UCC पर भाजपा का कितना साथ देंगे NDA के सहयोगी? 3 साथियों ने बढ़ाई टेंशन, क्या कह दिया
UCC पर अमित शाह के 2029 से पहले 21 BJP-NDA शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने के दावे के बाद TDP, JDU और चिराग पासवान ने सावधानी भरा रुख अपनाया। जानें सहयोगी दलों ने UCC पर क्या कहा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक 21 भाजपा-NDA शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की बात कही है। इसके एक दिन बाद ही भाजपा के तीन सहयोगी दलों ने इस मुद्दे पर सावधानी भरा रुख अपनाया है। तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने UCC को लेकर अपने-अपने रुख स्पष्ट कर दिए हैं जो एनडीए की टेंशन बढ़ा सकते हैं।
TDP ने कहा- जरूरत पड़ी तो विचार करेंगे
भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA के लिए संसद में बहुमत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाने वाली तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने UCC के मुद्दे पर समर्थन जताया है। लोकसभा में TDP के नेता लावु कृष्ण देवरायालु ने कहा, “हम इसका समर्थन करेंगे।” हालांकि देवरायलु ने साफ कहा कि फिलहाल पार्टी के भीतर UCC को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जब इसकी जरूरत महसूस होगी, तब इस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि UCC को अपनाने से पहले विभिन्न हितधारकों को चर्चा में शामिल किया जाएगा।
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद TDP के NDA में शामिल होने से पहले पार्टी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि UCC की बात आने पर TDP मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ी होगी।
JDU गृह मंत्री अमित शाह से करेगा बात
बिहार में नीतीश कुमार की JDU ने UCC को लेकर अपना रुख साफ रखा है। पार्टी नेता और पूर्व राज्य मंत्री श्याम रजक ने सोमवार को कहा कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर UCC विधेयक का समर्थन करती है, लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। रजक ने कहा कि जब यह विधेयक संसद में आया था, तब पार्टी के नेता नीतीश कुमार का रुख स्पष्ट था कि पार्टी इसका समर्थन करती है, लेकिन इसे बिहार में लागू नहीं होने देगी।
JDU इस मुद्दे पर सीधे आगे बढ़ने के बजाय पहले चर्चा के पक्ष में है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वह गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। JDU प्रमुख नीतीश कुमार अतीत में UCC के विचार का समर्थन कर चुके हैं, लेकिन उनका जोर इस बात पर रहा है कि सभी समुदायों को साथ लेकर आम सहमति बनाई जानी चाहिए।
चिराग पासवान ने भी जताई सावधानी
BJP के एक अन्य सहयोगी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने भी UCC को लेकर सावधानी भरा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी एकरूपता के साथ-साथ विविधता के लिए भी प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक संविधान में अलग-अलग समुदायों की परंपराओं और प्रथाओं को मान्यता दी गई है।
चिराग पासवान ने संविधान के अलग-अलग शेड्यूल और अनुच्छेदों के तहत अनुसूचित जनजातियों को मिली छूट का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि UCC का प्रस्ताव सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इसके बाद संबंधित हितधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यापक स्तर पर चर्चा और विचार-विमर्श होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के बाद उनकी पार्टी UCC पर अपना रुख स्पष्ट करेगी।
शिवसेना और HAM ने भी किया समर्थन
एकनाथ शिंदे की शिवसेना और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने UCC को लेकर अपना समर्थन दोहराया है। शिवसेना नेता श्रीकांत शिंदे ने कहा कि UCC समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने इसे पार्टी के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की लंबे समय से चली आ रही वैचारिक स्थिति से भी जोड़ा।
उन्होंने कहा कि एक वैचारिक सहयोगी के तौर पर सरकार की ओर से देश की जनता से किए गए वादों को पूरा करने में मजबूती से साथ खड़ा होना पार्टी का दायित्व है। HAM के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने भी अमित शाह के UCC संबंधी बयान का पूरे समर्थन के साथ स्वागत किया।
बंगाल में भी UCC लागू करने की तैयारी की बात
बंगाल में पिछली TMC सरकार UCC का जोरदार विरोध करती रही थी। बीजेपी के बंगाल अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य सरकार जल्द से जल्द UCC को पारित कराने और लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।उन्होंने कहा कि UCC बीजेपी के लिए कोई छिपा हुआ एजेंडा नहीं है और पार्टी अपनी स्थापना के समय से ही इसे अपनी प्राथमिकताओं में रखती रही है।
हालांकि, बीजेपी की नई बंगाल सहयोगी नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ने इस मुद्दे पर तत्काल रुख स्पष्ट नहीं किया। पार्टी की नेता और वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि यह गंभीर मुद्दा है, जिस पर काफी विचार-विमर्श की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव आने के बाद पार्टी इस पर चर्चा करेगी और फिर अपना रुख तय करेगी।
NDA के सहयोगी दलों की संसद में कितनी ताकत?
लोकसभा में TDP के 16 सांसद हैं। इसके बाद शिवसेना के 13, JDU के 12, LJP (रामविलास) के पांच और HAM (सेक्युलर) के एक सांसद हैं। राज्यसभा में TDP और JDU के चार-चार सदस्य हैं, जबकि शिवसेना के दो सदस्य हैं।
अमित शाह ने क्या कहा था?
मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमित शाह ने कहा था कि तीन तलाक को खत्म कर मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। उन्होंने कहा था कि कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है और उन्हें भरोसा है कि 2029 से पहले BJP-NDA द्वारा शासित 21 राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा।
अगले लोकसभा चुनाव 2029 में होने हैं। UCC को देशभर में एक साथ लागू करने के बजाय BJP ने इसे अपने शासन वाले राज्यों के जरिए लागू करने का रास्ता अपनाया है। उत्तराखंड में यह पहले से लागू है, जबकि गुजरात, असम और मध्य प्रदेश UCC कानून पारित कर चुके हैं।


