5 राज्यों के विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए कितनी बड़ी चुनौती? इन राज्यों में होगी असली परीक्षा
2024 के आम चुनावों में लोकसभा में सीटों की संख्या घटकर 240 रह जाने के बाद BJP को उस साल आठ में से पांच राज्यों के चुनाव में मिली जीत से काफी हौसला मिला था। भाजपा इस बार भी ऐसे ही परिणाम की उम्मीद करेगी।

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित 5 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों का ऐलान कर दिया है। इन चुनावों से केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को बड़ी उम्मीदें हैं। भाजपा राज्यों में जीत हासिल करने की कोशिश, जहां उसे पारंपरिक रूप से कम समर्थन मिला है और इसीलिए ये चुनाव बीजेपी के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने रविवार को पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की है। इन राज्यों में मतगणना चार मई को होगी। आयोग ने बताया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए दो चरण में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल को और केरल, असम और पुडुचेरी के लिए 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होंगें।
बंगाल में 15 सालों से ममता की सरकार
पांच राज्यों की सत्ता की रेस में भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि असली कसौटी पश्चिम बंगाल में है जहां पार्टी ममता बनर्जी की मजबूत तृणमूल मशीनरी से भिड़ने के लिए तैयार है। पश्चिम बंगाल विधानसभा के 2021 के चुनावों में भाजपा ने प्रमुख विपक्षी दल के रूप में अपनी पकड़ मजबूत की और 294 सदस्यीय विधानसभा में उसकी सीट की संख्या 2016 में मात्र तीन से बढ़कर 77 हो गई।
चुनावी रणनीति में नए बदलाव के साथ, भाजपा इस बार ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ फैली जनविरोधी लहर का लाभ उठाकर तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने में आश्वस्त है। पार्टी राज्य में भ्रष्टाचार और घुसपैठ के मुद्दों को उठाकर जनता की भावनाओं को अपने पक्ष में करने की भी कोशिश कर रही है। बता दें कि तृणमूल पश्चिम बंगाल में लगातार 15 सालों से सत्ता में है हालांकि, भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल में किसी स्थानीय करिश्माई नेता की कमी है। जहां भाजपा लड़ाई जीतने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा कर रही है, वहीं ममता बनर्जी राज्य में एक मजबूत और चुनौतीपूर्ण राजनीतिक चेहरा बनी हुई हैं।
असम में क्या हैं मुद्दे?
दूसरी तरफ असम में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में अपनी शासन व्यवस्था और संगठनात्मक शक्ति का भरोसा लेकर लगातार तीसरी जीत हासिल करने को आश्वस्त है। हालांकि कांग्रेस नीत विपक्ष सत्ता विरोधी लहर और स्थानीय शिकायतों का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा को अल्पसंख्यक मतदाताओं, विशेषकर बांग्ला भाषी मुसलमानों के प्रतिरोध का भी सामना करना पड़ सकता है। साथ ही छह समुदायों के लंबे समय से लंबित अनुसूचित जनजाति दर्जा देने की मांग जैसे मुद्दे भी चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं।
केरल में लौटी उम्मीद?
दक्षिण की बात करें तो भाजपा केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। केरल में पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी को कोई सीट नहीं मिली थी, और भाजपा को लेफ्ट से चुनौती मिलेगी। हालांकि हाल के नगर निकाय चुनावों में मिली सफलता से इस बार कुछ बढ़त की उम्मीद है। राज्य में मुख्य मुकाबला कांग्रेस के नीत यूडीएफ और माकपा नीत एलडीएफ के बीच रहेगा।
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Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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