मिडिल-ईस्ट में जंग और तनाव के बीच भूमध्यसागर क्यों पहुंची भारतीय नौसेना; नापे 10 देश और 17,400 नॉटिकल मील

पीटीआई, नई दिल्ली
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ताजा घटनाक्रम में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने गुरुवार को यमन के बंदरगाह शहर मोचा पर कब्ज़ा कर लिया और लाल सागर के तट से होते हुए रणनीतिक द्वीपों की ओर आगे बढ़ चुके हैं। इसके साथ ही हूतियों ने बाब अल-मंदेब पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है।

INS Sudarshini
मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस सुदर्शिनी भूमध्यासागर जा पहुंचा है।

मिडिल-ईस्ट में फिर से जंग और तनाव गहरा गया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने हाल के दिनों में सऊदी अरब के तेल और सैन्य ठिकानों के साथ-साथ कॉमर्शियल एयरपोर्ट और दक्षिणी शहरों पर बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इससे जंग अब दूसरे क्षेत्रों में प्रवेश कर गया है। मुस्लिम नाटो भी इस नई जंग और तनाव पर भौंहें ताने खड़ा है। पाकिस्तान मक्का समझौते की दुहाई दे ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर बम गिराने को बेकरार है।

इन सबके बीच, भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस सुदर्शिनी भूमध्यासागर जा पहुंचा है। हालांकि, यह एक प्रशिक्षण पोत है जो अपनी अंतरमहाद्वीपीय समुद्री यात्रा 'लोकायन-26' के अंतर्गत अब इटली के लिवोर्नो बंदरगाह शहर पर पहुंचा है। यह पोत ट्रांस-ओशनिक अभियान 'लोकायन 2026' के तहत वहां पहुंचा है। इस अभियान के दौरान पोत 10 देशों से होते हुए 17,400 नॉटिकल मील से ज़्यादा की दूरी तय कर वहां पहुंचा है। इसके साथ ही आईएनएस सुदर्शिनी भारत की समुद्री परंपराओं को बढ़ावा दे रहा है और मित्र देशों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है।

भूमध्यसागर में संयुक्त युद्धाभ्यास

लिवोर्नो पहुँचने से पहले, इस पोत ने भूमध्य सागर में इतालवी नौसेना के ट्रेनिंग शिप ITS पैलिनुरो के साथ 'पैसेज एक्सरसाइज' (समुद्री मार्ग पर संयुक्त अभ्यास) की। इस अभ्यास में तालमेल बिठाकर जहाज चलाने और पाल (सेल) संभालने का अभ्यास शामिल था, जिससे दोनों नौसेनाओं के कर्मियों को एक-दूसरे से बातचीत करने और पेशेवर जानकारी साझा करने का मौका मिला। लिवोर्नो में भारतीय नौसैनिकों का रुकना इसलिए भी खास है क्योंकि यह शहर प्रतिष्ठित इतालवी नौसेना अकादमी का घर है और इससे भारतीय और इतालवी नौसेनाओं के बीच आगे और पेशेवर सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

पेशेवर बातचीत करने का कार्यक्रम

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यहाँ रुकने के दौरान, भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं और इतालवी कैडेटों के बीच एक-दूसरे के जहाजों का दौरा करने और पेशेवर बातचीत करने का कार्यक्रम है। INS सुदर्शिनी को आगंतुकों के लिए भी खोला जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को भारतीय नौसेना की सेल ट्रेनिंग परंपराओं को करीब से जानने का मौका मिलेगा।

तैनाती का क्या मकसद?

इस तैनाती का मकसद भारत और सहयोगी देशों के बीच आपसी भाईचारा बढ़ाना, पेशेवर आदान-प्रदान को बेहतर बनाना और समुद्री सहयोग को मजबूत करना है। बता दें कि 'लोकायन 2026' भारत की व्यापक समुद्री पहुंच और 'महासागर' (MAHASAGAR - क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति) के विजन के अनुरूप भी है। यह अभियान समुद्री साझेदारी को आगे बढ़ाने और समुद्र के रास्ते दोस्ती, सहयोग और साझा समृद्धि का संदेश फैलाने में भारतीय नौसेना की भूमिका को रेखांकित करता है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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