कॉकरोच के बाद अब मैदान में 'दिमागी नक्सल पार्टी', PM के तंज के बाद हुआ गठन; लाखों लोग जुड़े
Dimagi Naxal Party: एक पोस्ट में पार्टी ने लिखा है कि हम भगत सिंह के अनुयायी हैं... अगर वे हमारे अकाउंट सस्पेंड करने या हमें देश-विरोधी करार देने की कोशिश करते हैं, तो बस इतना जान लें — वे भगत सिंह का अपमान कर रहे हैं।

Dimagi Naxal Party: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बाद मैदान में एक नई पार्टी आ गई है। उसका नाम है 'दिमागी नक्सल पार्टी' (Dimagi Naxal Party)। अब तक इससे लाखों लोग जुड़ चुके हैं। दरअसल, 80वें स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'दिमागी नक्सल' (Intellectual Naxal) शब्द का इस्तेमाल किया था। अब उसी शब्द ने देश के राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर बड़ी हलचल पैदा कर दी है। इस भाषण के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर 'Dimagi Naxal Party' (@dimaginaxalparty) नाम से एक नया पेज उभर कर सामने आया, जिसने मात्र 24 घंटों में 1 लाख से अधिक और दो दिनों के अंदर 1.8 लाख से अधिक फॉलोअर्स हासिल कर इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है।
हालांकि, यह कोई आधिकारिक या मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री के भाषण के तंज से जन्मी एक सोशल मीडिया पहल है। पार्टी का X (ट्विटर) पर भी "दिमागी नक्सल जनता पार्टी" नाम से एक अकाउंट है, जिसके 7 हज़ार से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं। इंस्टाग्राम और X पर पार्टी के बायो के अनुसार, इसका मोटो है "सोचो। रिसर्च करो। विरोध करो।" इंस्टाग्राम बायो में कहा गया है कि पार्टी के संस्थापक "एक दिमागी भारतीय" हैं, जबकि सह-संस्थापक "56 इंच वाले" व्यक्ति हैं।
क्या है विचारधारा और कौन संस्थापक?
इन्स्टाग्राम पेज के पोस्ट्स के अनुसार, पार्टी खुद को स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह की विचारधारा का अनुयायी बताती है। एक पोस्ट लिखा गया है, "हम भगत सिंह के अनुयायी हैं... अगर वे हमारे अकाउंट्स को सस्पेंड करने या हमें देशद्रोही घोषित करने की कोशिश करते हैं, तो जान लें कि वे भगत सिंह का अपमान कर रहे हैं।" हालांकि यह पता नहीं है कि इसे किसने बनाया है और इंस्टाग्राम अकाउंट कब बनाया गया था, लेकिन पार्टी का X अकाउंट अगस्त 2026 में बनाया गया था।
बड़ी हस्तियों का समर्थन और 'कॉकरोच जनता पार्टी' से तुलना
यह डिजिटल हैंडल इंस्टाग्राम पर कई लोकप्रिय और मुखर हस्तियों को फॉलो कर रहा है, जिनमें हास्य कलाकार कुणाल कामरा, श्याम रंगीला, यूट्यूबर ध्रुव राठी, अभिनेता प्रकाश राज, फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप, अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार शामिल हैं। सोशल मीडिया विश्लेषक इसकी तुलना हाल ही में उभरी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) से कर रहे हैं। CJP भी देश के मुख्य न्यायाधीश की एक कथित टिप्पणी के बाद अस्तित्व में आई थी और देखते ही देखते महज 10 दिनों में इसके फॉलोअर्स की संख्या 2 करोड़ के पार पहुंच गई थी।
साइबर हमले के आरोपों के बीच अकाउंट हुआ 'गायब'
तेजी से बढ़ती इस लोकप्रियता के बीच सोमवार को इस पार्टी के आधिकारिक X हैंडल (@DNJP_India) पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया गया कि उनके इंस्टाग्राम पेज पर साइबर हमले शुरू हो गए हैं। इस पोस्ट में लिखा गया, "इंस्टाग्राम पर हमारे खिलाफ साइबर अटैक शुरू हो चुका है। देखते हैं कि क्या वे हमारी आवाज दबाने में सफल हो पाते हैं!" इस आरोप के कुछ ही समय बाद, 'Dimagi Naxal Party' का इंस्टाग्राम पेज ऑफलाइन हो गया है और फिलहाल यह अनुपलब्ध दिखाई दे रहा है। ऑफलाइन होने से पहले पेज ने कई इंस्टाग्राम स्टोरीज पोस्ट कर साइबर हमलों का शिकार होने की बात कही थी।
पीएम मोदी के किस बयान पर मचा है बवाल?
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि देश ने जंगलों में सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद को तो पीछे धकेल दिया है, लेकिन कुछ 'दिमागी नक्सली' अभी भी वैचारिक स्तर पर युवाओं को गुमराह करने और देश में अशांति फैलाने की ताक में हैं। उन्होंने देशवासियों से अपील की थी कि ऐसे 'दिमागी नक्सलियों' को पहचानें और उन्हें अलग-थलग करें।
राजनीतिक गलियारों में चल रहे तीखे तीर
पीएम मोदी के इस बयान पर विपक्ष पूरी तरह हमलावर हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है।" उन्होंने इस शब्द को 'अर्बन नक्सल', 'आंदोलनजीवी' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे पुराने विशेषणों का ही एक नया रूप बताया। वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे प्रधानमंत्री की "हताशा का स्पष्ट संकेत" करार दिया है। विपक्ष के चौतरफा हमलों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नेताओं को 'दिमागी नक्सल' नहीं कहा था। रिजिजू के अनुसार, यह शब्द केवल उन लोगों के लिए है जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते हैं, अलगाववादियों के साथ खड़े होकर अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं और पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की मंशा रखते हैं (चिकन नेक काटने की बात करते हैं)।


