कॉकरोचों के प्रोटेस्ट में गई असम के मंत्री की बेटी, CM हिमंत के सामने आया मामला; क्या बोले?
नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में असम सरकार के मंत्री केशब महंता की बेटी की मौजूदगी ने असम में बवाल कट रहा है। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि वह इस मुद्दे पर बेटी से बात करेंगे। लेकिन इसको लेकर मंत्री को ट्रोल करना सही नहीं है।

जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन में कई भाजपा समर्थकों के बच्चे भी पहुंचे। दूसरी तरफ कई अन्य राज्यों में भी इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन हुए थे। गुवाहाटी में हुए प्रोटेस्ट से आई एक वीडियो ने असम की राजनीति में हलचल मचा दी है। दरअसल, हिमंत सरमा सरकार में मंत्री केशब महंता की बेटी भी कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित इस आंदोलन में हिस्सा लेने पहुंची थी। उसका वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला असम की राजनीतिक गलियारों में तेजी के साथ चर्चा का विषय बन गया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह 'बेटी' से बात करेंगे।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम हिमंत ने कहा कि बेटी के प्रदर्शन में जाने पर पिता को ट्रोल करना सही नहीं है। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि उनकी बेटी के प्रदर्शन में शामिल होने के कारण केशब महंता को निशाना बनाया जाना चाहिए या उन्हें ट्रोल किया जाना चाहिए। हो सकता है कि वह अपने पिता की राजनीतिक विचारधारा का अनुसरण नहीं करती हों। कल जब मेरा बेटा वकालत करेगा, तो वह किसी ऐसे व्यक्ति का पक्ष रख सकता है जिसे मैं पसंद नहीं करता।"
बकौल हिमंत, बच्चे जब बड़े हो जाते हैं, तो उनके कामों को माता-पिता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि वह केशब महंता की बेटी से मिलेंगे और उससे बात करेंगे। उन्होंने कहा, "मैं उसके लगाए गए नारों से सहमत नहीं हूं। अगली बार जब मैं उससे मिलूंगा तो निश्चित रूप से इस बारे में बात करूंगा और उसे समझाने का प्रयास करूंगा कि उसने जो कहा, वह सही नहीं था।"
आपको बता दें, केशव महंता भाजपा की सहयोगी पार्टी असम गण परिषद से आते हैं। वह असम सरकार में राजस्व एवं आपपदा प्रबंधन मंत्रालय संभालते हैं। फिलहाल उनकी तरफ से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आपको बता दें, नीट पेपर लीक के मामले को लेकर हुआ यह आंदोलन कल उस वक्त समाप्त हो गया। जब सरकार ने आंदोलनकारियों की सभी मांगों को स्वीकार कर लिया। धर्मेंद्र प्रधान सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी की बातचीत के पहले ही इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सरकार भी उनकी अन्य मांगों को मानने के लिए तैयार हो गईं। इसमें नीट पेपर लीक की वजह से आत्महत्या करने वाले परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए और 20 जुलाई को हुए मार्च के दौरान हिंसा को लेकर छात्रों पर केस दर्ज को हटाने की मांग शामिल थी।


