ईरान-US मध्यस्थता में नाकाम रहा पाकिस्तान, आसिम मुनीर बना रहे पहलगाम जैसा प्लान? IB ने चेताया
IB के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तान इस बात का जोखिम उठाने को तैयार है कि उसके आतंकी ठिकानों पर भारत फिर से हमला करे और वह जवाबी कार्रवाई से आगे बढ़कर इस मामले में अमेरिका को शामिल होने के लिए मजबूर कर सके।
ईरान-अमेरिका संघर्ष में नाकाम शांति वार्ता की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने थोड़ा पुचकारा क्या कि उसके मंसूबे एक बार फिर हवा हवाई होने लगे हैं। पाकिस्तानी सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अब डबल गेम खेलते हुए जम्मू-कश्मीर में पहलगाम जैसी एक बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहे हैं। इसका मकसद एक तरफ भारत को जवाबी कार्रवाई के लिए उकसाना तो दूसरी तरफ कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। कश्मीर से जुड़े मामलों पर पैनी नजर रखने वाले खुफिया विभाग के अधिकारियों ने यह चेतावनी दी है।
खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान की यह रणनीति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में आई फिर से नजदीकी पर आधारित है। इसका मकसद कश्मीर में वैश्विक हस्तक्षेप को बढ़ावा देना है, ठीक वैसे ही जैसे 2019 में भारत की बालाकोट स्ट्राइक के बाद हुआ था। खुफिया सूत्रों ने इसे "हताशा में उठाया गया" दो-तरफ़ा कदम बताया है: पहला, घाटी में स्थानीय आतंकी गुटों को फिर से सक्रिय करना ताकि पर्यटन को नुकसान पहुंचाया जा सके और सुरक्षा बलों का ध्यान भटकाया जा सके; और दूसरा, लॉन्च पैड से पाकिस्तानी आतंकियों का इस्तेमाल करके सीमा पार से एक बड़ा हमला किया जा सके।
अमेरिका को घसीटना चाह रहे मुनीर
IB के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी IANS को बताया, "पाकिस्तान इस बात का जोखिम उठाने को तैयार है कि उसके आतंकी ठिकानों पर भारत फिर से हमला करे और वह जवाबी कार्रवाई से आगे बढ़कर इस मामले में अमेरिका को शामिल होने के लिए मजबूर कर सके।" मुनीर को लगता है कि जब वह भारत को उकसाएंगे और भारत पाक के अंदर आतंकी ठिकानों पर हमला करेगा, तब वह अमेरिका को इस मामले में घसीट लेंगे और वैश्विक पटल पर इसका फायदा उठा लेंगे।
ईरान पर नाकामी के बीच मुनीर का बड़ा दांव
दरअसल, आसिम मुनीर के लिए यह दांव निजी और राजनीतिक, दोनों ही लिहाज से अहम है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने की उनकी हालिया कोशिश नाकाम रही है, जिससे एक वैश्विक राजनेता के तौर पर उनकी छवि को धक्का लगा है। सूत्रों के मुताबिक, देश के अंदर बढ़ती आलोचनाओं का सामना करते हुए अब उनकी नजर राष्ट्रपति पद पर है, और उन्हें लगता है कि कश्मीर में तनाव बढ़ाकर ही वह अपनी स्थिति को मज़बूत कर सकते हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा, “सबसे ऊंचे पद पर पहुंचने के अपने दावे को सही साबित करने के लिए कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने से बेहतर और क्या हो सकता है?”
कश्मीर पर भारत की नीति अडिग
भारत कश्मीर मुद्दे को बाहरी दखल से दूर रखने की अपनी पुरानी नीति पर हमेशा कायम रहा है। खासकर 2019 में जम्मू-कश्मीर से पूरी तरह अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की बार-बार की कोशिशें नाकाम रहीं, क्योंकि नई दिल्ली ने इसे हमेशा अपना आंतरिक मामला बताया है। खुफिया ब्यूरो (IB) ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि पाकिस्तान अब "स्थानीय" आतंकी गुटों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि वह छोटे-मोटे हमले जारी रख सके। इससे उन सुरक्षा बलों पर दबाव बढ़ेगा जो अभी सीमा पर तैनात हैं। अगर पाकिस्तान इसमें कामयाब हो जाता है, तो नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार इंतज़ार कर रहे सैकड़ों आतंकी भारत में घुसपैठ कर सकते हैं। IB के एक अधिकारी ने कहा, "ध्यान भटकाने की यह रणनीति बहुत अहम है - पहले पर्यटन को नुकसान पहुंचाओ, फिर सैनिकों को अलग-अलग जगहों पर फैला दो, और उसके बाद एक बड़ा हमला करो।"
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लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


