अभिजीत दीपके जब जरांगे से मिले तो टेंशन में आई सरकार? कुनबी प्रमाण पत्र मामले में ताबड़तोड़ ऐक्शन
बुधवार को जरांगे ने राज्य के मंत्री और मराठा आरक्षण उप-समिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल पर केवल मीठी बातें करने और आश्वासन देकर समुदाय को धोखा देने का आरोप लगाया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर 12 सितंबर तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन मुंबई पहुंचेगा।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार (11 सितंबर) को मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे से उनके अनशन स्थल जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में जाकर मुलाकात की, जो पिछले 14 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। इसके साथ ही दीपके ने महाराष्ट्र सरकार से अपील की कि वह मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे से बातचीत करे। इतना ही नहीं उन्होंने आंदोलन में 'जबरन हस्तक्षेप' करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ चेतावनी भी दी। बाद में मीडिया से बातचीत में दीपके ने कहा, ''सरकार को उनकी मांगों को समझने के लिए उनसे बातचीत करनी चाहिए।''
उन्होंने कहा कि जरांगे प्रथमेश देशमुख जैसे छात्रों के लिए सुविधाएं चाहते हैं। देखमुख एमपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, जिन्होंने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। दीपके ने बृहस्पतिवार को धाराशिव में देशमुख के परिवार से मुलाकात की थी और कहा कि प्रथमेश जैसे छात्रों के भविष्य को लेकर जरांगे आंदोलन कर रहे हैं। दीपके ने पूछा, ''मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं? वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए विदेश भेजते हैं, वहीं यहां के स्कूलों का स्तर ठीक नहीं हैं।''
बीड जिला प्रशासन ने शुरू किया विशेश अभियान
इस बीच, खबर है कि महाराष्ट्र के बीड जिला प्रशासन ने मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाण-पत्र जारी करने और उनके सत्यापन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और तेज करने के लिए ताबड़तोड़ एक विशेष अभियान शुरू किया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।जिला कलेक्टर विवेक जॉनसन ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि 10 सितंबर से 17 सितंबर तक सभी राजस्व परिक्षेत्रों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं और लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में एक विशेष सुविधा केंद्र बनाया गया है।
पात्र लाभार्थियों को मौके पर ही सर्टिफिकेट
उन्होंने बताया कि प्रशासनिक सेवाओं को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने के राज्य सरकार के निर्देशों के तहत आयोजित इस एक हफ्ते के अभियान का उद्देश्य पुराने राजस्व रिकॉर्ड की तलाश करना, नए आवेदनों की प्राथमिकता के आधार पर जांच करना और पात्र लाभार्थियों को मौके पर ही प्रमाण पत्र जारी करना है। जॉनसन ने बताया कि उप जिला निर्वाचन अधिकारी मनोज घोडे पाटिल को इस प्रक्रिया की देखरेख के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि पाटिल काम में तेजी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उप मंडलीय अधिकारी, तहसीलदार और जाति जांच समिति के साथ दैनिक आधार पर समन्वय करेंगे। कुनबी एक पारंपरिक कृषक समुदाय है जो आधिकारिक तौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी)श्रेणी में आता है। इससे सदस्य शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लाभ के लिए पात्र हैं।
मनोज जरांगे ने क्या कहा?
बता दें कि मनोज जरांगे मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वह हैदराबाद और सातारा गजट अभिलेखों को लागू करने तथा पात्र मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी (ओबीसी) जाति प्रमाणपत्र जारी करने की मांग भी कर रहे हैं। उनके स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच जरांगे ने कहा कि वह यह देखेंगे कि कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए शिविर किस तरह आयोजित किए जा रहे हैं और क्या ये शिविर मौजूदा आंदोलन के कारण और उसे सिर्फ टालने के लिए तो नहीं लगाए जा रहे हैं।


