Hindi NewsIndia NewsAmidst speculations of a change in Chief Minister in Karnataka, who told D K Shivakumar the story of Chhattisgarh
कर्नाटक में भी होगा छत्तीसगढ़ जैसा ही हाल? DK शिवकुमार को किसने सुनाई बघेल वाली कहानी

कर्नाटक में भी होगा छत्तीसगढ़ जैसा ही हाल? DK शिवकुमार को किसने सुनाई बघेल वाली कहानी

संक्षेप:

सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक में भी मौजूदा नंबर-1 नेता को रिप्लेस करना उतना ही मुश्किल है। यही वजह है कि यहां भी आलाकमान स्तर पर लगातार बातचीत और संतुलन साधने की कोशिशें जारी हैं।

Dec 21, 2025 08:46 am ISTHimanshu Jha हिन्दुस्तान टीम
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कर्नाटक की सियासत में एक बार फिर ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले को लेकर हलचल तेज है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की ओर से दबाव बनाए जाने के बीच पार्टी के भीतर ही एक वरिष्ठ नेता ने उन्हें छत्तीसगढ़ की सियासी कहानी सुना दी। यह एक ऐसी कहानी है जो आज कर्नाटक के मौजूदा हालात से काफी मिलती-जुलती मानी जा रही है। नेता के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में भी कभी सत्ता साझा करने का यही फॉर्मूला सामने आया था। पार्टी के एक शीर्ष नेता ने वहां भी ढाई-ढाई साल का आश्वासन दिया था। शुरुआती दौर में यह फॉर्मूला सभी को स्वीकार्य लगा और लगा कि सत्ता का संतुलन बना रहेगा। लेकिन जैसे ही ढाई साल पूरे होने का वक्त करीब आया, सरकार में नंबर-2 की भूमिका निभा रहे नेता ने मुख्यमंत्री पद पर अपनी दावेदारी ठोक दी।

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यहीं से सियासी खींचतान शुरू हुई। आलाकमान के स्तर पर लगातार बैठकों और पंचायतों का दौर चला। समाधान तलाशा गया, लेकिन इसी बीच एक अन्य बड़े नेता की एंट्री ने समीकरण बदल दिए। नतीजा यह हुआ कि शुरुआत में किया गया ढाई-ढाई साल का वादा अधूरा रह गया। अंततः पार्टी के भीतर यह फैसला हुआ कि नंबर-2 को नंबर-1 नहीं बनाया जा सकता। छत्तीसगढ़ में नेतृत्व परिवर्तन नहीं हुआ और चुनाव मौजूदा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ही लड़ा गया। लेकिन पार्टी को चुनावी हार का सामना करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम को आज कर्नाटक के संदर्भ में एक चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

Karnataka Crisis

सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक में भी मौजूदा नंबर-1 नेता को रिप्लेस करना उतना ही मुश्किल है। यही वजह है कि यहां भी आलाकमान स्तर पर लगातार बातचीत और संतुलन साधने की कोशिशें जारी हैं। फिलहाल संकेत यही मिल रहे हैं कि नंबर-2 नेता को अपनी मौजूदा जिम्मेदारी में रहते हुए अपेक्षाकृत “फ्री हैंड” दिया जाए और चुनाव तक इंतजार करने को कहा जाए।

हालांकि अंतिम फैसला क्या होगा, यह पूरी तरह नेताओं की सियासी चतुराई और पार्टी आलाकमान की रणनीति पर निर्भर करेगा। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि कर्नाटक में ‘ढाई-ढाई साल’ का फॉर्मूला सिर्फ एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि आने वाले समय की सियासी दिशा तय करने वाला बड़ा मुद्दा बन चुका है।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha
कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रैजुएट हिमांशु शेखर झा करीब 9 वर्षों से बतौर डिजिटल मीडिया पत्रकार अपनी सेवा दे रहे हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा राष्ट्रीय राजनीति पर अच्छी पकड़ है। दिसंबर 2019 में लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े। इससे पहले दैनिक भास्कर, न्यूज-18 और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में भी काम कर चुके हैं। हिमांशु बिहार के दरभंगा जिला के निवासी हैं। और पढ़ें
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