
म्यांमार-थाईलैंड बॉर्डर पर कैसे फंस गए 16 भारतीय; 20 घंटे काम के लिए मजबूर, पासपोर्ट-फोन जब्त
ओवैसी ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि सभी भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके। पीड़ित मीर सज्जाद अली की मां नाजिया फातिमा ने बताया कि उनका बेटा 6 महीने पहले विदेश गया था।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में एक चौंकाने वाली घटना के बारे में बताया। 16 भारतीय नागरिकों को थाईलैंड में नौकरी का वादा करके म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर ले जाया गया और गुलामी में फंसा दिया गया है। इनमें हैदराबाद के तीन लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों को रोजाना 18-20 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, शारीरिक यातना दी जा रही है और उनके पासपोर्ट, फोन व मेडिकल सुविधाएं छीन ली गई हैं। ओवैसी ने इस जानकारी को हैदराबाद के उस्मान नगर निवासी मीर सज्जाद अली से हासिल किया, जो वर्तमान में वहां कैद हैं। उनके साथ मौला अली और बंजारा हिल्स के दो अन्य व्यक्ति भी हैं।
असदुद्दीन ओवैसी ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि सभी भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके। पीड़ित मीर सज्जाद अली की मां नाजिया फातिमा ने एएनआई से बातचीत में बताया कि उनका बेटा 6 महीने पहले विदेश गया था और कहा कि वह नौकरी के लिए जा रहा है। डेढ़ महीने बाद संपर्क टूट गया, फिर दो महीने बाद फोन आया। उसने बताया कि उन्हें थाईलैंड बुलाकर आंखों पर पट्टी बांधकर जबरन काम पर लगाया गया। वहां सेना पहुंची और उनके फोन व सामान छीन लिए गए। नाजिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ओवैसी और जयशंकर से अपील की है कि उनके बेटे को वापस लाया जाए।
विदेशी नागरिकों को अवैध कार्यों में लगाया
इस घटना ने मानव तस्करी और विदेशी नौकरी घोटालों की समस्या को फिर से उजागर किया है, जहां भोले-भाले युवाओं को झूठे वादों से फंसाया जाता है। यह घटना म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर हो रही मानव तस्करी की समस्या से जुड़ी है, जहां विदेशी नागरिकों को अवैध कार्यों में लगाया जाता है। ओवैसी की अपील के बाद विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी चर्चा हुई है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पहले भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां भारतीयों को म्यांमार में फंसाया गया और दूतावास की मदद से बचाया गया।





