ईरान युद्ध के बीच यूएन की डराने वाली रिपोर्ट, भारत में बढ़ सकते हैं 25 लाख गरीब; मुश्किल हो जाएगा इलाज

Ankit Ojha भाषा
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ईरान युद्ध के बीच यूएन की संस्था यूएनडीपी ने कहा है कि अगर मध्य एशिया में तनाव जारी रहा तो भारत में करीब 25 लाख लोग गरीबी रेखा से नीचे चले जाएंगे। इसके अलावा इलाज इतना महंगा हो जाएगा कि आम आदमी के लिए मुश्किल हो जाएगी।

ईरान युद्ध के बीच यूएन की डराने वाली रिपोर्ट, भारत में बढ़ सकते हैं 25 लाख गरीब; मुश्किल हो जाएगा इलाज

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर पूरी दुनिया की ही अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक इससे भारत में 25 लाख लोगों के गरीबी में धकेल दिए जाने का खतरा है और देश के मानव विकास की प्रगति में कुछ कमी आने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने 'पश्चिम एशिया में सैन्य वृद्धि: एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र में मानव विकास पर प्रभाव' शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा कि यह संघर्ष '' एशिया तथा प्रशांत क्षेत्र में मानव विकास के दबाव को बढ़ा रहा है।'

घट रही है खरीदने की क्षमता

इसमें कहा गया कि ईंधन, मालभाड़ा और कच्चे माल की लागत बढ़ने से घरेलू क्रय शक्ति घट रही है, खाद्य असुरक्षा बढ़ रही है, सरकारी बजट पर दबाव पड़ रहा है और आजीविका कमजोर हो रही है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 88 लाख लोग गरीबी के जोखिम में आ सकते हैं और इस सैन्य तनाव से एशिया-प्रशांत क्षेत्र को 299 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।

चीन पर कितना असर

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गरीबी से प्रभावित लोगों की संख्या लगभग चार लाख से बढ़कर 25 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। संघर्ष के कारण दुनिया भर में गरीबी में धकेले जाने वाले लोगों की संख्या लगभग 19 लाख से बढ़कर करीब 88 लाख तक हो सकती है जिसमें दक्षिण एशिया के लोग सबसे अधिक होंगे। चीन में गरीबी की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या में मामूली वृद्धि का अनुमान है जो लगभग 1,15,000 से बढ़कर 6,20,000 से अधिक हो जाएगी। हालांकि यह बहुत बड़ी जनसंख्या के मुकाबले मामूली प्रभाव को दर्शाता है।

गरीबी दर में भी हो सकती है बढ़ोतरी

इसमें कहा गया कि सबसे गंभीर परिदृश्य में भारत की गरीबी दर 23.9 प्रतिशत से बढ़कर 24.2 प्रतिशत हो सकती है जिससे अतिरिक्त 24,64,698 लोग गरीबी में चले जाएंगे। संकट के बाद देश में गरीबी में रहने वालों की संख्या 35.40 करोड़ तक पहुंच सकती है जो पहले 35.15 करोड़ थी।

LPG संकट

रिपोर्ट में मानव विकास सूचकांक (HDI) पर प्रभाव का भी आकलन किया गया है। इसमें कहा गया कि भारत में एचडीआई प्रगति में लगभग 0.03 से 0.12 वर्ष तक की गिरावट हो सकती है। इसके बाद नेपाल (0.02–0.09 वर्ष) और वियतनाम (0.02–0.07 वर्ष) का स्थान है जबकि चीन पर प्रभाव अपेक्षाकृत कम (0.01–0.05 वर्ष) रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी 90 प्रतिशत से अधिक तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है और कच्चे तेल का 40 प्रतिशत से अधिक तथा एलपीजी का 90 प्रतिशत आयात पश्चिम एशिया से करता है। इसके अलावा, उर्वरक आयात का 45 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भी इसी क्षेत्र से आता है।

संघर्ष के कारण ऊर्जा विकल्पों पर भी असर पड़ा है। एलएनजी कीमतें बढ़ने से भारत समेत कई देशों ने कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता बढ़ाई है। व्यापार एवं आपूर्ति शृंखला पर असर को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि 36 में से 25 देशों में मालभाड़ा शुल्क, युद्ध जोखिम बीमा, मार्ग परिवर्तन और देरी जैसी समस्याएं देखी गई हैं। भारत के कुल निर्यात का 14 प्रतिशत और आयात का 20.9 प्रतिशत पश्चिम एशिया से जुड़ा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश पर भी असर पड़ा है जहां खाड़ी देशों की विमानन कंपनियों ने उड़ानें रद्द कर दीं और भारत-बांग्लादेश से भेजा गया माल फंस गया। खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव के बारे में रिपोर्ट में कहा गया कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और फिलीपीन जैसे देशों में धन प्रेषण (रेमिटेंस) में कमी के कारण खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है। भारत के लिए यह समय विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि किसी भी लंबे व्यवधान का असर खरीफ (मानसून फसल) की तैयारी पर पड़ सकता है जो जून में शुरू होती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरिया का भंडार 61.14 लाख टन है, जो अल्पकालिक राहत देता है लेकिन लंबे समय तक व्यवधान रहने पर पर्याप्त नहीं होगा। इसमें कहा गया कि खाड़ी देशों के श्रम बाजार और धन प्रेषण पर निर्भरता कई देशों के लिए महत्वपूर्ण है और भारत का इसमें सबसे बड़ा हिस्सा है। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2024 तक खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों में 93.7 लाख भारतीय रह रहे थे जो भारत में आने वाले कुल प्रेषण का 38-40 प्रतिशत भेजते हैं।

इलाज करवाना भी होगा मुश्किल

आतिथ्य, खाद्य प्रसंस्करण, निर्माण सामग्री, इस्पात आधारित उद्योग और रत्न-हीरा क्षेत्र की छोटी कंपनियों को उच्च लागत, आपूर्ति की कमी और ऑर्डर में देरी या रद्द होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इन परिस्थितियों का असर रोजगार, काम के घंटे और व्यवसाय की निरंतरता पर पड़ सकता है विशेषकर असंगठित एवं प्रवासी श्रमिकों पर। भारत में चिकित्सकीय उपकरणों से जुड़े माल की लागत भी होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका है, जबकि दवाओं के थोक दाम पहले ही 10-15 प्रतिशत बढ़ चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव एवं एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए यूएनडीपी की क्षेत्रीय निदेशक कन्नी विग्नराजा ने कहा कि इस स्थिति के बीच देशों के पास दीर्घकालिक मजबूती बढ़ाने के अवसर भी हैं जैसे अनुकूल सामाजिक सुरक्षा, मजबूत स्थानीय व क्षेत्रीय आपूर्ति शृंखलाएं और विविध ऊर्जा व खाद्य प्रणालियां विकसित करना।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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