असम सरकार का बड़ा फैसला, बरपेटा मेडिकल कॉलेज से हटा फखरुद्दीन अली अहमद का नाम

Mar 10, 2026 11:05 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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असम सरकार ने बरपेटा स्थित फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का नाम बदलने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने इस संस्थान का नया नाम बरपेटा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रखने को मंजूरी दे दी है।

असम सरकार का बड़ा फैसला, बरपेटा मेडिकल कॉलेज से हटा फखरुद्दीन अली अहमद का नाम

असम सरकार ने बरपेटा स्थित फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का नाम बदलने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने इस संस्थान का नया नाम बरपेटा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रखने को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फखरुद्दीन अली अहमद भारत के राष्ट्रपति रह चुके हैं और वे असम से देश के पहले राष्ट्रपति थे। ऐसे में उनके सम्मान को बनाए रखते हुए राज्य सरकार ने किसी अन्य संस्थान को उनके नाम पर समर्पित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि असम मंत्रिमंडल ने तय किया है कि राज्य में एक अन्य संस्थान को फखरुद्दीन अली अहमद के नाम से जोड़ा जाएगा, ताकि उनके योगदान को उचित सम्मान दिया जा सके।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व सरमा ने मंगलवार को कहा कि असम के मुस्लिम 'राजनीतिक रूप से' मियां मुसलमानों के खिलाफ हैं। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय का एक तबका अब भाजपा का समर्थन कर रहा है। सरमा ने कहा कि असम के मुसलमानों ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि उनका धर्म समान हो सकता है, लेकिन वे मियां मुसलमानों से सांस्कृतिक रूप से अलग हैं। उन्होंने यहां एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि इस बार असम के मुसलमानों ने मन बना लिया है कि वे एक अलग समुदाय हैं, भले ही धर्म समान हो।

मुख्यमंत्री से पूछा गया था कि क्या धार्मिक अल्पसंख्यक आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा का समर्थन करेंगे, इसके बाद उनका यह बयान आया है। दोनों समुदायों को उनकी मातृभाषा और मूल स्थान के आधार पर अलग करते हुए असम सीएम ने कहा कि राजनीतिक रूप से, असम के मुसलमान मियां मुसलमानों के खिलाफ हैं। कई लोग टीवी पर परिचर्चा में कहते हैं कि धर्म भले समान हो, लेकिन उनकी संस्कृति अलग-अलग हैं। बता दें कि 'मियां' मूल रूप से असम में बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, और गैर-बंगाली बोलने वाले लोग उन्हें आम तौर पर बांग्लादेशी प्रवासी बताते हैं।

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लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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