न्यू ईयर पर इस राज्य का धमाका; 8वां वेतन आयोग गठित कर बना देश का पहला सूबा; स्टाफ की बल्ले-बल्ले!
CM हिमंत बिस्वा सरमा ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव सुभाष दास को नए वेतन आयोग का प्रमुख नियुक्त किया है। यह कदम सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच वेतन वृद्धि की उम्मीदों के बीच आया है।

8th Pay Commission: असम सरकार ने नए साल पर राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। असम देश का ऐसा पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने 8वें राज्य वेतन आयोग (8th State Pay Commission) के गठन की घोषणा की है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार के बाद असम देश का पहला राज्य होगा जो अपने कर्मचारियों के वेतन ढांचे में संशोधन के लिए आठवें वेतन आयोग का गठन करेगा। मुख्यमंत्री ने गुवाहाटी में संवाददाताओं से कहा कि राज्य में आठवें वेतन आयोग का गठन पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुभाष दास की अध्यक्षता में किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने आठवां आयोग गठित कर दिया है लेकिन उसके बाद से किसी भी राज्य सरकार ने वेतन आयोग का गठन नहीं किया है। असम ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा।’’ शर्मा ने कहा कि यह कर्मचारी कल्याण और प्रगतिशील शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब तक, किसी भी राज्य ने केंद्र सरकार के 8वें वेतन आयोग से मेल खाने के लिए यह कदम नहीं उठाया है, भले ही केंद्रीय कर्मचारी कई महीनों से इसके लागू होने की समय-सीमा पर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।
असम ने आखिरी बार 2015 में वेतन आयोग का गठन किया था
असम सरकार ने वेतन ढांचे, भत्ते और सेवा शर्तों की समीक्षा के लिए आखिरी बार 2015 में वेतन आयोग का गठन किया था। केंद्र के आठवें वेतन आयोग के प्रावधान एक जनवरी, 2026 से लागू होने वाले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयोग के गठन से असम के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को केंद्र के मुकाबले जल्दी बढ़ा हुआ वेतन मिल सकता है। आमतौर पर आयोग को रिपोर्ट देने में 18 महीने का समय लगता है।

आगे क्या होगा
सामान्य प्रक्रिया के तहत, एक वेतन आयोग को अपनी विस्तृत सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए लगभग 18 महीने दिए जाते हैं, जिसके बाद कार्यान्वयन से पहले संशोधनों को मंजूरी दी जानी चाहिए और अधिसूचित किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही 1 जनवरी को प्रभावी तिथि के रूप में तय किया गया है, संशोधित वेतन और पेंशन संरचनाओं को 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में ही अंतिम रूप दिया जा सकता है। असम के लिए, 8वें राज्य वेतन आयोग पर नेतृत्व करने का मतलब यह हो सकता है कि राज्य के कर्मचारियों को वेतन वृद्धि में बढ़त मिले, जिसका केंद्रीय सरकारी कर्मचारी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




