100 सिर्फ एक नंबर... बाजार के हिसाब से गिरने दें रुपये; पनगढ़िया की RBI को दो टूक सलाह
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और प्रमुख अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को रुपये के गिरावट पर हस्तक्षेप न करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि एक डॉलर के बराबर 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को नीति निर्धारण का आधार न बनाएं।

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और प्रमुख अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को रुपये के गिरावट पर हस्तक्षेप न करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि एक डॉलर के बराबर 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को नीति निर्धारण का आधार न बनाएं। पनगढ़िया ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि 100 भी बस एक संख्या है, ठीक 99 और 101 की तरह। उन्होंने साफ कहा कि कच्चे तेल की कमी अल्पकालिक हो या दीर्घकालिक, इस समय रुपये को अपने स्तर पर गिरने देना ही सही नीति है।
अर्थशास्त्री ने कहा कि यदि कच्चे तेल की कमी तीन महीने से एक साल तक की है तो रुपये में शुरुआती कमजोरी आएगी, लेकिन बाद में तेल कीमतों में नरमी आने पर रुपये में मजबूत वापसी होगी। इस दौरान विदेशी निवेशक 'सस्ते' रुपये का फायदा उठाकर भारत में निवेश बढ़ा सकते हैं। दीर्घकालिक तेल संकट की स्थिति में पनगढ़िया का मत है कि रुपये के अवमूल्यन के अलावा कोई विकल्प घाटे का सौदा साबित होगा। विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करके रुपये बचाने की कोशिश बेकार होगी, क्योंकि इससे कोई स्थायी फायदा नहीं होगा।
उन्होंने डॉलर में बॉन्ड जारी करने या प्रवासी भारतीयों से ऊंची ब्याज दर पर जमा स्वीकार करने जैसे उपायों को अस्थायी राहत बताते हुए खारिज किया। पनगढ़िया ने चेतावनी दी कि इनसे प्राप्त विदेशी मुद्रा पर चुकाए जाने वाले ब्याज की लागत, मिलने वाले लाभ से ज्यादा होगी। पनगढ़िया ने आगे कहा कि मौजूदा समय 2013 जैसा नहीं है, जब मुद्रास्फीति दोहरे अंकों में थी। आज भारतीय अर्थव्यवस्था रुपये के कुछ अवमूल्यन से आने वाले मुद्रास्फीति दबाव को सहन करने की क्षमता रखती है।
गुरुवार को रुपये में उछाल
इस बीच, विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने गुरुवार को अपने सर्वकालिक निचले स्तर से उबरते हुए 50 पैसे की तेजी दर्ज की। अंतरबैंक बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये 96.36 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपये ने 96.05 के उच्चतम और 96.60 के निम्नतम स्तर को छुआ। बुधवार को रुपये ने 96.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद होने के बाद गुरुवार को मजबूती दिखाई। भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेत और केंद्रीय बैंक के संभावित हस्तक्षेप की उम्मीद ने रुपये को सहारा दिया।
क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने के शुरुआती संकेत और आरबीआई के सक्रिय हस्तक्षेप से रुपये संभला है। आगे निवेशकों का ध्यान भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और मौद्रिक नीति समीक्षा पर रहेगा। उन्होंने अनुमान जताया कि रुपये 95.74 से 96.50 के दायरे में रह सकता है। मिराए एसेट शेयरखान के अनुज चौधरी ने कहा कि आरबीआई के दखल और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये में मजबूती आई है।
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लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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