
सुप्रीम कोर्ट में चल रहा कस्टडी केस, बच्चे को लेकर रूस भाग गई महिला, अब दूतावास ने दिया जवाब
रूसी नागरिक विक्टोरिया बसु से जुड़े मामलों में मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए रूसी दूतावास ने कहा कि यह रिपोर्ट्स वास्तविकता से मेल नहीं खाती हैं। यह केवल अटकलों पर आधारित हैं।
सुप्रीम कोर्ट में बच्चे की कस्टडी को लेकर चल रहे मामले के बीच रूस भागने वाली महिला के मामले में शनिवार को रूसी दूतावास ने जवाब दिया है। दूतावास की तरफ से कहा गया कि बच्चे के साथ भारत छोड़कर भागी रूसी महिला को लेकर दूतावास लगातार भारतीय अधिकारियों के संपर्क में है। गौरतलब है कि रूसी दूतावास की यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद आई है, जिसमें अदालत ने सवाल किया था कि कथित तौर पर महिला को भगाने में शामिल रूसी दूतावास के अधिकारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ क्यों नहीं की गई।

रूसी नागरिक विक्टोरिया बसु से जुड़े मामलों में मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए रूसी दूतावास ने कहा कि यह रिपोर्ट्स वास्तविकता से मेल नहीं खाती हैं। यह केवल अटकलों पर आधारित हैं। इसके अलावा रूसी दूतावास की तरफ से जारी बयान में कहा गया, वह भारतीय कानून के अनुसार यहां रहने वाले रूसी नागरिकों के अधिकारों और वैध हितों को सुनिश्चित करने और उनकी रक्षा करने के अपने कर्तव्यों का पालन कर रहा है। मिस बसु के मामले में हम भारतीय अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
इससे पहले, जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच समुचित समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया था। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि विदेश मंत्रालय नेपाल के साथ एमएलएटी के माध्यम से नेपाली नागरिकों समेत अन्य संलिप्त व्यक्तियों की जांच के लिए दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय कर रहा है।
पीठ ने रूसी महिला को नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह के रास्ते बच्चे के साथ देश से भागने में मदद करने में रूसी दूतावास के अधिकारियों की मिलीभगत का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस ने रूसी अधिकारियों को नोटिस भेजकर विस्तृत जानकारी मांगी, लेकिन इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।
सरकार क्या बोली?
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि विदेश मंत्रालय नेपाल के साथ एमएलएटी के माध्यम से नेपाली नागरिकों समेत अन्य संलिप्त व्यक्तियों की जांच के लिए दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘विभिन्न प्रयासों के बावजूद, रूसी पक्ष से हमें सूचनाएं नहीं मिल पा रही हैं।’
इस दौरान पीठ ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, "हम ऐसा कोई आदेश पारित नहीं करना चाहते जिससे भारत और रूस के बीच संबंध खराब हों, लेकिन यह एक ऐसा मामला है जिसमें एक बच्चा भी शामिल है। हम केवल यही उम्मीद कर सकते हैं कि बच्चा अपनी मां के साथ स्वस्थ और ठीक हो। उम्मीद है कि यह मानव तस्करी का मामला नहीं है...।’’ हालांकि कोर्ट ने इसे उच्चतम न्यायालय ने स्थिति को ‘अस्वीकार्य’ बताया और ‘अदालत की घोर अवमानना’ करार दिया था।
पीठ ने शुक्रवार को कहा, ‘भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने हमें आश्वासन दिया है कि सुनवाई के दौरान हुई चर्चा के आधार पर आगे की कार्रवाई करने के लिए विदेश मंत्रालय और दिल्ली पुलिस को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।’ पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भाटी से दो सप्ताह में वस्तु-स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
क्या है मामला?
रूसी नागरिक विक्टोरिया बसु अपने भारतीय पति के खिलाफ बच्चे की कस्टडी की कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। वह 2019 से भारत में रह रही है। शुरुआत में वह एक्स-1 वीजा पर भारत आई थी, जिसकी अवधि बाद में समाप्त हो गई। इस मामले में 22 मई को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया था कि बच्चे का विशेष संरक्षण सप्ताह में तीन दिन सोमवार, मंगलवार और बुधवार को मां को दिया जाए तथा शेष दिनों में बच्चे को उसके पिता की विशेष संरक्षण में रहने का निर्देश दिया जाये।
लेकिन 21 जुलाई को रूसी महिला के साथ बच्चे के संरक्षण की लड़ाई लड़ रहे व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि रूसी महिला बच्चे के संरक्षण से जुड़े अदालती आदेश का पालन नहीं कर रही है। व्यक्ति ने दावा किया कि सात जुलाई के बाद से उसे अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
उच्चतम न्यायालय ने 17 जुलाई को दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को बच्चे का तुरंत पता लगाने का निर्देश दिया था और साथ ही केंद्र से कहा था कि वह महिला और नाबालिग के संबंध में ‘लुकआउट नोटिस’ जारी करे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह देश छोड़कर न जा सके।
इस पर केंद्र सरकार ने 21 जुलाई को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया था कि उस रूसी महिला के अपने बच्चे के साथ नेपाल के रास्ते भारत से बाहर जाने और संभवत: शारजाह के रास्ते वापस रूस पहुंचने का अंदेशा है, जो अपने अलग हुए भारतीय पति के साथ बच्चे के संरक्षण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है।





