नक्सलियों-माओवादियों ने बस्तर को ही क्यों चुना? अमित शाह ने संसद में बताई वो वजह

Deepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पर अपनी बात रखी। इस दौरान अमित शाह ने वह वजह भी बताई, जिसके चलते नक्सलियों-माओवादियों ने बस्तर को ही चुना।

नक्सलियों-माओवादियों ने बस्तर को ही क्यों चुना? अमित शाह ने संसद में बताई वो वजह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पर अपनी बात रखी। इस दौरान अमित शाह ने वह वजह भी बताई, जिसके चलते नक्सलियों-माओवादियों ने बस्तर को ही चुना। उन्होंने कहाकि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ट्रेड नहीं होने के कारण भोले-भाले आदिवासियों को बहलाया गया। विकास को उस क्षेत्र में वामपंथी उग्रवादियों ने नहीं पहुंचने दिया।

लोकसभा में बोलते हुए अमित शाह ने कहाकि आजादी के बाद के 75 सालों में से 60 साल तक सत्ता आपके (कांग्रेस के) हाथों में रही। तो फिर, आज तक आदिवासी समुदाय विकास से वंचित क्यों रहे? असली विकास तो पीएम नरेंद्र मोदी के आने के बाद ही हो रहा है। 60 सालों तक आप उन्हें घर या साफ पानी उपलब्ध कराने में नाकाम रहे, आपने उनके लिए कोई स्कूल नहीं बनाया, आपने उनके इलाकों तक मोबाइल टावर और बैंकिंग सुविधाएं पहुंचने से रोकीं, और फिर भी, अब आप ही लोग जवाबदेही की मांग कर रहे हैं?

अब विकास के पथ पर बस्तर
गृहमंत्री ने आगे कहाकि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है। बस्तर के हर एक गांव में स्कूल खोलने के लिए एक अभियान चलाया गया। इस क्षेत्र के हर गांव में राशन की दुकान खोलने के लिए एक मुहिम शुरू की गई। हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं। अब उन्हें पांच किलोग्राम अनाज मिल रहा है।

मैं बस उन लोगों से यह पूछना चाहता हूँ जो यहाँ नक्सलवाद की वकालत कर रहे थे, लोगों को अब तक ये लाभ क्यों नहीं मिले?... बस्तर के लोग इसलिए पीछे रह गए क्योंकि इस क्षेत्र पर 'लाल आतंक' का साया मंडरा रहा था इसीलिए विकास उन तक नहीं पहुंच पाया। आज, वह साया हट गया है, और बस्तर अब विकास के पथ पर अग्रसर है।

संविधान का सम्मान करेंगे या नहीं?
लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहाकि जो लोग एक सशस्त्र आंदोलन के पैरोकार बनकर यह कहते हैं कि उन्होंने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी, मैं उनसे पूछता हूं क्या आप संविधान का सम्मान करेंगे या नहीं? यदि किसी के साथ अन्याय होता है, तो उसके लिए अदालतें स्थापित की गई हैं, विधानसभाएं, जिला परिषदें और तहसीलें गठित की गई हैं। मैं यह कहना चाहता हूँ कि वह दौर अब खत्म हो चुका है।

उन्होंने कहाकि यह नरेंद्र मोदी की सरकार है। जो कोई भी हथियार उठाएगा, उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस तरह का बर्ताव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार इन मुद्दों के प्रति संवेदनशील है, वह सभी शिकायतों को सुनने के लिए तैयार है और उन्हें हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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लेखक के बारे में

Deepak Mishra

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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