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संचार साथी पर सियासी रार के बीच US दिग्गज कंपनी की भी एंट्री, ऐप प्रीलोड करने का करेगा विरोध?

संचार साथी पर सियासी रार के बीच US दिग्गज कंपनी की भी एंट्री, ऐप प्रीलोड करने का करेगा विरोध?

संक्षेप:

भारत सरकार ने Apple, Samsung और Xiaomi जैसी कंपनियों को गोपनीय तरीके से आदेश दिया था कि वे 90 दिनों के अंदर अपने फोन में संचार साथी या कम्युनिकेशन पार्टनर नाम का ऐप प्रीलोड करें।

Dec 02, 2025 04:16 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सभी नए मोबाइल उपकरणों में संचार साथी ऐप प्रीलोड करने के दूरसंचार मंत्रालय के निर्देश पर देश में सियासी बवाल मचा हुआ है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे पेगासस की तरह जासूसी उपकरण करार दिया है और सरकार के इस कदम का विरोध किया है। दूसरी तरफ, इस मामले पर हंगामा बढ़ता देख केंद्रीय दूसरंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को कहा कि धोखाधड़ी की सूचना देने वाले ऐप ‘संचार साथी’ को उपयोगकर्ता जब चाहे हटा सकते हैं।

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इसी बीच, अमेरिकी दिग्गज कंपनी Apple ने संकेत दिए हैं कि वह सरकार के इस दिशा-निर्देश का विरोध करेगी। NDTV ने मामले से जुड़े तीन सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि Apple अपने स्मार्टफोन में सरकारी साइबर सेफ्टी ऐप प्रीलोड करने के आदेश का पालन करने का प्लान नहीं बना रहा है और वह अपनी चिंताएं नई दिल्ली को बताएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के इस कदम से सर्विलांस की चिंताएं पैदा होने के बाद Apple की तरफ से ये बात सामने आई है।

निर्देश नहीं मानने का Apple बना रहा प्लान

रिपोर्ट में कहा गया है कि Apple इस निर्देश को नहीं मानने का प्लान बना रहा है और सरकार को बताएगा कि वह दुनिया में कहीं भी ऐसे आदेशों को नहीं मानता है। Apple की चिंताओं से वाकिफ इंडस्ट्री के दो सूत्रों ने कहा कि इस आदेश को मानने से कंपनी के iOS इकोसिस्टम के लिए कई प्राइवेसी और सिक्योरिटी प्रभावित हो सकते हैं। सूत्रों ने अपना नाम बताने से मना कर दिया क्योंकि कंपनी की स्ट्रैटेजी प्राइवेट है। पहले सूत्र ने कहा, "यह सिर्फ हथौड़े जैसा नहीं है, यह डबल-बैरल गन जैसा है।" हालांकि मामले में Apple और टेलीकॉम मिनिस्ट्री ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया।

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सरकार का क्या है निर्देश?

बता दें कि कुछ दिन पहले ही भारत सरकार ने Apple, Samsung और Xiaomi जैसी कंपनियों को गोपनीय तरीके से आदेश दिया था कि वे 90 दिनों के अंदर अपने फोन में संचार साथी या कम्युनिकेशन पार्टनर नाम का ऐप प्रीलोड करें। इस ऐप का मकसद चोरी हुए फोन को ट्रैक करना, उन्हें ब्लॉक करना और उनका गलत इस्तेमाल होने से रोकना है। रकार यह भी चाहती है कि मैन्युफैक्चरर यह पक्का करें कि ऐप डिसेबल न हो। और जो डिवाइस पहले से सप्लाई चेन में हैं, उनके लिए मैन्युफैक्चरर को सॉफ्टवेयर अपडेट के ज़रिए फोन में ऐप डालना चाहिए।

120 दिनों के अंदर अनुपालन रिपोर्ट देना जरूरी

दूरसंचार विभाग के 28 नवंबर के निर्देश के अनुसार, आदेश जारी होने की तारीख से 90 दिन के बाद भारत में विनिर्मित या आयातित होने वाले सभी मोबाइल फोन में यह ऐप होना अनिवार्य होगा। सभी मोबाइल फोन कंपनियों का 120 दिन के भीतर दूरसंचार विभाग को अनुपालन रिपोर्ट देना आवश्यक है। हालांकि अब विवाद होने के बाद दूरसंचार मंत्री सिंधिया ने कहा, ‘‘ यदि आप इसे हटाना चाहते हैं, तो हटा दें। हालांकि देश में हर कोई यह नहीं जानता कि यह ऐप उन्हें धोखाधड़ी और चोरी से बचाने के लिए है।’’

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केंद्रीय संचार मंत्री ने कहा, ‘‘ इस ऐप को सभी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। अगर आप इसे हटाना चाहते हैं, तो इसे हटा दें। अगर आप इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, तो इसे पंजीकृत न करें। अगर आप इसे पंजीकृत करते हैं, तो यह सक्रिय रहेगा। अगर आप इसे पंजीकृत नहीं करते हैं तो यह बंद रहेगा।’’ (भाषा इनपुट्स के साथ)

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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