अपने को सुपर चीफ जस्टिस समझ रहा है... ED को नोटिस भेजो; क्यों बुरे भड़के CJI सूर्यकांत?
CJI Suryakant: जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब वे आयुषी मित्तल उर्फ आयुषी अग्रवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। आयुषी पर 37,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित निवेश घोटाले में शामिल होने का आरोप है।

CJI Suryakant: देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत आज (सोमवार, 4 मई को) आयुषी मित्तल बनाम राजस्थान राज्य के मामले की सुनवाई कर रहे थे। इस दौरान वह सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पर ही बुरी तरह भड़क गए। उन्होंने सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री बहुत ही खराब तरीके से काम कर रही है। CJI सूर्यकांत सूर्यकांत इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने और तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, "बहुत ही खराब रजिस्ट्री है। यहाँ बैठा हर व्यक्ति खुद को भारत का 'सुपर चीफ जस्टिस' समझता है।"
इसके बाद उन्होंने पूछा, "ED डायरेक्टर को नोटिस क्यों नहीं जारी किया गया?" उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या ऐसा कोई आदेश पारित नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, “रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल इस बात की जाँच करें कि हमारे मार्च 2026 के आदेश का मतलब ED को नोटिस क्यों नहीं माना गया? प्रवर्तन निदेशालय (Directorate of Enforcement) को नोटिस तुरंत भेजा जाए।”
क्या है मामला?
CJI जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब वे आयुषी मित्तल उर्फ आयुषी अग्रवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। आयुषी पर 37,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित निवेश घोटाले में शामिल होने का आरोप है। CJI ने 23 मार्च को इस याचिका पर दिए गए एक आदेश का ज़िक्र किया और हैरानी जताई कि रजिस्ट्री के अधिकारियों ने यह मतलब कैसे निकाल लिया कि बेंच ने इस याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी नहीं किया था।
राजस्थान सरकार के वकील का पक्ष स्वीकार
याचिकाकर्ता आयुषी मित्तल, उनके पति और उनकी कंपनी पर एक बड़े निवेश घोटाले को अंजाम देने का आरोप है। हालांकि बचाव पक्ष का दावा है कि फंड का एक बड़ा हिस्सा निवेशकों को लौटा दिया गया है, फिर भी कई सौ करोड़ रुपये बैंक खातों में पड़े हैं, जिन्हें फिलहाल ED ने फ्रीज़ कर रखा है। बता दें कि इससे पहले 23 मार्च के अपने आदेश में पीठ ने राजस्थान सरकार (जो इस मामले में एक पक्ष है) के वकील के मौखिक अनुरोध को स्वीकार करते हुए ED को भी इस कार्यवाही में एक पक्ष बनाने की अनुमति दी थी।
जमानत याचिका के गुण-दोष पर विचार नहीं करेगी
इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या याचिकाकर्ता और उनके विस्तारित परिवार से संबंधित सभी चल और अचल संपत्तियों को ठीक से कुर्क (अटैच) किया गया है। बेंच ने दोहराया कि जब तक संपत्तियों का "विस्तृत विवरण" प्रदान नहीं किया जाता, तब तक वह जमानत याचिका के गुण-दोष पर विचार नहीं करेगी। बेंच ने याचिकाकर्ता के कानूनी प्रतिनिधि को एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया, जिसमें याचिकाकर्ता, उनके पति, उनके बच्चों, माता-पिता, भाई-बहनों और सास-ससुर के स्वामित्व वाली अचल संपत्तियों का पूरा विवरण दिया जाए।
रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को जांच सौंपा
बेंच ने कहा, "बेंच ने कंपनी के निदेशकों, प्रबंधकों और प्रमुख कर्मचारियों की संपत्तियों का विवरण भी मांगा। "जब तक ऐसी पूरी जानकारी नहीं दे दी जाती, तब तक हम ज़मानत की अर्ज़ी पर उसके गुण-दोष के आधार पर विचार नहीं करेंगे।" इसके साथ ही पीठ ने रजिस्ट्री के भीतर हुई प्रशासनिक चूक की जाँच करने का काम रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को सौंपा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अदालत के पिछले निर्देशों को नज़रअंदाज़ क्यों किया गया। बेंच ने कहा कि वह इस अर्ज़ी को मई में किसी समय सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी।
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लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


