
ट्रंप ने दिया दर्द तो ऑस्ट्रेलिया ने दी दवाई, 8 साल में पहली बार आयात को मंजूरी; भारत को बड़ी राहत
संक्षेप: आंध्र प्रदेश के IT मंत्री नारा लोकेश ने बताया है कि व्हाइट स्पॉट वायरस का पता चलने के उपरांत वर्षों से लागू प्रतिबंधों के बाद ऑस्ट्रेलिया ने गैर-प्रसंस्कृत भारतीय झींगा मछलियों के लिए पहली बार आयात करने की मंज़ूरी दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ की वजह से झींगा मछली का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ था। आंध्र प्रदेश के किसान निर्यात में आई गिरावट की वजह से परेशान चल रहे थे लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने अब भारत की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। ऑस्ट्रेलिया ने आठ साल बाद पहली बार भारतीय झींगा आयात को मंजूरी दी है। जनवरी 2017 के बाद यह पहली मंजूरी है, जब ऑस्ट्रेलिया ने कुछ खेपों में व्हाइट स्पॉट वायरस पाए जाने के बाद भारत से बिना छिलके वाले झींगों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले का आंध्र प्रदेश के मछुआरों पर सीधा असर पड़ेगा। इस खबर ने उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है। दरअसल, भारत से होने वाले झींगी निर्यात का 80 फीसदी हिस्सा आंध्र प्रदेश से ही होता है। इनमें से 70% अकेले अमेरिका भेजा जाता था लेकिन, ट्रंप की 50% टैरिफ के कारण झींगा कारोबार ठप पड़ गया था।
सात दिनों के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर नारा लोकेश
इस बीच सात दिनों के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए आंध्र प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री नारा लोकेश ने मंगलवार को कहा कि व्हाइट स्पॉट वायरस का पता चलने के उपरांत वर्षों से लागू प्रतिबंधों के बाद ऑस्ट्रेलिया ने गैर-प्रसंस्कृत भारतीय झींगा मछलियों के लिए पहली बार आयात करने की मंज़ूरी दी है। एक सरकारी बयान में कहा गया है कि मंत्री लोकेश भारतीय जलीय कृषि निर्यात के लिए नए बाजार अवसरों का पता लगाने के लिए सरकारी अधिकारियों, निवेशकों और समुद्री खाद्य व्यापार के प्रमुख कारोबारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं।
आंध्र प्रदेश की झींगा अर्थव्यवस्था को नई उम्मीद
लोकेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, इस विकासक्रम को एक बड़ा कदम बताते हुए कहा, ‘‘भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातकों के लिए एक लंबे समय से चली आ रही बाधा व्हाइट स्पॉट वायरस का पता चलने के कारण गैर-प्रसंस्कृत झींगों पर ऑस्ट्रेलिया का प्रतिबंध रहा है। आज, भारतीय झींगों के लिए पहली आयात मंज़ूरी दे दी गई है।’’ लोकेश ने कहा, ‘‘इस मंजूरी से व्यापार संबंधी बाधाएं दूर होंगी, निर्यातकों का विश्वास बढ़ेगा और तटीय आंध्र प्रदेश की झींगा अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर पैदा होंगे।’’
ऑस्ट्रेलिया ने क्यों लगाई थी पाबंदी?
व्हाइट स्पॉट सिंड्रोम वायरस एक अत्यधिक संक्रामक और घातक रोगाणु है जो मुख्य रूप से खेती किए गए झींगे और अन्य क्रस्टेशियंस को प्रभावित करता है। भारतीय जलीय कृषि किसानों, विशेष रूप से तटीय आंध्र प्रदेश के, को कथित तौर पर तब से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जब से अमेरिका ने भारी शुल्क लगाए और ऑस्ट्रेलिया ने गैर-प्रसंस्कृत झींगा मछलियों वाली खेपों को रोक दिया, जिससे एकल बाजार पर अत्यधिक निर्भरता बढ़ गई।
बयान में कहा गया कि लोकेश ने इस मुद्दे को सुलझाने की दिशा में मिलकर काम करने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों सरकारों को धन्यवाद दिया और कहा कि इस फैसले से भारत के जलीय कृषि निर्यातकों को काफी बढ़ावा मिलेगा। इसमें आगे कहा गया है कि इस मंजूरी से व्यापार संबंधी अड़चनें कम होने, समुद्री खाद्य क्षेत्र की धारणा में सुधार होने और तटीय आंध्र प्रदेश की झींगा अर्थव्यवस्था के लिए नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। (भाषा इनपुट्स के साथ)





