असम में दुर्घटनाग्रस्त AN-32 विमान; आसमान का सिकंदर कितना सुरक्षित, कब-कब हुए हादसे
AN-32 सोवियत संघ में विकसित एक ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप ट्रांसपोर्ट विमान है। इसे खास तौर पर भारतीय वायुसेना की परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था। 1980 के दशक में भारत ने इस प्रकार के 125 विमान खरीदे थे।

असम के जोरहाट स्थित भारतीय वायुसेना स्टेशन पर AN-32 परिवहन विमान की दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रूटीन सॉर्टी के दौरान लैंडिंग के समय विमान रनवे पर फिसल गया और आग की चपेट में आ गया। इस हादसे में 5 वायुयोद्धा शहीद हो गए, जबकि सह-पायलट घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती है। शहीदों में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सर्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीर वायु दानिश आलम शामिल हैं। भारतीय वायुसेना ने गहरा दुख व्यक्त किया है और शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ी है। कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का गठन कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।
AN-32 सोवियत संघ में विकसित ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है, जिसे विशेष रूप से भारतीय वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। 1980 के दशक में भारत ने 125 विमान खरीदे। यह विमान ऊंची ऊंचाई वाले क्षेत्रों, छोटी रनवे और सीमित सुविधाओं वाले दूरदराज इलाकों में उड़ान भरने में सक्षम है। इसमें बेहतर इंजन, हाई-लिफ्ट विंग्स और कार्गो हैंडलिंग सिस्टम दिए गए हैं। इसी वजह से इसे आसमान का सिकंदर भी कहा जाता है। फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास लगभग 100 AN-32 विमान सक्रिय हैं, जो सामरिक परिवहन का मुख्य आधार बने हुए हैं। सियाचिन ग्लेशियर जैसे विश्व के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में सैनिकों और सामग्री की आपूर्ति इसी विमान के जरिए की जाती है।
AN-32 का कैसा है सुरक्षा रिकॉर्ड
AN-32 का उत्पादन 1982 से 1996 तक कीव एविएशन प्लांट में हुआ और कुल 358 विमान बनाए गए। भारत में इसकी आधुनिकीकरण प्रक्रिया भी चल रही है। 2009 की दुर्घटना के बाद यूक्रेन के साथ 400 मिलियन डॉलर का समझौता कर 55 से अधिक विमानों को नए एवियोनिक्स, नेविगेशन और इमरजेंसी लोकेटर सिस्टम से लैस किया गया। इसके बावजूद AN-32 का सुरक्षा रिकॉर्ड चिंताजनक रहा है। 1986 से अब तक 18 से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
AN-32 विमान कब-कब हुआ दुर्घटना का शिकार-
22 मार्च 1986: जम्मू-कश्मीर में एक दुर्घटना में 17 लोग मारे गए।
4 अक्टूबर 1988: उत्तर प्रदेश में एक क्रैश में 10 लोगों की मौत हो गई।
15 जुलाई 1990: केरल में हुई दुर्घटना में 5 लोग शहीद हुए।
1 अप्रैल 1992: पंजाब में दो AN-32 विमानों की मध्य आकाश में टक्कर हो गई, जिसमें प्रत्येक विमान पर सवार 4-4 कुल 8 लोग मारे गए।
7 मार्च 1999: दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंडिंग के प्रयास के दौरान एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें विमान में सवार 18 लोग और जमीन पर 3 लोग मारे गए।
8 जून 2009: अरुणाचल प्रदेश में एक क्रैश में 13 लोगों की जान गई।
22 जुलाई 2016: बंगाल की खाड़ी के ऊपर 29 से अधिक लोगों को ले जा रहा AN-32 विमान लापता हो गया। जनवरी 2024 में इसके मलबे का पता चला और विमान में सवार सभी 29 लोगों की मौत की पुष्टि हुई।
3 जून 2019: जोरहाट से उड़ान भरने के कुछ देर बाद 13 लोगों को ले जा रहा विमान गायब हो गया। 11 जून को अरुणाचल प्रदेश के निकट इसका मलबा मिला। सभी 13 लोग शहीद हो गए।
7 मार्च 2025: बागडोगरा एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।
AN-32 विमान की क्या है खासियत
AN-32 की खासियत इसकी विश्वसनीयता, कम रखरखाव की जरूरत और दुर्गम क्षेत्रों में पहुंच है, जो इसे सियाचिन, लद्दाख और द्वीप समूहों के लिए जरूरी बनाती है। हालांकि बार-बार होने वाली दुर्घटनाएं आधुनिक विकल्पों की तलाश को बढ़ावा दे रही हैं। वायुसेना इस बेड़े को और मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। जोरहाट दुर्घटना एक बार फिर सुरक्षा मानकों, रखरखाव और ट्रेनिंग पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर है। AN-32 की सेवा जारी रहेगी, लेकिन हर हादसे से सीखकर बेहतर भविष्य तैयार करने की जरूरत है।
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लेखक के बारे में
Niteesh Kumarपत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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