बकरीद पर गाय की कुर्बानी को लेकर असम के मुसलमानों का बड़ा फैसला, हिमंत सरमा भी खुश

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कबरीद को लेकर कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस्लाम में गाय की ही कुर्बानी देना अनिवार्य नहीं है। पारंपरिक रूप से असम में यह आसानी से उपलब्ध थी, लेकिन इस्लामिक न्यायशास्त्र के अनुसार अन्य जानवरों की कुर्बानी दी जा सकती है।

Assam Muslims set an example regarding sacrifice of cows on Eid al-Adha bakrid Himanta Sarma is pleased

Bakrid in Assam: पूरे देश में बकरीद को लेकर मुस्लिम समाज के लोग तैयारी में जुट गए हैं। इस अवसर पर बकरे की कुर्बानी दी जाती है। कई जगहों पर गाय की कुर्बानी की भी खबर सामने आती रहती है। इसकी वजह से सामाजिक सौहार्द बिगड़ता रहता है। इस बीच असम के मुसलमानों ने एक खास पहल की है। उनकी इस पहल का असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्वागत किया है। असम के होजाई, धुबरी, बोंगाईगांव और उधारबंद सहित कई क्षेत्रों की ईदगाह और कब्रिस्तान कमेटियों ने एक औपचारिक अपील जारी की है। इसमें मुस्लिम समुदाय से बकरीद के दौरान गो-वध (गाय की कुर्बानी) न करने का आग्रह किया गया है। मुख्यमंत्रियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे राज्य के सामाजिक-धार्मिक ताने-बाने को मजबूत करने और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने वाला एक बड़ा कदम बताया।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, "मैं असम के बहुसंख्यक सनातन समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने के इस प्रयास का स्वागत करता हूं। ऐसे स्वैच्छिक कदम राज्य में शांति और भाईचारे के माहौल को मजबूत करेंगे। मुझे उम्मीद है कि अन्य कमेटियां भी इसी तरह की अपील जारी करेंगी। मैं सभी ईद कमेटियों से आगे आने और इस ईद को 'गो-वध मुक्त' बनाने का आह्वान करता हूं।"

23 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक नोटिस में धुबरी टाउन ईदगाह कमेटी ने राज्य के मौजूदा कानूनों और धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए इसे विस्तार से समझाया। कमेटी ने साफ किया कि असम सरकार द्वारा मवेशी संरक्षण अधिनियम (Cattle Preservation Act) लागू किया जा चुका है, जिसके तहत गाय की कुर्बानी देना कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। इस नियम का उल्लंघन करने पर गैर जमानती धाराएं लगाई जाएंगी, जिसमें कम से कम 3 साल से लेकर अधिकतम 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

धार्मिक रूप से अनिवार्य नहीं

कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस्लाम में गाय की ही कुर्बानी देना अनिवार्य नहीं है। हालांकि पारंपरिक रूप से असम में यह आसानी से उपलब्ध थी, लेकिन इस्लामिक न्यायशास्त्र के अनुसार अन्य जानवरों की कुर्बानी दी जा सकती है। इससे किसी की धार्मिक बाध्यता का उल्लंघन नहीं होता। कमेटियों ने कहा है कि कुर्बानी की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। मांस या जानवरों के अवशेषों को इस तरह प्रदर्शित नहीं किया जाएगा जिससे बहुसंख्यक सनातन समुदाय की भावनाएं आहत हों।

दिल्ली में भी सख्त रुख, कपिल मिश्रा की चेतावनी

बकरीद का त्योहार चांद दिखने के आधार पर 27 मई को मनाए जाने की संभावना है। इसे देखते हुए दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने भी राजधानी के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली में मवेशी, गाय, बछड़े, ऊंट और अन्य प्रतिबंधित जानवरों का वध पूरी तरह गैर-कानूनी है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। सड़कों, रिहायशी इलाकों और अनधिकृत बाजारों में जानवरों की अवैध खरीद-बख्त या सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी देने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। कुर्बानी केवल चिन्हित और अधिकृत स्थानों पर ही दी जा सकेगी।

उन्होंने पशुओं के अवशेष, गंदगी या खून को नालियों और सार्वजनिक स्थानों पर फेंकने पर रोक लगाई गई है। दिल्ली सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी नियम उल्लंघन की स्थिति में तुरंत पुलिस या विकास विभाग को सूचित करें।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


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