अंडमान-निकोबार में और भी ज्यादा मजबूत होगी सेना, उपराज्यपाल ने बताया पूरा प्लान
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल रिटायर एडमिरल डीके जोशी ने कहा कि आने वाले तीन वर्षों में नए एयरपोर्ट से उड़ाने शुरू हो जाएंगी। यह एयरपोर्ट न केवल द्वीप समूह के टूरिज्म के लिए उपयोगी होगा, बल्कि भारतीय सैन्य पहुंच को भी बढ़ाएगा।

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारतीय सेना की स्थिति और भी ज्यादा मजबूत होने जा रही है। केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल रिटायर्ड एडमिरल डीके जोशी ने 15 हजार करोड़ की लागत से द्वीप समूह पर बनाए जा रहे एयरपोर्ट की समय सीमा के बारे में पूरी जानकारी दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले तीन वर्षों के अंदर इस एयरपोर्ट से उड़ाने प्रारंभ हो जाएंगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए और मलक्का जलडमरूमध्य पर और भी कड़ी निगरानी करने के लिए इस एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रेट निकोबार द्वीप के चिंगेनह क्षेत्र में ग्रीनफील्ड इंटरनेशल एयरपोर्ट के लिए सरकार ने पहले ही टेंडर बुलाए थे। अब इस परियोजना पर आगे काम शुरू हो गया है। गौरतलब है कि चिंगेनह तथाकथित ‘प्री-सुनामी’ गांवों में से एक है, जहां से 2004 की सुनामी के बाद आदिवासियों को विभिन्न शिविरों में स्थानांतरित किया गया था। वे तब से वापस लौटने की अनुमति मांग रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने अभी तक इसकी अनुमति नहीं दी है। एडमिरल जोशी ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस एयरपोर्ट से अगले तीन साल में उड़ाने शुरू हो जाएंगी।
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व नौसेना अध्यक्ष ने बताया कि इस नए एयरपोर्ट पर दो रनवे होंगे और यह बड़े विमानों, जिनमें नागरिक उड़ानों को भी संभालने में सक्षम होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार द्वारा शुरू किए जा रहे इस प्रोजेक्ट के तहत द्वीप समूह के उत्तर में स्थित एक भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान का भी नवीनीकरण किया जाएगा और उसके रनवे का भी विस्तार किया जाएगा।
नए सैन्य हवाई अड्डे के तौर पर होगा विकसित
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रेट निकोबार द्वीप पर बनाया जाने वाला यह नया एयरपोर्ट एक आर्मी एयरपोर्ट के तौर पर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के तहत दो मौजूदा सैन्य हवाई पट्टियों के रनवे का भी विस्तार किया जाएगा, ताकि हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी का प्रभावी जवाब दिया जा सके। यह नया एयरपोर्ट द्वीप समूह पर टूरिज्म को भी बढ़ाएगा। इसका निर्माण ग्रेट निकोबार द्वीप पर होगा, जो इस द्वीपसमूह का सबसे दक्षिणी हिस्सा है और मलक्का जलडमरूमध्य से लगभग 40 नौटिकल मील की दूरी पर स्थित है। मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है।
गौरतलब है कि हिंद महासागर में भारतीय नौसेना सबसे बड़ी ताकत है। चीन की ज्यादातर सप्लाई लाइन भी इसी रास्ते से होकर जाती है। ऐसे में भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में अपनी ताकत को बढ़ाना चाहती है। ग्रेट निकोबार द्वीप पर बनाया जा रहा यह नया एयरपोर्ट भी इसी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसके अलावा भारत यहां पर लगातार कच्चे तेल की खोज में भी लगा हुआ है। अभी हाल ही में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक वीडियो पोस्ट करके इस बात की जानकारी दी थी कि यहां पर तेल की मौजूदगी मिली है।
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Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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