असम में हिंसक हो गई बेदखली की मांग, भीड़ ने बीजेपी नेता के पैतृक घर में लगा दी आग
सोमवार को तनाव तब बढ़ा, जब भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया। पुलिस के अनुसार, 15 दिनों से भूख हड़ताल के कारण उनकी हालत बिगड़ सकती थी, इसलिए उन्हें इलाज के लिए गुवाहाटी ले जाया गया।

असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले में सोमवार को बेदखली की मांग से जुड़े विरोध-प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) के मुख्य कार्यकारी सदस्य और भाजपा नेता तुलिराम रोंगहांग के डोंकामुकाम स्थित पैतृक घर को आग के हवाले कर दिया और पथराव किया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें कम से कम तीन लोग घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए अतिरिक्त बलों के साथ सीआरपीएफ और पुलिस कमांडो तैनात किए गए। जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका का हवाला देते हुए निषेधाज्ञा लागू कर दी।
भू-अधिकार और बेदखली की पुरानी मांग
पश्चिम कार्बी आंगलोंग, आदिवासी बहुल पहाड़ी जिला है और यह संविधान की छठी अनुसूची के तहत केएएसी के अधिकार क्षेत्र में आता है। यहां कार्बी जनजाति बहुसंख्यक है। PGR और VGR भूमियां चराई के लिए आरक्षित हैं और इन पर गैर-जनजातीय लोगों का कब्जा प्रतिबंधित है। मौजूदा तनाव की जड़ पेलांगपी इलाके में पिछले दो सप्ताह से चल रही भूख हड़ताल है, जहां नौ लोग परिषद क्षेत्र की पीजीआर (पेशेवर चराई रिजर्व) और वीजीआर (ग्रामीण चराई रिजर्व) भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहे थे। यह मांग लंबे समय से कार्बी जनजातीय संगठनों द्वारा उठाई जाती रही है।
सोमवार को तनाव तब बढ़ा, जब भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया। पुलिस के अनुसार, 15 दिनों से भूख हड़ताल के कारण उनकी हालत बिगड़ सकती थी, इसलिए उन्हें इलाज के लिए गुवाहाटी ले जाया गया। हालांकि, स्थानीय लोगों में इसे गिरफ्तारी के रूप में देखा गया, जिससे आक्रोश फैल गया।
गलतफहमी से फैली हिंसा: रोंगहांग
हिंसा के बाद मीडिया से बातचीत में तुलिराम रोंगहांग ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार नहीं किया गया था और यह पूरी घटना “गलतफहमी” का नतीजा है। उन्होंने कहा- हमें भूख हड़ताल पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसका समाधान बातचीत से होना चाहिए। मैंने उन्हें दिफू में चर्चा के लिए बुलाया था और आज शाम परिषद के सम्मेलन कक्ष में बातचीत तय थी। कुछ लोगों को कल इलाज के लिए गौहाटी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन इसे गिरफ्तारी समझ लिया गया।
दो इलाकों में उपद्रव, अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाने की कोशिश
अधिकारियों के मुताबिक, डोंकामुकाम में रोंगहांग के पैतृक घर में आगजनी के बाद स्थिति काबू में लाई गई, लेकिन इसके बाद खेरोनी में हालात बिगड़ गए। वहां पुलिस थाने के पास पथराव हुआ और बिहारियों व नेपाली समुदाय जैसे अन्य समुदायों पर हमले की कोशिश की गई। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अतिरिक्त बलों की तैनाती कर पूरे इलाके में फ्लैग मार्च और निगरानी बढ़ा दी गई है। गौरतलब है कि रोंगहांग फिलहाल डोंकामुकाम में नहीं रहते और उनका आधार जिला मुख्यालय दिफू में है।
फरवरी 2024 की घोषणा और हाईकोर्ट का मामला
इससे पहले फरवरी 2024 में रोंगहांग ने कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग में आरक्षित चरागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने की घोषणा की थी। उन्होंने बताया था कि डोंकामुकाम सर्किल के हवाईपुर मौजा में पीजीआर-वीजीआर भूमि पर 1,983 परिवार अवैध रूप से बसे हैं, जबकि फुलोनी सर्किल में 103 परिवार चरागाह भूमि पर अतिक्रमण कर रहे हैं।
उस समय विरोध तब भड़का था, जब बिहारी नोनिया समुदाय के एक संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपकर इन बस्तियों को वैध करने की मांग की थी। हालांकि, तब भी बेदखली की कार्रवाई नहीं हो पाई थी। रोंगहांग ने कहा कि परिषद ने सभी पक्षों से चर्चा के बाद पीजीआर-वीजीआर भूमि से बेदखली का निर्णय लिया था और 15 दिन का नोटिस भी दिया गया था, लेकिन प्रभावित लोगों ने गौहाटी हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर कर दी। उन्होंने कहा- मामला अदालत में लंबित है। ऐसे में अभी बेदखली करना अदालत की अवमानना होगा।

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