बंगाल में अब अशोक स्तंभ, शुभेंदु ने हटाया ममता बनर्जी का बिस्वा बांग्ला लोगो; रंग भी हुआ भगवा

Himanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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पोर्टल पर अब सफेद बैकग्राउंड के साथ अशोक स्तंभ और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तस्वीर दिखाई देती है। पर्यटन, उद्योग और कृषि जैसे विभागों के आइकन भी केसरिया ग्राफिक्स के साथ फिर से डिजाइन किए गए हैं।

बंगाल में अब अशोक स्तंभ, शुभेंदु ने हटाया ममता बनर्जी का बिस्वा बांग्ला लोगो; रंग भी हुआ भगवा

Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने राज्य की प्रशासनिक पहचान को बदलने की प्रक्रिया तेज कर दी है। ममता बनर्जी शासन की पहचान माने जाने वाले विश्व बांग्ला (Biswa Bangla) लोगो को अब आधिकारिक मंचों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से हटाया जा रहा है। इसकी जगह अब भारत के राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को राज्य की मुख्य पहचान के रूप में स्थापित किया जा रहा है। पुनर्ब्रांडिंग का सबसे बड़ा असर कोलकाता के प्रतिष्ठित साल्ट लेक स्टेडियम में देखने को मिला, जहां से 'विश्व बांग्ला' के साइनेज को हटाकर राष्ट्रीय प्रतीक लगा दिया गया है।

राज्य सरकार का मुख्य पोर्टल एगिये बांग्ला अब पूरी तरह बदल गया है। यहां से विश्व बांग्ला लोगो हटाकर अशोक स्तंभ लगा दिया गया है। पोर्टल का पुराना सफेद और नीला थीम अब बदलकर केसरिया लहजे में तब्दील हो गया है। आपको बता दें कि सफेद और नीला रंग टीएमसी सरकार की पहचान था।

पोर्टल पर अब सफेद बैकग्राउंड के साथ अशोक स्तंभ और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तस्वीर दिखाई देती है। पर्यटन, उद्योग और कृषि जैसे विभागों के आइकन भी केसरिया ग्राफिक्स के साथ फिर से डिजाइन किए गए हैं।

लोगो पर हुआ था विवाद

'विश्व बांग्ला' ब्रांड की शुरुआत 16 सितंबर 2013 को हुई थी। इसे बंगाल की सांस्कृतिक पहचान, हस्तशिल्प और पर्यटन के प्रतीक के रूप में पेश किया गया था। बंगाली अक्षर “ब” (B) के इर्द-गिर्द डिजाइन किया गया यह लोगो पिछले 13 वर्षों से राज्य की हर छोटी-बड़ी सरकारी योजना, वेबसाइट और इमारतों पर छाया हुआ था। पूर्व भाजपा विधायक मुकुल रॉय ने आरोप लगाया था कि यह लोगो निजी स्वामित्व वाला है। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में स्पष्ट किया था कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से यह लोगो बनाया है और राज्य सरकार को बिना किसी रॉयल्टी के इसके इस्तेमाल की अनुमति दी है।

भाजपा नेताओं ने इस फैसले का बचाव करते हुए तर्क दिया है कि किसी व्यक्ति विशेष द्वारा बनाया गया लोगो किसी राज्य सरकार की प्राथमिक पहचान नहीं होना चाहिए। पार्टी का कहना है कि आधिकारिक सरकारी कामकाज के लिए अशोक स्तंभ ही सबसे सर्वोच्च और उपयुक्त प्रतीक है।

शुभेंदु अधिकारी सरकार के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ही सरकारी प्रणालियों से इस लोगो का गायब होना शुरू हो गया था। यह बदलाव केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि बंगाल की प्रशासनिक और राजनीतिक ब्रांडिंग में एक बड़े वैचारिक बदलाव का संकेत है।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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