
ऐसी जहरीली विचारधारा से... कर्नाटक के RSS विवाद में कूदे उदित राज; बिहार चुनाव से क्या कनेक्शन?
ध्रुवीकरण की इस कोशिश में कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने संघ से नया पंगा लिया है। सिद्धारमैया सरकार ने एक तरफ सरकारी स्कूलों और कॉलेज परिसरों में आरएसएस की गतिविधियों को रोकने के लिए नियम लाने का फैसला किया है।
दक्षिणी राज्य कर्नाटक में राज्य सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसवक संघ (RSS) के बीच छिड़े विवादों में कांग्रेस नेता उदित राज ने एंट्री ली है। उन्होंने कहा है कि ऐसी जहरीली विचारधाराओं से दूरी बनाए रखनी चाहिए...क्योंकि यह विचारधारा दलितों और पिछड़े वर्गों से नौकरियां और शिक्षा छीनती है।" समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए कांग्रेस नेता ने ये बातें कही हैं। अहम बात ये है कि RSS का विवाद ऐसे समय में गहराया है, जब कुछ ही दिनों में बिहार में विधान सभा चुनाव होने हैं।

दरअसल, बिहार चुनाव से पहले ऐसा बयान देकर उदित राज ने दलितों-पिछड़ों और वंचित समूहों को कांग्रेस की तरफ लामबंद करने की कोशिश है। हालांकि, कांग्रेस की तरफ से यह कोशिश पहली बार नहीं हुई है। वह लंबे समय से ओबीसी और दलितों के मुद्दे को उठाती रही है और 50 फीसदी आरक्षण की सीमा को तोड़ने और जाति गणना की वकालत करती रही है।
बिहार का सामाजिक समीकरण क्या?
बता दें कि 2023 की बिहार जाति जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में पिछड़े वर्ग (OBC) की आबादी करीब 27% और अत्यंत पिछड़े वर्ग (EBC) की आबादी 36% है, जो मिलकर राज्य की कुल आबादी का 63% होता है। इसके अलावा राज्य में अनुसूचित जाति की आबादी 19.65 फीसदी और अनुसूचित जनजाति की आबादी 1.68 फीसदी है। यानी दलितों और पिछड़ों की कुल आबादी करीब 85 फीसदी है। राज्य में अनारक्षित यानी सवर्ण 15.52 प्रतिशत हैं। साफ है कि कांग्रेस की कोशिश 85 फीसदी वोटरों को यह संदेश देना है कि भाजपा और उसका वैचारिक संगठन RSS जहरीली विचारधारा को बढ़ाने वाला है, जो दलितों और पिछड़ों को उनके अधिकारों से वंचित रखता रहा है।
कर्नाटक में क्या विवाद?
इस बीच, ध्रुवीकरण की इस कोशिश में कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने संघ से नया पंगा लिया है। सिद्धारमैया सरकार ने एक तरफ सरकारी स्कूलों और कॉलेज परिसरों में आरएसएस की गतिविधियों को रोकने के लिए नियम लाने का फैसला किया है। वहीं कलबुर्गी जिले के चित्तपुर में RSS को रूट मार्च की इजाजत नहीं देकर विवाद को बढ़ा दिया है। अब यह मामला हाई कोर्ट तक जा पहुंचा है।
ध्यान भटकाने का आरोप
दूसरी तरफ, भाजपा ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों जैसे पथ संचलन पर प्रतिबंध लगाकर अपनी कथित विफलताओं से ‘‘जनता का ध्यान भटकाने’’ का आरोप लगाया है। पार्टी ने कलबुर्गी जिले के चित्तपुर में आरएसएस के पथ संचलन पर उच्च न्यायालय के निर्देश का स्वागत किया, जहां अधिकारियों ने रविवार को अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हालांकि, मंत्री प्रियंक खरगे ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता अदालत के निर्देशों की गलत व्याख्या कर रहे हैं और गलत सूचना फैला रहे हैं। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने रविवार को आरएसएस के प्रतिनिधियों से चित्तपुर में दो नवंबर को पथ संचलन आयोजित करने की अनुमति के लिए एक नया आवेदन दायर करने को कहा। न्यायालय ने अधिकारियों से आवेदन पर विचार करने और 24 अक्टूबर को अदालत को रिपोर्ट सौंपने को भी कहा।





