तो टल गया LPG संकट? सरकार का ऐलान- तेल रिफाइनरियों ने बढ़ाया 10% उत्पादन
सरकार ने कहा कि कुछ समय के लिए बाजार में चिंता की स्थिति बनी थी, लेकिन अब आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है। लोगों से सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करने की अपील की गई है।

ईरान युद्ध और मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच तेल और गैस सप्लाई में आई बाधा के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी (रसोई गैस) की कोई कमी नहीं है और हाल के दिनों में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की संभावित कमी को लेकर जो चिंताएं सामने आई थीं, अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिए जाने के बाद एलपीजी उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। साथ ही जमाखोरी और अनियमितताओं को रोकने के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक कदम भी उठाए गए हैं।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि देश की सभी तेल रिफाइनरियां फिलहाल 100 प्रतिशत क्षमता के साथ काम कर रही हैं ताकि एलपीजी की आपूर्ति लगातार बनी रहे। इसके अलावा वितरण व्यवस्था पर निगरानी को और सख्त करने के लिए मॉनिटरिंग अवधि को 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। सरकार ने जमाखोरी और काला बाजारी पर रोक लगाने के लिए Essential Commodities Act के प्रावधान लागू किए हैं। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि Essential Services Maintenance Act (ESMA) लागू नहीं किया गया है।
अफवाहों से बचने की अपील
सरकार ने कहा कि कुछ समय के लिए बाजार में चिंता की स्थिति बनी थी, लेकिन अब आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है। लोगों से सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करने की अपील की गई है, क्योंकि ऐसी अफवाहें अनावश्यक घबराहट पैदा कर सकती हैं। अधिकारियों ने बताया कि घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कुछ उद्योग संगठनों द्वारा व्यावसायिक एलपीजी की संभावित कमी को लेकर चिंता जताई गई थी, लेकिन सरकार ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
वैश्विक संकट के बीच भारत की तैयारी
सरकारी सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव के बावजूद भारत ऊर्जा आपूर्ति के मामले में कई देशों से बेहतर स्थिति में है। ऊर्जा मंत्रालय और तेल कंपनियां लगातार अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा न आए। सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और मांग को संभालने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं मौजूद हैं। किसी प्रकार का संकट नहीं है।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


