
भारत-चीन के बीच जमी 'बर्फ पिघली', रिश्तों में गर्माहट; सेना प्रमुख बोले- सीमा पर बदलाव आया है
संक्षेप: सेना प्रमुख जनरल उपन्द्र द्विवेदी ने कहा है कि भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर निरंतर बातचीत से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति में काफी सुधार हुआ है और लंबे समय से जमी बर्फ पिघली है।
सेना प्रमुख जनरल उपन्द्र द्विवेदी ने कहा है कि भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर निरंतर बातचीत से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति में काफी सुधार हुआ है और लंबे समय से जमी 'बर्फ पिघली' है। सेना प्रमुख ने कहा कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच पिछले एक वर्ष में 1100 बार जमीनी स्तर पर बातचीत हुई है और इनके अच्छे परिणाम मिले हैं।

जनरल द्विवेदी ने सोमवार को यहां 'चाणक्य रक्षा संवाद' के उद्घाटन कार्यक्रम में सवालों के जवाब में कहा कि मैं कहना चाहूंगा कि पिछले एक साल में काफी प्रगति हुई है। अक्टूबर 2024 से लेकर आज तक हमारे संबंधों में काफी सुधार हुआ है। यह सुधार इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने राजनीतिक नेताओं के साथ काफी बातचीत की है। और दोनों ही इस बात पर आश्वस्त थे कि हम वहां जितनी सामान्य स्थिति लाएंगे, दोनों देशों के लिए उतना ही बेहतर होगा।
उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में दोनों देशों की सेनाओं के बीच जमीनी स्तर पर 1100 बार बात हुई है और इससे समस्याओं का बड़े पैमाने पर समाधान हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर आप देखें, तो पिछले एक साल में, हमने लगभग 1100 जमीनी स्तर की बातचीत की है। यानी, हर दिन लगभग तीन बातचीत हुई हैं। तो इसका मतलब है कि ज़मीनी स्तर पर हमारी बातचीत, पहले सिर्फ कोर कमांडर स्तर पर होती थी। अब हम इसे बटालियन कमांडर, कंपनी कमांडर स्तर, और फिर जमीनी कमांडर तक ले आए हैं। तो इसका क्या फायदा? कई चीजें ऐसी होती हैं कि अगर हम ऊपरी स्तर पर जाते हैं, तो हम मुश्किल में पड़ जाते हैं। लेकिन अगर हम निचले स्तर पर जाते हैं, तो उनका हमेशा समाधान हो जाता है। इसलिए हमारी कोशिश यही है कि हम इस मामले का बोझ न बनें। जितना हम ज़मीनी स्तर पर हल कर सकते हैं, उतना हम कर सकते हैं।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि बातचीत की प्रवृति से निचले स्तर पर ही समस्यओं का समाधान हो रहा है लेकिन बड़े फैसले अभी भी उच्च स्तर पर ही लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़े फैसले अभी भी हमारे उच्च स्तर पर लिए जाएंगे। तो सबसे बड़ी बात जो हो रही है, वह यह है कि हम जमीनी स्तर पर जो समाधान खोज रहे हैं, उसके साथ जो हुआ है, वह यह है कि दोनों पक्षों में बातचीत करने की प्रवृत्ति है। दोनों पक्षों, क्योंकि ऊपर से भी निर्देश हैं, कि बातचीत में, जितना हल हो सके, जितना समाधान मिल सके, उसे भी खोजने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि भारतीय सेना यदि किसी बात को लेकर ऐतराज करती है तो चीनी सेना उसे मान लेती है और हमारी आपत्ति को दूर करती है।
सेना प्रमुख ने कहा कि सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया काफी हद तक पूरी हो चुकी है और जब सीमा रेखा तय हो जाएगी, तो बाकी बातों पर बातचीत में आने वाले दिनों में इसका बहुत फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र है जिसके प्रमुख विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव हैं। इसमें सेना के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। इसके अंतर्गत एक विशेषज्ञ समूह है और दूसरा कार्यकारी समूह है। ये दोनों समूह आगे का रास्ता बताएंगे कि हम सीमा संबंधी समस्याओं का समाधान कैसे कर सकते हैं।





