीं है। साथ ही, यह चीन के 'बोआओ फोरम' से भी बेहतर है क्योंकि यह सिर्फ मेजबान सरकार की चापलूसी या महिमामंडन का मंच नहीं है। एबॉट ने बताया कि वे महामारी के दौरान इस डायलॉग में वर्चुअली शामिल हुए थे और 2022 से व्यक्तिगत रूप से इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
पीएम मोदी की विनम्रता और नेतृत्व की तारीफ
टोनी एबॉट ने लिखा कि 2016 से हर साल मार्च में दिल्ली में रायसीना डायलॉग आयोजित होता है। इस वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री मोदी हमेशा एक आदर्श स्थापित करते हैं। एबॉट के मुताबिक, 'अमेरिका और चीन के राष्ट्रपतियों के बाद, मोदी संभवतः दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हैं लेकिन उनमें जरा भी अहंकार नहीं है। वे न केवल नेतृत्व करना जानते हैं, बल्कि दूसरों को सुनना भी जानते हैं।'
प्रधानमंत्री मोदी के बारे में बात करते हुए टोनी एबॉट ने लिखा है कि पीएम मोदी हर साल डायलॉग के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि को सुनने के लिए मौजूद रहते हैं, जैसे पिछले साल न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री और इस साल फिनलैंड के राष्ट्रपति को सुनने आए थे, लेकिन वे खुद वहां भाषण नहीं देते। एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बावजूद पीएम मोदी सत्ता के अहंकार से दूर हैं, जिसे एबॉट उनके शुरुआती जीवन में 'हिंदू संन्यासी' होने से जोड़कर देखते हैं।
भारत में तानाशाही की बात बकवास
पश्चिमी देशों के कुछ वर्गों द्वारा भारत को एक सत्तावादी देश बताने के नैरेटिव पर कड़ा प्रहार करते हुए एबॉट ने लिखा- यह धारणा कि भाजपा के अधीन भारत किसी तरह एक सत्तावादी राष्ट्र बन गया है- यह पूरी तरह से बकवास है। कोई भी देश जहां स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होते हों, मीडिया पूरी तरह से स्वतंत्र हो और न्यायपालिका मजबूती से काम कर रही हो, वहां तानाशाही का कोई गंभीर खतरा नहीं हो सकता।
खुले और स्वतंत्र मंच के रूप में रायसीना डायलॉग
एबॉट ने रायसीना डायलॉग की स्वतंत्रता की मिसाल देते हुए कहा कि कोई भी तानाशाही सरकार ऐसे वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी नहीं कर सकती जहां किसी भी विषय पर बात करने की मनाही न हो और किसी की आवाज को दबाया न जाता हो। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह मंच इतना खुला है कि इस साल के डायलॉग में एक ही मंच से इजरायल के विदेश मंत्री (वर्चुअल रूप से) और ईरान के उप-विदेश मंत्री, दोनों ने अपनी बातें रखीं।
'ग्लोबल साउथ' और भारत का यथार्थवाद
लेख में कहा गया है कि चूंकि यह आयोजन भारत में होता है, इसलिए इसमें 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) पर काफी जोर दिया जाता है। लेकिन भारत इस बात को बखूबी समझता है कि केवल कोरी भावनाओं या शिकायतों के दम पर दुनिया नहीं चलती। अंततः, कड़े फैसले और आर्थिक मजबूती ही मायने रखती है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सादगी और ज्ञान
एबॉट ने एस. जयशंकर की कार्यशैली की विशेष तारीफ की है। जयशंकर चीन और अमेरिका में भारत के राजदूत और विदेश सचिव जैसे शीर्ष पदों पर रह चुके हैं। इतनी उपलब्धियों के बावजूद, वे कभी अहंकार में बात नहीं करते। सम्मेलन के दौरान वे बोलने से ज्यादा दूसरों के विचार सुनने पर ध्यान देते हैं। उन्होंने लिखा कि जयशंकर कभी दर्शकों के बीच आम इंसान की तरह बैठते हैं, तो कभी मुख्य वक्ता या पैनलिस्ट के रूप में। इस सम्मेलन में किसी के 'पद' को कोई विशेषाधिकार नहीं मिलता; मंच पर आपके विचारों की गुणवत्ता ही सबसे ज्यादा मायने रखती है।
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